India-Russia Relations: 'सभी घुटने नहीं टेकते, भारत ने हमेशा...', तेल को लेकर रूस की अमेरिका को खरी-खरी
India-Russia Relations: रूस के विदेश मंत्री लावरोव ने भारत पर तेल खरीदने को लेकर दबाव बनाने को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की आलोचना की है.

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर दबाव बनाने के लिए अमेरिका और पश्चिमी देशों की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश दूसरे देशों पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश कर रहे हैं और यह तरीका नव-औपनिवेशिक सोच जैसा है.
RT इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में लावरोव ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का मकसद दुनिया के ऊर्जा बाजार को अपने नियंत्रण में रखना है. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहा संकट भी इसी सोच को दिखाता है. लावरोव ने यह बयान BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले दिया. इंटरव्यू के दौरान लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश लगातार दूसरे देशों पर दबाव डालते हैं कि वे रूस से तेल न खरीदें. उन्होंने कहा कि यह एक “अनुचित खेल” है. लावरोव के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि देश सस्ता रूसी तेल खरीदने के बजाय अमेरिका से महंगी LNG खरीदें.
ये भी पढ़ें: पेट्रोल-डीजल संकट के बीच PM मोदी का बड़ा फैसला, आधा कर दिया अपना काफिला, SPG को आदेश
लावरोव ने भारत के बारे में क्या कहा?
लावरोव ने कहा कि यह तरीका औपनिवेशिक और नव-औपनिवेशिक सोच को दिखाता है, जहां ताकतवर देश अपने फायदे के लिए बाकी देशों पर दबाव डालते हैं. लावरोव ने कहा कि दुनिया के सभी देश ऐसे दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं. रूसी विदेश मंत्री ने भारत के रुख की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा साफ किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हित और बाजार की जरूरतों के हिसाब से ऊर्जा खरीदता है. भारतीय अधिकारियों ने कई बार कहा है कि भारत यह फैसला खुद करेगा कि तेल किस देश से खरीदना है और किस कीमत पर खरीदना है.
भारत कहां से तेल इम्पोर्ट करता है?
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जो सबसे ज्यादा कच्चा तेल आयात करते हैं. देश अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल विदेशों से मंगाता है. साल 2022 के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद काफी बढ़ा दी थी, क्योंकि रूस रियायती कीमतों पर तेल दे रहा था. रूस से तेल खरीद बढ़ने के बाद भारत को अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव का सामना भी करना पड़ा. पिछले साल अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था. हालांकि भारत ने अपने ऊर्जा हितों को ध्यान में रखते हुए रूसी तेल खरीद जारी रखी.
रूस की बड़ी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध
अमेरिका ने रूस की बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अक्टूबर 2025 को प्रतिबंध लगाए थे. इसके बाद कुछ समय के लिए भारत के रूसी तेल आयात में कमी आई थी, लेकिन ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ी उथल-पुथल मच गई. ऊर्जा संकट को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने कुछ प्रतिबंधों में छूट दी थी. यह छूट अब 16 मई तक बढ़ा दी गई है. माना जा रहा है कि इससे भारत समेत कई देशों को रूसी तेल खरीदने में राहत मिल सकती है.

























