ड्रग टेस्ट पॉजिटिव होने पर गई पायलट की नौकरी, क्या उसे पीएफ आदि मिलेंगे या नहीं?
फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए एअर इंडिया के पायलट को नौकरी से निकाल दिया गया है. इतनी गंभीर परिस्थिति में नौकरी से निकाले जाने पर क्या उसे पीएफ आदि मिलेगा कि नहीं, चलिए समझें.

- दोबारा दोषी पर लाइसेंस रद्द, सैंपल इनकार पर निलंबित होगा।
फुकेट-दिल्ली उड़ान दुर्घटना की जांच रिपोर्ट के बाद एअर इंडिया ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने पायलट-इन-कमांड को बर्खास्त कर दिया है. जांच के दौरान पायलट का साइकोएक्टिव ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आया था. सुरक्षा और अनुशासन के उल्लंघन पर एयरलाइन की सख्त जीरो टॉलरेंस नीति है. इस घटना ने एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि नशे के आरोप में नौकरी गंवाने वाले इस पायलट को प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी और छुट्टियों के बदले मिलने वाले वित्तीय लाभ मिलेंगे या नहीं. आइए जानें कि इसके लिए विमान कंपनी के नियम क्या कहते हैं.
क्या था मामला और क्यों हुई बर्खास्तगी?
4 अगस्त 2026 को एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 ने फुकेट से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. एयरबस A320neo विमान में 137 यात्री, तीन बच्चे और आठ क्रू मेंबर्स सवार थे. जब प्लेन 36 हजार फीट की ऊंचाई पर था, तभी अचानक महज कुछ सेकंड के भीतर उसके तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम ठप हो गए. ऑटोपायलट बंद होते ही दो सेकंड की स्टॉल वॉर्निंग बजी. इसके तुरंत बाद विमान अचानक 372 फीट ऊपर चढ़कर 292 फीट नीचे गिरा. सीट बेल्ट साइन बंद होने के कारण 20 यात्री और चार केबिन क्रू घायल हो गए, जिनमें से चार को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. AAIB की शुरुआती जांच के बाद एअर इंडिया ने दोषी पायलट को तुरंत सेवा से हटा दिया.
बर्खास्तगी के बाद क्या पायलट को मिलेगा पीएफ का कानूनी अधिकार?
नौकरी से निकाले जाने के बावजूद पायलट का एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) पर पूरा कानूनी अधिकार कायम रहता है. नियम के अनुसार, कंपनी किसी भी स्थिति में कर्मचारी के पीएफ का पैसा रोक या जब्त नहीं कर सकती है. पीएफ का फंड कर्मचारी की अपनी गाढ़ी कमाई और कंपनी के अंशदान से तैयार होता है. यदि पायलट दो महीने तक किसी नई जगह नौकरी जॉइन नहीं करता है, तो वह पीएफ पोर्टल के माध्यम से अपना पूरा पैसा निकाल सकता है. नई कंपनी में जाने की स्थिति में वह इस राशि को आसानी से ट्रांसफर कराने का विकल्प भी चुन सकता है.
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ग्रेच्युटी पर गहरा सकता है संकट
प्रोविडेंट फंड के अलावा ग्रेच्युटी के भुगतान पर कंपनी सख्त रुख अपना सकती है. सामान्यतः 5 साल की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी मिलती है, लेकिन पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के प्रावधान कंपनी को अधिकार देते हैं. कानून के मुताबिक, यदि किसी कर्मचारी को गंभीर कदाचार या ऐसे ड्रग्स जैसे गैर-कानूनी काम के लिए निकाला जाता है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को खतरा या नुकसान हुआ हो, तो ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है. उड़ान के समय नशीले पदार्थों के सेवन को बेहद गंभीर लापरवाही माना जाता है, इसलिए एअर इंडिया कानूनी तौर पर पायलट की ग्रेच्युटी पूरी तरह से जब्त कर सकती है.
छुट्टियों के पैसे पर कंपनी की नीति क्या?
लीव एनकैशमेंट यानी बची हुई छुट्टियों का पैसा देने का मामला पूरी तरह से एयरलाइन के आंतरिक नियमों और नीतियों पर टिका होता है. भारतीय कॉर्पोरेट और एविएशन सेक्टर में ज्यादातर कंपनियां गंभीर अनुशासनहीनता के कारण बर्खास्त किए गए कर्मियों को लीव एनकैशमेंट का लाभ नहीं देती हैं. अगर एअर इंडिया की सेवा नियमावली में इसका कड़ा प्रावधान है, तो पायलट को अपनी बची हुई छुट्टियों के एवज में कोई भी वित्तीय भुगतान नहीं किया जाएगा.
ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने पर पायलटों के लिए प्रोटोकॉल क्या?
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के सुरक्षा नियमों के तहत, जब भी कोई क्रू मेंबर प्राथमिक स्क्रीनिंग टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, उसे तुरंत सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों से हटा दिया जाता है. हालांकि, सिर्फ शुरुआती टेस्ट के आधार पर अंतिम फैसला नहीं होता है. इसके बाद मेडिकल रिव्यू ऑफिसर पूरे मामले और रिपोर्ट की निष्पक्ष समीक्षा करता है. जब MRO अधिकृत लैब की कन्फर्मेटरी जांच में प्रतिबंधित ड्रग्स के सेवन की पुष्टि कर देता है, तभी संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कठोर प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाती है.
पहली बार दोषी मिलने पर सुधार का मौका
नियमों के मुताबिक, यदि कोई पायलट पहली बार ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसे सीधे नौकरी से हटाने के बजाय नशामुक्ति केंद्र यानी रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम में भेजा जाता है. इलाज का दौर पूरा होने के बाद उसका दोबारा ड्रग टेस्ट कराया जाता है. इसके बाद मनोचिकित्सक से मानसिक सेहत की क्लीयरेंस रिपोर्ट ली जाती है और एयरलाइन के चीफ मेडिकल ऑफिसर द्वारा फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जाता है. इन सभी पैमानों पर पूरी तरह खरा उतरने के बाद ही उस पायलट को दोबारा विमान उड़ाने की अनुमति दी जाती है.

कब रद्द होता है पायलटों का लाइसेंस?
यदि कोई पायलट रिहैबिलिटेशन के बाद दूसरी बार भी कन्फर्मेटरी टेस्ट में पॉजिटिव आता है, तो उसका फ्लाइंग लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है. वहीं, अगर कोई पायलट जांच के लिए सैंपल देने से ही साफ इनकार करता है, तो उसे तुरंत ग्राउंडेड कर दिया जाता है. ऐसे मामलों में एक हफ्ते के अंदर विस्तृत ड्रग प्रोफाइल टेस्ट क्लियर करना अनिवार्य होता है. यदि वह तय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करने में विफल रहता है, तो उसका पायलट लाइसेंस तीन साल की अवधि के लिए निलंबित कर दिया जाता है.
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