'चंपत राय की छवि अब भी बेदाग', राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के बाद बोले कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि
Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय का बचाव किया है.

- ट्रस्ट कोषाध्यक्ष ने चंपत राय का बचाव किया, इस्तीफा स्वीकृत.
- ट्रस्ट ने भेंट के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही स्वीकार की.
- जांच में आठ लोग गिरफ्तार, पाँच मूल्यवान वस्तुएं सुरक्षित.
- राम मंदिर में चढ़ावे की पूरी प्रबंधन प्रणाली बदलेगी.
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय का बचाव किया है. सोमवार (7 जुलाई) को उन्होंने कहा कि राय को उन लोगों ने ‘धोखा दिया’ जिन पर उन्होंने भरोसा किया था.
ट्रस्ट की सोमवार को हुई बैठक में चढ़ावे की कथित चोरी के विवाद के बीच चंपत राय का महासचिव पद से और अनिल मिश्रा का ट्रस्टी पद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया. साथ ही ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया.
गोविंद देव ने कहा- जिनपर किया भरोसा वही निकले विश्वासघाती
इस बैठक के बाद गोविंद देव गिरि ने संवाददाताओं से कहा, "ट्रस्ट के किसी सदस्य ने विश्वासघात नहीं किया, बल्कि चंपत राय के साथ विश्वासघात हुआ. हम उन्हें अत्यंत सज्जन व्यक्ति मानते हैं, लेकिन उन्होंने गलत लोगों पर भरोसा किया और वर्षों तक उन्हें अपने साथ रखा. उन्हीं लोगों ने ट्रस्ट के साथ विश्वासघात किया."
हालांकि, गिरि ने यह स्वीकार किया कि चढ़ावे के प्रबंधन की निगरानी में चंपत राय और अनिल मिश्रा की ओर से गंभीर लापरवाही हुई. उन्होंने कहा, "यह बिल्कुल सही है. इतनी लंबी अवधि तक उनकी लापरवाही और पर्याप्त निगरानी नहीं होना गंभीर मामला है. ऐसा नहीं होना चाहिए था."
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चंपत राय की छवि अब भी बेदाग
ट्रस्ट ने चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करते हुए राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या में मंदिर निर्माण में उनके योगदान की सर्वसम्मति से सराहना भी की. गिरि ने पूर्व महासचिव का बचाव करते हुए कहा कि उनकी नजर में चंपत राय की छवि अब भी ‘बेदाग’ है. उन्होंने कहा कि चंपत राय ने अपना पूरा जीवन राम मंदिर के उद्देश्य के लिए समर्पित किया और उनकी एकमात्र गलती यह थी कि उन्होंने गलत लोगों पर भरोसा किया.
पांच मूल्यवान वस्तुएं अब भी सुरक्षित
गिरि ने बताया कि चंपत राय ने स्वयं इस्तीफा दिया, क्योंकि उनका मानना था कि जांच पूरी होने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक उनका महासचिव पद पर बने रहना उचित नहीं होगा. उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट ने मीडिया के सामने मंदिर में चढ़ाई गई कई मूल्यवान वस्तुएं प्रदर्शित कीं, जिनके बारे में पहले चोरी होने के आरोप लगाए गए थे.
गिरि ने कहा, "2,800 वस्तुओं का एक रजिस्टर तैयार किया गया है. जिन पांच वस्तुओं की चर्चा हो रही थी, जिनमें रामचरितमानस की एक पांडुलिपि और भगवान को अर्पित एक सुंदर हार भी शामिल है, उन्हें मीडिया के सामने प्रदर्शित किया गया. आपने उन्हें देखा होगा. इन सभी वस्तुओं का रिकॉर्ड उपलब्ध है और अधिकृत व्यक्ति उनका निरीक्षण कर सकते हैं."
राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में होगा बदलाव
उन्होंने यह स्वीकार किया कि चढ़ावे की चोरी हुई है, लेकिन इसकी मात्रा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों का निर्धारण जांच एजेंसियां करेंगी. उन्होंने कहा, "यह सही है कि चोरी हुई है, लेकिन यह कितनी बड़ी थी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका पता जांच एजेंसियां लगाएंगी." गिरि ने कहा कि ट्रस्ट राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन की पूरी व्यवस्था में व्यापक बदलाव करेगा.
वीआईपी दर्शन के लिए क्या लिया गया धन?
मंदिर में कथित तौर पर वीआईपी दर्शन कराने के लिए धन लेने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसे आरोप सुने हैं, लेकिन किसी विशेष मामले की पुष्टि नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह सकता कि ऐसा कभी नहीं हुआ. मेरे सामने कोई विशिष्ट नाम नहीं आया है, लेकिन मैंने ऐसे आरोप सुने हैं और वो मुझे विश्वसनीय प्रतीत होते हैं."
चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच का उल्लेख करते हुए गिरि ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है. उन्होंने कहा, "जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे सजा मिलनी चाहिए."
कैसे शुरू हुआ था विवाद?
यह विवाद सात जून को उस समय शुरू हुआ था, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे के गबन का आरोप लगाया था. उस समय चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि 'आंतरिक लेखा परीक्षण के दौरान कोई उल्लेखनीय अनियमितता सामने नहीं आई.'
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त नकदी और मूल्यवान वस्तुओं की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया.




















