कब नहीं लेनी चाहिए सेकंड हैंड कार, जान लें काम की बात
पुरानी कार खरीदते समय कुछ गलतियां आपको भारी पड़ सकती हैं. जानिए किन कारों को खरीदने से बचना चाहिए, ताकि बाद में मरम्मत और दूसरी परेशानियों पर ज्यादा पैसे खर्च न करने पड़ें.

आजकल बहुत से लोग नई कार की जगह सेकंड हैंड कार खरीदना पसंद करते हैं. कम कीमत में कार मिलने के कारण यह अच्छा विकल्प लगता है. लेकिन पुरानी कार खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी है. कई बार कार बाहर से अच्छी दिखती है, लेकिन उसके इंजन, गियरबॉक्स या दूसरे जरूरी पार्ट्स में खराबी होती है. ऐसे में कार खरीदने के बाद मरम्मत पर काफी पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. इसलिए कार पसंद करने के साथ उसकी पूरी जांच करना भी जरूरी है.
पानी में डूबी और बड़े एक्सीडेंट वाली कार
अगर कोई कार बाढ़ या भारी बारिश के पानी में डूब चुकी है, तो उसे खरीदने से बचना चाहिए. पानी कार के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, तारों और सेंसर को नुकसान पहुंचाता है. कई बार कार खरीदने के कुछ समय बाद ये पार्ट्स काम करना बंद कर देते हैं. इसके अलावा, कार की सीटों और अंदरूनी हिस्सों में सीलन और बदबू भी रहती है.
इसी तरह, ऐसी कार भी नहीं खरीदनी चाहिए जिसका बड़ा एक्सीडेंट हुआ हो और उसके ढांचे को नुकसान पहुंचा हो. अगर कार के चेसिस या फ्रेम में खराबी है, तो उसकी मजबूती पर असर पड़ता है. बाहर से कार ठीक दिखने के बावजूद अंदर से वह कमजोर होती है. इसलिए खरीदने से पहले किसी भरोसेमंद मैकेनिक से कार की जांच जरूर कराएं.
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बिना कागजात और सर्विस रिकॉर्ड वाली कार से बचें
सेकंड हैंड कार खरीदते समय उसके सभी जरूरी कागजात देखना बहुत जरूरी है. अगर कार बेचने वाला आरसी , वैध इंश्योरेंस और दूसरे जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा रहा है, तो जल्दबाजी में सौदा न करें. कार की सर्विस हिस्ट्री भी देखें, ताकि पता चल सके कि उसकी समय पर देखभाल हुई है या नहीं. अगर कार के मीटर पर कम किलोमीटर दिख रहे हैं, लेकिन सर्विस रिकॉर्ड नहीं है, तो उसकी दूरी को लेकर सवाल उठता है. कुछ मामलों में कार के मीटर में छेड़छाड़ करके किलोमीटर कम दिखाए जाते हैं. इसके अलावा, अगर कार पर बैंक का लोन बाकी है, तो उसे खरीदने से पहले लोन चुकाने और बैंक से जरूरी दस्तावेज लेने की पुष्टि करें. ऐसा न करने पर कार अपने नाम करवाने में परेशानी आती है.
बंद हो चुके मॉडल और खराब हालत वाली कार न लें
कुछ पुरानी कारों के मॉडल बंद हो चुके हैं या उनकी कंपनियां भारत में अपना कारोबार बंद कर चुकी हैं. ऐसी कार खरीदने से पहले यह जरूर पता करें कि उनके स्पेयर पार्ट्स आसानी से मिलते हैं या नहीं. अगर पार्ट्स मिलना मुश्किल है, तो कार खराब होने पर उसे ठीक कराने में ज्यादा समय और पैसे लग सकते हैं. इसके अलावा, पहले टैक्सी के रूप में इस्तेमाल की गई कार को खरीदते समय ज्यादा सावधानी बरतें. ऐसी कारें कई बार लंबे समय तक चलाई जाती हैं, जिससे उनके इंजन, क्लच, ब्रेक और सस्पेंशन पर ज्यादा असर पड़ता है. टेस्ट ड्राइव के दौरान अगर साइलेंसर से नीला धुआं निकलता है, गियर बदलते समय झटके लगते हैं या कार एक तरफ खिंचती है, तो उसकी अच्छी तरह जांच कराएं. इन समस्याओं को नजरअंदाज करके कार खरीदना महंगा पड़ता है.
इसलिए सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले उसके कागजात, इंजन, गियरबॉक्स और पूरे ढांचे की जांच जरूर कराएं. सिर्फ कम कीमत या बाहर से अच्छी दिखने के कारण कार न खरीदें. सही जांच करने से आप गलत सौदा करने और भविष्य में होने वाले बड़े खर्च से बच सकते हैं.
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