India@2047: भारती की पॉलिसी मेकिंग में कमी, अभी भी है मुफ्त चीजें बांटने का कल्चर- सुरजीत भल्ला
India at 2047 Conclave: सुरजीत भल्ला ने आर्थिक संकट: सरकार को क्या करना चाहिए?' पर बात करते हुए पश्चिम एशिया में संघर्ष का भी जिक्र किया. उन्होंने भारत के लिए 8 से 8.5% ग्रोथ रेट की भी बात कही.

- पश्चिम एशिया संघर्ष से हर देश संकट में है.
- भारत को 8-8.5% की विकास दर की आवश्यकता है.
- राजनीतिक स्थिरता के बावजूद आर्थिक सुधार धीमे हैं.
- ग्राउंड लेवल पर लगातार रिफॉर्म्स विकसित भारत के लिए जरूरी.
ABP India at 2047 Conclave: एबीपी नेटवर्क के India@2047 कॉन्क्लेव में प्रख्यात इकोनॉमिस्ट सुरजीत सिंह भल्ला ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने 'आर्थिक संकट: सरकार को क्या करना चाहिए?' (Economic Crisis: What Should the Government Do?) विषय पर अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से हर देश में क्राइसिस हुआ है. इस युद्ध की वजह से कई चीजें प्रभावित हुई हैं.ये क्राइसिस भारत के लिए कोई अलग नहीं है. ये हर जगह है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमें 8 से 8.5 फीसदी की ग्रोथ रेट की जरूरत है. भारत में कभी ऐसा पॉलिटिकल डोमिनेशन नहीं रहा है. हमें इकोनॉमी की ग्रोथ के लिए स्ट्रक्चरल बदलाव की जरूरत है.
आर्थिक सुधारों की धीमी गति चिंताजनक
कार्यक्रम में उन्होंने हाल के एक विश्लेषण को साझा करते हुए कहा कि भाजपा की लगातार चुनावी जीतों और राजनीतिक स्थिरता ने सरकार को एक कम्फर्ट जोन में ला दिया है. उन्होंने इस बात के लिए आगाह भी किया कि राजनीतिक प्रभुत्व की वजह से सरकार के भीतर कड़े आर्थिक सुधारों को लागू करने की इच्छाशक्ति थोड़ी कम हुई है, जिसे दूर करना 'विकसित भारत' की राह के लिए बहुत जरूरी है.
केवल राजनीतिक स्थिरता ही काफी नहीं
उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि देश में निजी निवेश में आ रही गिरावट और विदेशी पूंजी प्रवाह के रूप में दिख रहे चेतावनी भरे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उनके मुताबिक, राजनीति रूप से मजबूत होना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन सिर्फ इसी के दम पर भारत 2047 तक विकसित भारत नहीं बन सकता. इसके लिए ग्राउंड लेवल पर लगातार रिफॉर्म्स होते रहने की जरूरत है. उन्होंने आर्थिक उतार-चढ़ाव से निपटने और सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए सरकार को आक्रामक और समावेशी नीतियां अपनाने की सलाह दी.
भारत के आर्थिक विजन को लेकर वह पहले भी सुझाव दे चुके हैं कि देश को कमोडिटी मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए अपने सॉवरेन फंड्स का सही इस्तेमाल करना चाहिए ताकि वैश्विक स्तर पर भारतीय निवेश मजबूत हो.
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