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दो साल में 9.68 लाख सड़क हादसों के साथ टॉप पर भारत, चीन-अमेरिका भी पीछे छूटे

भारत में सड़क हादसों में मौतें सिर्फ गलती से नहीं, सिस्टम की चूक से भी हो रही हैं. जान बचानी है तो सड़क, सुरक्षा और व्यवस्था- तीनों को साथ सुधारना होगा. आइए जानें भारत में सड़क हादसों की वजह क्या है.

देश में सड़क हादसों को अक्सर तेज रफ्तार, लापरवाही और नियम तोड़ने से जोड़ा जाता है, लेकिन एक नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाली सच्चाई सामने रखी है. ज्यादातर मौतें ऐसे हादसों में हो रही हैं, जिनमें ट्रैफिक नियमों का कोई बड़ा उल्लंघन नहीं होता है, ऐसे में सवाल उठता है कि अगर गलती ड्राइवर की नहीं, तो फिर जानें क्यों जा रही हैं? इस रिपोर्ट में भारत की सड़कों की वह हकीकत सामने आई है, जो अब तक नजरअंदाज होती रही है और यही रोड एक्सीडेंट की वजह है. 

सड़क हादसों की असली वजह क्या है?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और सेव लाइफ फाउंडेशन की संयुक्त रिपोर्ट ने भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क हादसों में मरने वाले 59 फीसदी लोगों की मौत किसी भी ट्रैफिक उल्लंघन की वजह से नहीं हुई है. इसका साफ मतलब है कि खराब सड़क डिजाइन, कमजोर इंजीनियरिंग और घटिया निर्माण भी जानलेवा साबित हो रहे हैं.

शाम से रात का सबसे खतरनाक वक्त

रिपोर्ट बताती है कि कुल सड़क हादसा मौतों में से 53 फीसदी घटनाएं शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच हुईं. इस समय कम रोशनी, थकान और तेज रफ्तार हादसों का खतरा कई गुना बढ़ा देती है. खास बात यह है कि इन हादसों में बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो नियमों का पालन कर रहे थे.

देश के 100 सबसे खतरनाक जिले

यह अध्ययन देश के उन 100 जिलों पर केंद्रित है, जहां सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं. इस सूची में महाराष्ट्र का नासिक ग्रामीण जिला पहले स्थान पर है. इसके बाद पुणे ग्रामीण, पटना और महाराष्ट्र का ही अहमदनगर जिला आता है. रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ इन 100 जिलों में 2023 और 2024 के दौरान 89,085 लोगों की मौत हुई, जो देश में हुई कुल सड़क दुर्घटना मौतों का 25 फीसदी से ज्यादा है.

भारत दुनिया में रोड एक्सीडेंट में सबसे आगे

भारत सड़क हादसों में होने वाली मौतों के मामले में दुनिया में पहले नंबर पर है. आंकड़ों के मुताबिक, चीन में भारत की तुलना में सिर्फ 36 फीसदी और अमेरिका में करीब 25 फीसदी सड़क मौतें होती हैं. दो साल में देशभर में करीब 9.68 लाख सड़क हादसों में 35 लाख लोगों की जानें चली गईं. यह स्थिति भारत के लिए बेहद गंभीर चेतावनी है.

किन राज्यों में हालात ज्यादा खराब

रिपोर्ट में बताया गया कि सबसे ज्यादा खतरनाक जिलों की संख्या उत्तर प्रदेश में है, जहां 20 जिले इस सूची में शामिल हैं. इसके बाद तमिलनाडु के 19, महाराष्ट्र के 11, कर्नाटक के 9 और राजस्थान के 8 जिले हैं. यह दिखाता है कि समस्या सिर्फ किसी एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की है.

सड़कें बहुत, सुरक्षा कम

भारत का सड़क नेटवर्क दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है, जिसकी लंबाई करीब 63.45 लाख किलोमीटर है. इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और अन्य सड़कें शामिल हैं. हैरानी की बात यह है कि कुल सड़क हादसा मौतों में से लगभग 63 फीसदी राष्ट्रीय राजमार्गों के बाहर होती हैं. यानी जान-पहचान की सड़कें और संपर्क मार्ग ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं.

हादसों के तय ठिकाने

रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर दुर्घटनाएं कुछ तय जगहों पर बार-बार होती हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य लोक निर्माण विभाग की 18 अहम सड़कों पर ही 54 फीसदी मौतें दर्ज की गईं. इन मार्गों पर 379 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें बेहद खतरनाक माना गया है.

टक्कर के तरीके और जानलेवा कारण

कुल मौतों में 72 फीसदी मामले पीछे से टक्कर, आमने-सामने की भिड़ंत और पैदल यात्रियों के कुचले जाने से जुड़े हैं. नियम उल्लंघन की बात करें तो तेज रफ्तार से 19 फीसदी, लापरवाह ड्राइविंग से 7 फीसदी और खतरनाक ओवरटेक से 3 फीसदी मौतें हुईं हैं. 

खराब इंजीनियरिंग बनी बड़ी वजह

रिपोर्ट में सड़क इंजीनियरिंग से जुड़ी 20 आम खामियों की पहचान की गई है. इनमें टूटी या कमजोर क्रैश बैरियर, मिटे हुए रोड मार्किंग, बिना सुरक्षा के खड़े कंक्रीट ढांचे, गलत या टूटे साइन बोर्ड और पर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग का न होना शामिल है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी कई बार खराब सिविल इंजीनियरिंग और कमजोर डीपीआर को हादसों की बड़ी वजह बता चुके हैं.

समाधान क्या है?

रिपोर्ट कहती है कि नई योजनाओं की जरूरत नहीं है. जरूरी है कि मौजूदा सरकारी योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाए. सड़क एजेंसियों, पुलिस और अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल हो. खतरनाक सड़कों पर सुरक्षा ऑडिट, पुलिस स्टेशनों को मजबूत करना और एंबुलेंस सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना अहम कदम हो सकते हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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