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500 KM चलने में ट्रक कितना डीजल पीता है? जानें खर्च

500 किलोमीटर चलने में ट्रक कितना डीजल पीता है? जानिए छोटे और भारी ट्रकों की डीजल खपत, माइलेज और कुल खर्च का पूरा हिसाब.

हम जब भी सड़क पर निकलते हैं तो हमें ट्रक चलते जरूर दिख जाते हैं. क्योंकि ट्रक से देश भर के कोने-कोने में जरुरत के समान पहुंचाया जाता है. जब भी ट्रक को देखते हैं तो हमारे मन में एक सवाल जरुर आता है और वह यह कि लगातार सड़कों पर चलने वाले ट्रक आखिरकार कितना फ्यूल पीती होंगी. इंडिया में ज्यादातर ट्रक डीजल से चलते हैं और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं. ऐसे में ट्रांसपोर्ट बिजनेस चलाने वाले लोग और ड्राइवर हमेशा इस बात का पूरा हिसाब लगाकर रखते हैं कि गाड़ी का माइलेज कितना निकल रहा है.

आपको बता दें कि एक छोटे ट्रक से लेकर भारी ट्रेलर तक की डीजल खपत में जमीन आसमान का फर्क होता है. अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि कोई भी ट्रक 500 किलोमीटर की दूरी तय करने में आखिरकार कितना डीजल पीता है और इस पर कुल कितना खर्चा बैठता है. तो इस खबर में हम आपको छोटे से लेकर बड़े ट्रकों की डीजल खपत और उनके खर्च का पूरा हिसाब बताएंगे.

छोटे ट्रकों का खर्च

बता दें कि हल्के और मध्यम केटेगरी के कमर्शियल वाहन जैसे कि टाटा 407 या आयशर जैसे छोटे ट्रक आमतौर पर शहर के भीतर सामान ढोने के काम आते हैं. इस तरह के हल्के ट्रकों का डीजल माइलेज लगभग 7 से 9 किलोमीटर प्रति लीटर के आसपास मिल जाता है. जो इनकी लोडिंग क्षमता पर निर्भर करता है.

यदि ऐसा कोई ट्रक लगातार 500 किलोमीटर की दूरी तय करता है तो वह कुल मिलाकर लगभग 55 से 70 लीटर डीजल की खपत करता है. आज के समय में मार्केट में डीजल की औसत कीमत को अगर 90 रुपये प्रति लीटर मानकर चलें तो पूरे सफर का खर्च लगभग पांच हजार से छह हजार तीन सौ रुपये के बीच बैठता है.

500 KM चलने में ट्रक कितना डीजल पीता है? जानें खर्च

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भारी ट्रकों का हिसाब

जब हम बड़े और भारी कमर्शियल ट्रकों की बात करते हैं तो डीजल की खपत काफी ज्यादा बढ़ जाती है. क्योंकि दस-चक्का या बारह-चक्का जैसे भारी ट्रक जब पूरी तरह से सामान से लदे होते हैं तो उनका माइलेज घटकर लगभग 4.5 से 6 किलोमीटर प्रति लीटर ही रह जाता है. इस हिसाब से अगर ये भारी ट्रक 500 किलोमीटर का सफर तय करते हैं तो इन्हें अपनी टंकी से लगभग 85 से 110 लीटर डीजल की जरुरत पड़ती है.

डीजल के दामों के हिसाब से कैलकुलेट करें तो इन गाड़ियों पर केवल 500 किलोमीटर के रास्ते में लगभग 7600 से 10000 हजार रुपये का फ्यूल खर्च हो जाता है. भारी वजन ढोने और बड़े इंजन के साथ चलने के कारण इन ट्रकों की रनिंग कॉस्ट काफी ज्यादा ऊंची हो जाती है.

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भारी ट्रेलर में होती है ज्यादा खपत

अब बात करें अगर सड़कों पर चलने वाले सबसे बड़े और भारी-भरकम मल्टी-एक्सल ट्रकों की तो यह एक बार में 30 से 40 टन तक का भारी वजन लादकर चलते हैं. इतने भारी भरकम वजन को खींचने की वजह से इन ट्रकों का माइलेज 3 से 4 किलोमीटर प्रति लीटर ही मिल पाता है.

जब ऐसे बड़े ट्रेलर 500 किलोमीटर का सफर पूरा करते हैं तो वे लगभग 125 से 165 लीटर तक डीजल पी जाते हैं. वहीं अगर अब इनके टोटल खर्च कैलकुलेट करें तो 90 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से इस सफर का कुल डीजल खर्च लगभग ग्यारह हजार दो सौ से पंद्रह हजार रुपये तक पहुंच जाता है.

क्यों बढ़ता है इतना खर्च?

अब बात करते हैं कि ट्रकों को चलाने के लिए इतने डीजल की जरूरत क्यों पड़ती है तो आपको बता दें कि ट्रक पर लदा हुआ वजन इसक असली कारण है. क्योंकि जितना ज्यादा सामान भरा होगा इंजन पर उतना ही ज्यादा दबाव बढ़ेगा और माइलेज गिर जाएगा. जबकि इसके अलावा रास्ते की बनावट जैसे कि पहाड़ी रास्ते, खराब सड़कें और शहर के भीतर मिलने वाला भयंकर ट्रैफिक भी डीजल की खपत को तेजी से बढ़ा देते हैं.

वहीं इसके अलावा समय पर गाड़ी की सर्विसिंग न कराना, इंजन का पुराना होना या टायरों में हवा का कम होना भी ट्रक को ज्यादा डीजल पीने के लिए मजबूर कर देता है. इसलिए चालकों को हमेशा यही सलाह दी जाती है कि वे सही तरीके से गाड़ी चलाएं ताकि फ्यूल की इस भारी बर्बादी को कुछ हद तक रोका जा सके.

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हिमांशु सिंह पिछले साढ़े तीन साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. फिलहाल वह ABP News में ऑटो बीट पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्टर में उन्हें नई कारों और बाइक्स के लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, फीचर्स, माइलेज, टेक्नोलॉजी और ऑटो मार्केट से जुड़ी खबरों की अच्छी जानकारी है. वह ऑटो से जुड़ी हर जरूरी और नई जानकारी आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के खबरों को समझ सकें.

ABP News से पहले हिमांशु DNP India, Sports Wiki और Hawk E Commerce के साथ काम कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स, राजनीति और वायरल खबरों पर भी काम किया. अलग-अलग बीट्स पर काम करने की वजह से उन्हें कई तरह की खबरों को समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने का अनुभव मिला.

हिमांशु की कोशिश रहती है कि उनकी खबरें सरल, भरोसेमंद और सीधे लोगों से जुड़ी हों. उन्हें ऐसी खबरों पर काम करना पसंद है, जिनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. डिजिटल मीडिया की अच्छी समझ होने की वजह से वह ट्रेंडिंग और जरूरी खबरों को तेजी से पाठकों तक पहुंचाते हैं.

काम के अलावा हिमांशु को क्रिकेट खेलना, स्टैंडअप कॉमेडी करना और नई जगहों पर घूमना पसंद है. उनका मानना है कि नई जगहों को देखना और नए लोगों से मिलना सोच को बेहतर बनाता है, जिसका फायदा उनके काम में भी मिलता है.

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