NEET UG 2026 Exam Cancelled: 11 साल बाद दोहराया इतिहास! AIPMT पेपर लीक कांड से नहीं लिया सबक, NTA ने पहली बार परीक्षा रद्द क्यों की?
NEET UG 2026 Exam Cancelled: NEET-UG 2026 का रद्द होना सिर्फ परीक्षा का रद्द होना नहीं है, बल्कि यह भारत की परीक्षा प्रणाली की कमजोरियां फिर से उजागर करता है. 2015 के लीक के बाद सबक क्यों नहीं लिया?

NEET-UG 2026 को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने अचानक रद्द कर दिया. यह परीक्षा 3 मई को देशभर के 22.05 लाख अभ्यर्थियों के लिए एक ही पाली में आयोजित की गई थी. 12 मई (मंगलवार) परीक्षा रद्द होने के पीछे राजस्थान में सामने आया एक बड़ा पेपर लीक मामला है, जिसकी जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है. यह पहला मौका है जब NTA ने NEET-UG को पूरी तरह से रद्द किया है. इससे पहले 2024 में भी पेपर लीक के आरोप लगे थे, लेकिन तब सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था.
इस बार...
- 7 मई 2026: NTA को पहली बार सूचना मिली कि NEET-UG 2026 में गड़बड़ हुई है. यह सूचना एक PDF फाइल के बारे में थी जो व्हाट्सएप पर घूम रही थी और जिसमें परीक्षा के प्रश्नों से मिलते-जुलते प्रश्न थे. NTA ने 8 मई को इस मामले को जांच एजेंसियों को भेज दिया.
- 10-11 मई: NTA ने एक बयान जारी कर कहा कि मामला जांच के हो रही है और 'बहुत बड़ी संख्या में ईमानदार अभ्यर्थियों के प्रयास और अखंडता पर कोई सवाल नहीं है और इसे कम नहीं आंका जाएगा.' इस बीच, राजस्थान पुलिस के विशेष कार्य बल (SOG) ने खुलासा किया कि उन्हें एक 'गेस पेपर' (अनुमानित प्रश्न पत्र) मिला है जिसमें 410 प्रश्न थे, जिनमें से 120 प्रश्न असली परीक्षा में पाए गए.
- 12 मई: NTA ने परीक्षा रद्द करने की घोषणा की. NTA ने यह भी साफ कहा कि दोबारा परीक्षा के लिए किसी नए रजिस्ट्रेशन या फीस की जरूरत नहीं होगी. साथ ही, केंद्र सरकार ने इस मामले की CBI जांच के आदेश दे दिए.
'गेस पेपर' का खेल क्या है?
इस पूरे मामले की जड़ एक 'गेस पेपर' है, जो एक PDF फाइल थी. यह फाइल व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों पर 'Forwarded Many Times' (कई बार आगे बढ़ाई गई) टैग के साथ घूम रही थी.
- कितने प्रश्न मिले: इस PDF में 410 प्रश्न थे, जिनमें से 120 से 135 प्रश्न NEET-UG की वास्तविक परीक्षा में बिल्कुल हू-ब-हू पाए गए. इनमें 45 कैमिस्ट्री और 90 बायोलॉजी के प्रश्न शामिल थे, जो अपने उत्तरों के साथ मिलान करते थे.
- लीक का नेटवर्क: जांच में पता चला कि यह 'गेस पेपर' राजस्थान के सीकर और झुंझुनू जिलों में कोचिंग हब के जरिए फैला. यह PDF पहले नासिक के एक मेडिकल छात्र तक पहुंची और फिर व्हाट्सएप से राजस्थान के छात्रों तक पहुंचाई गई. यह लीक राजस्थान के चूरू जिले के एक MBBS छात्र से शुरू हुआ, जो केरल में पढ़ता है और उसने यह फाइल सीकर के अपने दोस्तों को भेजी.
- कीमत: यह गेस पेपर 30,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक में बेचा गया.
- गिरफ्तारियां: राजस्थान SOG ने अब तक 15 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें जयपुर का एक व्यक्ति मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. नासिक के एक आयुर्वेदिक मेडिकल स्टूडेंट शुभम खैरनार को भी हिरासत में लिया गया है, जिसके पास से इस 'गेस पेपर' की कॉपी मिली है.
NTA ने पेपर ही क्यों रद्द कर दिया?
