Trump China Visit: ट्रंप के बीजिंग दौरे से पहले क्यों भड़क गया चीन? दे डाली चेतावनी, जारी की रेड लाइन
डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार चीन की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं. अमेरिका के ताइवान को सीधे हथियार बेचने के मामले को लेकर बीजिंग भड़क गया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज शाम चीन पहुंचने वाले हैं. ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार चीन की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं. इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप साल 2017 में चीन गए थे. इस बार उनकी 2 दिवसीय बैठक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होगी, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. इसी बीच अमेरिका में चीनी दूतावास ने ट्रंप के दौरे से ठीक पहले ताइवान को लेकर रेड लाइन जारी कर दी है. चीनी दूतावास ने साफ कहा है कि ताइवान पर चर्चा नहीं होगी, जबकि दौरे से ठीक पहले ट्रंप ने ताइवान को सीधे हथियार बेचने को लेकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चर्चा की बात कही थी.
शी जिनपिंग से मुलाकात को लेकर क्या बोले ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी चीन यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक में सबसे मुख्य मुद्दा व्यापार होगा. यह बयान उन्होंने व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया. बैठक के एजेंडे के बारे में जानकारी देते हुए ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी. साथ ही ये भी कहा कि उनके और शी जिनपिंग के बीच अच्छे संबंध हैं और यह संबंध आगे भी अच्छे बने रहने की उम्मीद है.
ईरान जंग को लेकर क्या बोले ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष में जीत हासिल करेगा, चाहे वह बातचीत के जरिए हो या सैन्य कार्रवाई के जरिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले के समाधान के लिए उन्हें चीन की मदद की जरूरत नहीं है. हालांकि ट्रंप जल्द ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं, लेकिन उन्होंने साफ किया कि ईरान मुद्दे पर अमेरिका स्थिति को खुद संभाल सकता है. ट्रंप का कहना है कि उनका मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है.
सुपरपावर बनने की रेस में शामिल चीन के अमेरिका संग रिश्ते पिछले कई सालों से तनावपूर्ण बने हुए हैं. ट्रंप और शी जिनपिंग की ये दूसरी आमने-सामने की मुलाकात होगी. इससे पहले अक्टूबर 2025 में दोनों नेताओं की मुलाकात दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में हुई थी.
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