दुनिया में कौन तय करता है Crude Oil के दाम, इसमें ईरान का कितना रोल?
Crude Oil: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर तेल की कीमतों को कौन तय करता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब और साथ ही ईरान की क्या भूमिका है.

- ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य नियंत्रण वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित करता है।
Crude Oil: इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें किसी एक देश या फिर संगठन की कंट्रोल में नहीं होती. इसके बजाय यह ग्लोबल सप्लाई और डिमांड, OPEC और OPEC+ के प्रोडक्शन से जुड़े फैसलों, बड़े कमोडिटी एक्सचेंज पर ट्रेडिंग और जियोपॉलिटिकल हालात से प्रभावित होती हैं. ईरान भी इस सिस्टम में बड़ी भूमिका निभाता है क्योंकि वह तेल का प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट करता है और होर्मुज स्ट्रेट के पास उसकी रणनीतिक स्थिति है.
ग्लोबल सप्लाई और डिमांड
कच्चे तेल की कीमतों पर असर डालने वाला सबसे बुनियादी फैक्टर सप्लाई और डिमांड के बीच का संतुलन है. जब तेल का प्रोडक्शन बढ़ता है और ग्लोबल खपत कम रहती है तो जरूरत से ज्यादा सप्लाई कीमतों को नीचे गिर सकती है. इसके उलट जब डिमांड बढ़ती है या फिर प्रोडक्शन में रुकावट आती है तो कीमत आमतौर पर ऊपर जाती हैं. इस वजह से इंडस्ट्रियल एक्टिविटी, ट्रांसपोर्टेशन की डिमांड, आर्थिक विकास और अचानक प्रोडक्शन रुकने जैसी बातें इंटरनेशनल तेल की कीमतों पर सीधा असर डाल सकती हैं.
OPEC और OPEC+ सप्लाई पर असर डालते हैं
आर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज अपने पार्टनर OPEC+ के साथ मिलकर ग्लोबल मार्केट में आने वाले कच्चे तेल की मात्रा पर काफी असर डालता है. सऊदी अरब इस ग्रुप में सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है जबकि रूस इसके बड़े पार्टनर में से एक है.
जब तेल की कीमतें तेजी से गिरती हैं तो प्रोड्यूसर सप्लाई को कम करने के लिए प्रोडक्शन घटाने पर सहमत हो सकते हैं. इसी तरह प्रोडक्शन बढ़ाने से मार्केट में और ज्यादा कच्चा तेल आ सकता है. इस वजह से यह फैसले दुनिया भर के ट्रेडर्स और कंज्यूमर्स के बीच कीमतों को लेकर उम्मीद पर असर डाल सकते हैं.

ब्रेंट और WTI जरूरी बेंचमार्क तय करते हैं
कच्चे तेल की ट्रेडिंग दुनिया भर में कमोडिटी मार्केट के जरिए होती है. जहां बेंचमार्क कीमतें तेल के अलग-अलग ग्रेड की वैल्यू तय करने में मदद करती है. ब्रेंट क्रोध मुख्य इंटरनेशनल बेंच मार्क है और यूरोप और एशिया सहित कई मार्केट में तेल की कीमत तय करने के लिए इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यूएस मार्केट के लिए जरूरी बेंचमार्क है. इन मार्केट में कीमतें तेजी से बदल सकती हैं क्योंकि ट्रेडर्स सप्लाई, डिमांड, इन्वेंटरी और जियोपॉलिटिकल रिस्क में होने वाले बदलावों पर प्रतिक्रिया देते हैं.

युद्ध और जियोपॉलिटिकल तनाव कीमत को बढ़ा सकते हैं
कच्चे तेल की कीमत तय करने में जियोपॉलिटिकल हालात एक और बड़ा फैक्टर हैं. अगर इन्वेस्टर्स को डर है कि किसी टकराव से तेल के प्रोडक्शन या फिर ट्रांसपोर्टेशन में रुकावट आ सकती है तो वह कमी की आशंका कर सकते हैं और कीमतें बढ़ सकती हैं. सप्लाई में असल रुकावट आने से पहले ही इसकी संभावना तेल की कीमतों में जियोॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम पैदा कर सकती है.
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ईरान क्या भूमिका निभाता है?
ईरान तेल का प्रोडक्शन करने वाला एक जरूरी देश है और OPEC का संस्थापक सदस्य भी है. यूएस कि कड़ी पाबंदियों के बावजूद भी है बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट करता रहता है. हालांकि इसका मतलब सिर्फ उत्पादन के आंकड़ों से काफी ज्यादा है.
ईरान होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करता है. यह रास्ता दुनिया के सबसे जरूरी तेल शिपिंग रास्तों में से एक है. यही वजह है कि ईरान से जुड़ा कोई भी गंभीर सैन्य टकराव, जिससे इस स्ट्रेट से होने वाली शिपिंग को खतरा हो, तुरंत ग्लोबल सप्लाई को लेकर चिंता पैदा कर सकता है.
आपको बता दें कि प्रतिबंधों के बावजूद ईरान प्रतिदिन लगभग 1.5 मिलियन कच्चे तेल का निर्यात करता है. इसका सबसे बड़ा खरीदार चीन है. चीन ईरान के कुल तेल निर्यात का 90% से ज्यादा हिस्सा अकेले खरीदता है.
ईरानी तेल क्षेत्र, निर्यात टर्मिनलों, रिफाइनरियों या फिर दूसरे ऊर्जा बुनियादी ढांचे के खिलाफ कोई भी सैन्य खतरा बाजार में अनिश्चितता को पैदा कर सकता है. व्यापारी ऐसी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखते हैं क्योंकि ईरानी उत्पादन को लंबे समय तक नुकसान पहुंचने से ग्लोबल सप्लाई से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल कम हो सकता है.
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