दुनिया के किन देशों में भारत से आधी कीमत पर मिलती हैं कारें, आखिर क्या है इसकी वजह?
रिपोर्ट के अनुसार, कार खरीदने और चलाने के मामले में अमेरिका दुनिया का सबसे किफायती देश है. यहां कार रखने का कुल खर्च औसत सालाना आय का लगभग 56.4 प्रतिशत है.

दुनिया के अलग-अलग देश में कारों की कीमत और उन्हें रखने का खर्च बहुत अलग होता है. कई देशों में कार खरीदना आम लोगों के लिए आसान है, जबकि कुछ देशों में यह खर्च लोगों की आय के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है. एक इंटरनेशनल रिसर्च में यही अंतर साफ तौर पर सामने आया है. दरअसल, यूके की कंपनी स्क्रैप कार कंपैरिजन की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के कई विकसित देशों में कार खरीदना और चलाना आमदनी के मुकाबले बहुत सस्ता है. वहीं कई विकासशील देशों में लोगों को उसके लिए अपनी सालाना आय का बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ता है. इस रिपोर्ट में 98 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि दुनिया के किन देशों में भारत से आधी कीमत पर कारें मिलती है और इसकी क्या वजह है.
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अमेरिका में सबसे सस्ती पड़ती है कार
रिपोर्ट के अनुसार, कार खरीदने और चलाने के मामले में अमेरिका दुनिया का सबसे किफायती देश है. यहां कार रखने का कुल खर्च औसत सालाना आय का लगभग 56.4 प्रतिशत है. इसके बाद दूसरे स्थान पर ऑस्ट्रेलिया है, जहां कार रखने का खर्च औसत आय का करीब 61.8 प्रतिशत है, वहीं कनाडा तीसरे स्थान पर है. टॉप 10 देश में नीदरलैंड, नॉर्वे, जर्मनी, स्वीडन, फिनलैंड, आयरलैंड और यूनाइटेड किंगडम भी शामिल है. इन देशों में लोगों की आय ज्यादा होने और फाइनेंसिंग ऑप्शन अच्छे होने के कारण कार खरीदना आसान माना जाता है. इन देशों में भारत के मुकाबले कार काफी सस्ते दामों पर मिलती है.
भारत में आय के मुकाबले महंगी कार
विकसित देशों के उलट कई देशों में कार खरीदना बहुत महंगा साबित होता है. रिपोर्ट के अनुसार फिलीपींस में कार रखने का खर्च औसत सालाना आय का लगभग 470 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. इसके बाद कोलंबिया, ब्राजील, तुर्की और इक्वाडोर जैसे देश भी इस लिस्ट में शामिल है. इस लिस्ट में इंडिया भी टॉप 10 महंगे देशों में शामिल है, जहां कार खरीदने और चलाने का खर्च औसत सालाना आय का करीब 289 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. यानी कई मामलों में कार खरीदने के लिए लोगों को अपनी आय के मुकाबले काफी ज्यादा खर्च करना पड़ता है. वहीं भारत में कार महंगी होने की एक बड़ी वजह इस पर लगने वाला टैक्स भी माना जाता है. दरअसल वैश्विक बाजार में ऑटोमोबाइल पर औसत 22 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है, यानी अगर किसी कार की मूल कीमत 20 हजार डॉलर है तो टैक्स लगने के बाद वहीं करर लगभग 24 हजार डॉलर से ज्यादा में बिक सकती है.
भारत में तेजी से बढ़ रहा कार बाजार
कारों की कीमतों के मामले में भारत अभी भी कई देशों से पीछे हैं, लेकिन बिक्री के लिहाज से देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. पिछले कुछ वर्षों में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पैसेंजर व्हीकल बाजार बन चुका है और हर साल कारों की बिक्री में लगातार बढ़ोतरी भी हो रही है.
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