NTA के डायरेक्टर अभिषेक सिंह ने कहा कि एजेंसी ने 'जीरो टॉलरेंस' का रुख अपनाया है. उन्होंने कहा, 'हमें उनकी चाल को नाकाम करना होगा, भले ही यह एक मुश्किल फैसला हो. यह NTA, छात्रों या माता-पिता के लिए आसान नहीं है.' NTA ने पाया कि परीक्षा प्रक्रिया 'दूषित' हो गई थी और इसे जारी रखना ईमानदार छात्रों के साथ अन्याय होता.
पहले के पेपर लीक मामलों में क्या हुआ?
NEET-UG के इतिहास में पेपर लीक के आरोप पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन हर बार परिणाम अलग रहे:
- NEET-UG 2024: यह मामला झारखंड के हजारीबाग और बिहार के पटना से जुड़ा था. CBI जांच में पता चला कि परीक्षा से कुछ घंटे पहले प्रश्न पत्र चुरा लिया गया था और उसे पटना के एक हॉस्टल में बेच दिया गया था. हालांकि, बड़े पैमाने पर विरोध के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया कि 'रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रश्न पत्र के सिस्टम का लीकेज का सबूत नहीं देती है.' उस समय सिर्फ 1,563 छात्रों के लिए 'ग्रेस मार्क्स' को लेकर दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी.
- UGC-NET 2024: यह परीक्षा एक दिन बाद ही रद्द कर दी गई थी, क्योंकि आशंका थी कि इसका पेपर डार्कनेट पर लीक हो गया था. CSIR-UGC NET और NEET-PG को भी स्थगित कर दिया गया था.
मेडिकल इंट्रेंस एग्जाम का रद्द होना: 2015 का वह ऐतिहासिक फैसला
NEET-UG से पहले 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय प्री-मेडिकल/प्री-डेंटल टेस्ट (AIPMT) को रद्द कर दिया था, जिसे तब CBSE आयोजित करता था. यह मामला भी इस बार की तरह ही था. तब हरियाणा के रोहतक में पुलिस ने चार संदिग्धों को माइक्रो सिम और ब्लूटूथ डिवाइस लगी जैकेट पहने हुए पकड़ा था, जो परीक्षा के दौरान आंसर की तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे. कोर्ट ने इसे 'परीक्षा की पवित्रता और विश्वसनीयता बनाए रखने' के लिए रद्द किया था और चार हफ्तों के अंदर दोबारा परीक्षा का आदेश दिया था.
2016 में AIPMT की जगह NEET-UG ने ले ली और 2019 से इसका आयोजन NTA कर रही है.
तो क्या 2015 से कोई सबक सीखा गया?
2024 के विवाद के बाद सरकार ने पूर्व ISRO चीफ डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक सात सदस्यीय समिति बनाई थी. इस समिति ने 101 सिफारिशें की थीं. इन सिफारिशों में प्रमुख थे:
- परीक्षा केंद्रों को जिला प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में सील करना
- NTA का राज्य और जिला प्रशासन के साथ सहयोग करना
- परीक्षा को कंप्यूटर आधारित और कई पालियों में कराना, ताकि लीक का खतरा कम हो
NTA ने दावा किया था कि 2026 की परीक्षा के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू किए गए थे, जैसे:
- परीक्षा केंद्रों पर बायोमीट्रिक वैरिफिकेशन
- 5G जैमर की तैनाती
- प्रश्न पत्रों को GPS से लैस गाड़ियों ले जाना
- AI-सहायता प्राप्त CCTV निगरानी
हालांकि, समिति की कई अहम सिफारिशें अभी भी लागू नहीं हो पाई हैं. उदाहरण के लिए, NEET-UG अभी भी पेन-पेपर मोड में होती है, कंप्यूटर बेस्ड नहीं. NTA ने मजबूरियां गिनाते हुए कहा कि कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा पर कोई भी फैसला स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को लेना है.
अब आगे छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
- दोबारा परीक्षा: NTA जल्द ही नई तारीखों का ऐलान करेगा. छात्रों के पुराने एडमिट कार्ड और रजिस्ट्रेशन डिटेल्स मान्य रहेंगे.
- शुल्क वापसी: जिन छात्रों ने एग्जाम फीस जमा की थी, उन्हें यह राशि वापस कर दी जाएगी. दोबारा परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा.
- CBI जांच: केंद्रीय जांच एजेंसी अब इस पूरे मामले की तह तक जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिफारिशें करेगी.
एक तरफ लाखों छात्र सालों की मेहनत करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ गिरोह पैसे के दम पर इसकी साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं. सवाल यह है कि क्या इस बार के झटके के बाद प्रशासनिक सुधारों की रफ्तार तेज होगी या यह सिर्फ एक और घटना बनकर रह जाएगी?
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Source: IOCL



























