कार लोन लेने की कर रहे हैं तैयारी? पहले जान लें ये बातें, वरना बाद में हो सकता है बड़ा पछतावा
Car Loan Guide: कार लोन लेने से पहले जान लें सिबिल स्कोर, ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस से जुड़े ये जरूरी नियम. अपनी पसंद की गाड़ी खरीदने से पहले बजट बिगड़ने से बचाएं.

Car Loan Guide: भारत में आजकल बैंक और फाइनेंस कंपनियां इतने शानदार ऑफर देती हैं कि अपनी कार खरीदना आसान हो गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना सोचे-समझे और बिना पूरी जानकारी के कार लोन लेना बहुत ही बड़ा नुकसान करा सकता है. आपने ऐसा अपने आस-पास देखा होगा कि लोग अक्सर केवल गाड़ी के शोरूम प्राइस और महीने की किस्त को देखकर लोन ले लेते हैं.
लेकिन बाद में लोन पर और भी छिपे इंट्रेस्ट देने से लोगों का बजट बिगड़ जाता है. जिसके चलते आज हम इस खबर में आपको बताएंगे कि कार लोन लेने से पहले आपको किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि बाद में कोई पछतावा न हो.
सिबिल स्कोर रखें अच्छा
बता दें कि, कार लोन के लिए अप्लाई करने से पहले जो चीज सबसे ज्यादा मायने रखती है वो है आपका क्रेडिट या सिबिल स्कोर. बैंक हमेशा उसी ग्राहक को सबसे कम इंट्रेस्ट रेट पर लोन देते हैं जिसका सिबिल स्कोर 750 या उससे ऊपर होता है.
अगर आपका स्कोर कम है तो बैंक या तो आपका लोन रिजेक्ट कर देंगे या फिर आपसे बहुत ज्यादा ब्याज वसूलेंगे. इसलिए लोन की अर्जी डालने से पहले अपने पुराने क्रेडिट कार्ड के बिल और लोन की किश्तें समय पर चुकाकर अपने स्कोर को बेहतर बना लें ताकि आपको बेस्ट डील मिल सके.
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पहले इंट्रेस्ट रेट के बारें में समझें
हमेशा लोन लेने से पहले बैंक आपको दो तरह के ब्याज दरों का विकल्प देते हैं फिक्स्ड और फ्लोटिंग. बता दें कि, फिक्स्ड रेट में आपके लोन की ब्याज दर पूरे टेन्योर यानी अवधि के दौरान एक समान रहती है. जिससे आपकी ईएमआई कभी नहीं बदलती.
वहीं दूसरी तरफ फ्लोटिंग रेट रिजर्व बैंक की नीतियों और बाजार के उतार-चढ़ाव के हिसाब से बदलती रहती है. अगर आने वाले समय में ब्याज दरें घटने की उम्मीद हो तभी फ्लोटिंग का चुनाव करें वरना फिक्स्ड रेट चुनना ज्यादा सुरक्षित रहता है ताकि बजट कंट्रोल में रहे.
केवल ईएमआई न देखें
बता दें कि, अक्सर ऐसा देखा जाता है कि लोग सिर्फ इस बात पर खुश हो जाते हैं कि उनकी महीने की किश्त उनके बजट में बन रही है. लेकिन कार लोन में कई ऐसे छिपे हुए खर्च होते हैं जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं. इनमें सबसे प्रमुख हैं लोन प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज और प्री-पेमेंट या फोरक्लोज़र पेनाल्टी.
लोन एग्रीमेंट साइन करने से पहले बैंक से इन सभी शुल्कों की लिखित जानकारी मांगें. इसके अलावा गाड़ी के रोड टैक्स और सालाना इंश्योरेंस के खर्च को भी अपने कैलकुलेशन में जरूर शामिल करें. ये सब करके आप अपना लोन अमाउंट कैलकुलेट कर लें इसके बाद ही फिर लोन लेते की सोचें.
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