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Soybean Car VS Steel Car: 84 साल पहले बनी थी सोयाबीन की कार, स्टील को दी थी चुनौती

Soybean Car VS Steel Car: 84 साल पहले हेनरी फोर्ड ने सोयाबीन और दूसरे पौधों से मिले रेशों से कार के प्लास्टिक पैनल बनाने का प्रयोग किया था. इसका मकसद स्टील का विकल्प तलाशना था.

Soybean Car VS Steel Car: आज जब कारों को हल्का और वातावरण  के लिए बेहतर बनाने की बात होती है, तो अक्सर नई तकनीक का जिक्र होता है. लेकिन करीब 84 साल पहले ही एक ऐसा प्रयोग हो चुका था, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया था, कि कार बनाने के लिए सिर्फ स्टील पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है. यह प्रयोग अमेरिका के मशहूर कार निर्माता हेनरी फोर्ड ने किया था. खास बात यह थी कि इस कार के बाहरी हिस्से को बनाने में खेती से मिलने वाली चीजों का इस्तेमाल किया गया था.

खेत में उगने वाली चीजों से बनी थी कार 

साल 1941 में हेनरी फोर्ड ने एक ऐसी कार पेश की, जिसे आमतौर पर ‘सोयाबीन कार’ के नाम से जाना जाता है. बाहर से देखने पर यह दूसरी कारों जैसी ही दिखाई देती थी, लेकिन इसके शरीर में स्टील की जगह पौधों से मिलने वाले रेशों से बने प्लास्टिक के पैनल लगाए गए थे. यहां यह समझना जरूरी है कि पूरी कार सोयाबीन से नहीं बनी थी. कार में मजबूत स्टील का ढांचा मौजूद था. उसके ऊपर 14 ढले हुए प्लास्टिक पैनल लगाए गए थे. इन पैनलों में खेती से मिलने वाले पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था.

 इन फसलों का भी हुआ था इस्तेमाल

इस कार में इस्तेमाल हुए प्लास्टिक की पूरी बनाने की टेक्नीक आज मौजूद  नहीं है. पुराने रिकॉर्ड में इसकी सामग्री को लेकर कुछ फार्क मिलता है. कुछ रिकॉर्ड्स  में सोयाबीन, गेहूं, भांग, अलसी और रेमी जैसे पौधों का जिक्र मिलता है. एक डिटेल में सोयाबीन के रेशों को एक खास तरह के रेजिन के साथ मिलाने की बात कही गई है. इसका मतलब साफ है कि हेनरी फोर्ड खेती को सिर्फ अनाज और भोजन तक सीमित नहीं देख रहे थे. उनका विचार था, कि खेतों से मिलने वाली फसलें कार और दूसरी चीजें बनाने में भी काम आ सकती हैं.

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यह कार क्यों थी खास?

इस प्रयोग का सबसे बड़ा फायदा कार का कम वजन था. हेनरी फोर्ड म्यूजियम के मुताबिक इस कार का वजन करीब 2,000 पाउंड, यानी लगभग 900 किलो था. उस समय की कई स्टील से बनी कारों की तुलना में यह काफी हल्की थी. हल्की कार का मतलब यह था कि उसे चलाने के लिए कम वजन ढोना पड़ता था. उस समय अमेरिका में स्टील और दूसरी धातुओं की जरूरत तेजी से बढ़ रही थी. ऐसे में खेती से मिलने वाले सामान को कार बनाने में इस्तेमाल करने का काफी अलग था.

यह कार सड़क पर क्यों नहीं उतरी?

यह कार सिर्फ इस्तेमाल के लिए बनाई गई थी, और बड़े पैमाने पर इसका मैन्युफैक्चर नहीं हुआ. अमेरिका के दूसरे विश्व युद्ध में शामिल होने के बाद आम कारों का उत्पादन रुक गया और कार कंपनियों का ध्यान युद्ध से जुड़े सामान बनाने पर चला गया. युद्ध के बाद पेट्रोलियम से बनने वाला प्लास्टिक तेजी से लोकप्रिय हुआ. यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध था. ऐसे में खेती से मिलने वाले सामान से कार बनाने का हेनरी फोर्ड का विचार पीछे छूट रह गया है. इस कार का मॉडल भी बाद में खत्म हो गया.

कार कंपनियां कार के अंदर के हिस्सों में अलसी, भांग और दूसरे पौधों से बने रेशों का इस्तेमाल कर रही हैं. इसलिए 1941 की यह कार आज भी एक दिलचस्प इस्तेमाल मानी जाती है. हेनरी फोर्ड का सवाल सीधा था, अगर खेत हमें खाना दे सकते हैं, तो क्या खेत कार बनाने का सामान भी दे सकते हैं? करीब 84 साल पहले किया गया यह इन्वेंशन आज की एनवायरनमेंट और कारों की एडवांटेज के सोच से कहीं न कहीं जुड़ा दिखाई देता है.

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