Ali Khamenei Funeral: परमाणु बनाने को लेकर आतुर ईरान, लेकिन खामेनेई क्यों थे इसके खिलाफ? जानिए इसके पीछे की वजह
Ali Khamenei Funeral: ईरान एक काफी लंबे अर्से से परमाणु बनाने की कोशिशों में है. इसी बीच आइए जानते हैं कि खामेनेई परमाणु हथियार के खिलाफ क्यों थे.

- खामेनेई ने परमाणु हथियार को हराम बताकर फतवा दिया।
- निर्दोषों की सुरक्षा व युद्ध अनुभव से यह नीति बनी।
- शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का समर्थन; नीति समीक्षा की मांग।
Ali Khamenei Funeral: ईरान का परमाणु कार्यक्रम दशकों से वैश्विक बहस के केंद्र में बना हुआ है. कई देशों का ऐसा मानना था कि तेहरान परमाणु हथियार को बनाने का प्रयास कर रहा है. लेकिन आपको बता दें कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने लगातार कहा कि परमाणु बम इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ है.
खामेनेई ने परमाणु हथियार को हराम बताया
परमाणु हथियारों के प्रति खामेनेई के विरोध का एक सबसे बड़ा कारण इस्लामी कानून की उनकी व्याख्या थी. 2003 में उन्होंने एक मौखिक धार्मिक आदेश या फिर फतवा जारी किया जिसमें उन्होंने यह कहा था कि बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियार, जिनमें परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियार भी शामिल हैं, का उत्पादन, भंडारण और इस्तेमाल इस्लाम के तहत पूरी तरह वर्जित है. खामेनेई के मुताबिक ऐसे हथियार बुनियादी इस्लामी सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे अंधाधुंध तबाही होती है और ये लड़ाकों और निर्दोष नागरिकों के बीच अंतर नहीं कर पाते.
बड़े पैमाने पर तबाही के खिलाफ इस्लामी सिद्धांत
शिया इस्लामी न्याय शास्त्र के तहत महिलाओं, बच्चों और गैर लड़ाकों के साथ निर्दोष लोगों की जानबूझकर हत्या को नैतिक रूप से अस्वीकार माना जाता है. परमाणु हथियार काफी बड़े पैमाने पर तबाही मचाते हैं जिसका असर सैन्य लक्ष्यों से कहीं ज्यादा होता है.
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ईरान इराक युद्ध से सबक
ईरान का रुख 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान मिले दर्दनाक अनुभव से भी तय हुआ था. इस संघर्ष के दौरान इराक ने ईरानी सेना और नागरिकों पर बड़े पैमाने पर रासायनिक हमले किए थे. इस हमले में हजारों लोग मारे गए थे. इन हमलों का शिकार होने के बावजूद भी ईरान के उस समय के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने कथित तौर पर रासायनिक हथियारों से जवाबी कार्रवाई करने से मना कर दिया था. बाद में खामेनेई ने भी इसी सिद्धांत को अपनाया.
शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का समर्थन
वैसे तो खामेनेई परमाणु हथियारों के खिलाफ थे लेकिन उन्होंने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक विकसित करने के ईरान के अधिकार का लगातार समर्थन किया है. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक उनका परमाणु कार्यक्रम सैन्य इस्तेमाल के बजाय बिजली उत्पादन, वैज्ञानिक अनुसंधान और चिकित्सा के कामों के लिए था.
लेकिन बीते कुछ सालों में बदलती भू राजनीतिक स्थिति ने ईरान की परमाणु नीति के बारे में चर्चा को तेज कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ कमांडरों और सलाहकारों ने ईरान के लंबे वक्त से चले आ रहे परमाणु सिद्धांत की समीक्षा करने की मांग की है. उनका यह कहना है कि इजरायल और पश्चिमी देशों से बढ़ते सैन्य खतरों की वजह से प्रतिरोध के मजबूत उपायों की जरूरत है.
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