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ड्रोन हंटर्स बना रही भारतीय वायुसेना, ऑपरेशन सिंदूर से क्या है इसका कनेक्शन?

ऑपरेशन सिंदूर और ईरान-अमेरिका जंग से सीख लेते हुए इंडियन एयर फोर्स ड्रोन हंटर्स तैयार कर रही है. रूस-यूक्रेन जंग में जिस तरह ड्रोन का जबरदस्त इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे ड्रोन की उपयोगिता बढ़ी है.

ऑपरेशन सिंदूर और ईरान-अमेरिका जंग से सीख लेते हुए इंडियन एयर फोर्स ड्रोन हंटर्स तैयार कर रही है. ये ड्रोन हंटर्स वायुसेना के अटैक हेलीकॉप्‍टर्स हैं, जिन्हें कभी एलओसी से लेकर एलएसी तक पहाड़ों की ऊंचाई पर बनी दुश्मन की चौकियों को तबाह करने के लिए ऑपरेट किया जाता था. अटैक हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल आतंकियों के ठिकानों के लिए भी किया जा सकता है, जैसा यूएस फोर्सेज ने अफगानिस्तान में अल-कायदा और तालिबान के खिलाफ किया था. 

दरअसल अटैक हेलीकॉप्टर में अनगाइडेड रॉकेट लगे होते हैं, जो बेहद स्पीड से जमीन पर दनादन फायरिंग करते हैं, लेकिन पिछले 30-40 वर्षों से इन अनगाइडेड रॉकेट्स का कोई खास इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था क्योंकि मिलिट्री कमांडर्स और एक्सपर्ट्स को लगने लगा था कि मिसाइलों के आने से रॉकेट की योग्यता बेहद कम हो गई है, लेकिन ड्रोन वॉरफेयर ने दुनियाभर में युद्ध का स्वरूप बेहद तेजी से बदल दिया है. 

पिछले चार साल से चल रही रूस-यूक्रेन जंग में जिस तरह ड्रोन का जबरदस्त इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे ड्रोन की उपयोगिता तो बढ़ी है, लेकिन काउंटर-ड्रोन क्षमताओं को ईजाद करने की भी खास जरूरत है. मिडिल-ईस्ट जंग में ईरान ने शहीद ड्रोन का इस्तेमाल कर अमेरिका और इजरायल जैसे दो-दो मिलिट्री सुपरपावर के खिलाफ युद्ध का रुख पूरी तरह बदल दिया है. 

पाकिस्तान ने किए थे ड्रोन अटैक 
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ लगातार 3 दिन तक ड्रोन अटैक किए थे. सियाचिन से लेकर जम्मू कश्मीर और पंजाब से लेकर राजस्थान और गुजरात तक पाकिस्तान ने ड्रोन अटैक किए थे. उस दौरान भारत ने रूस की विंटेज एंटी-एयरक्राफ्ट गन का पाकिस्तान के ड्रोन के खिलाफ जमकर इस्तेमाल किया था. इनमें भारतीय सेना यानी थलसेना की L-70 और Zu-23 का इस्तेमाल किया गया था. भारतीय वायुसेना को आकाश मिसाइल का इस्तेमाल करना पड़ा था, लेकिन एक 5-10 लाख के ड्रोन के लिए करोड़ों की मिसाइल का इस्तेमाल करना कहीं से भी फायदा का सौदा नहीं है. जिस तरह ड्रोन वॉरफेयर में स्वार्म-ड्रोन को शामिल किया गया है, जिसमें ड्रोन झुंड के झुंड में आते हैं, उनके लिए मिसाइल भी कम पड़ सकती हैं. 

ड्रोन से निपटने के लिए तैयार अटैक हेलीकॉप्टर्स 
वेस्ट एशिया की जंग में अमेरिका की पैट्रियाट और थाड मिसाइल सिस्टम के भी ईरान के आत्मघाती ड्रोन का मुकाबला करने में पसीने छूट रहे हैं. ऐसे में ड्रोन-इंटरसेप्टर्स के साथ-साथ भारतीय वायुसेना ने अपने अटैक हेलीकॉप्टर्स को ड्रोन से निपटने के लिए तैयार किया है. वायुसेना ने इन अटैक हेलीकॉप्टर्स के अनगाइडेड रॉकेट्स को एक खास लेजर गाइडेड किट से लैस कर दिया है. ऐसे में ये अब गाईडेड रॉकेट सिस्टम में तब्दील हो गए हैं. इसके अलावा इन रॉकेट्स के वॉरहेड में भी तब्दीली की गई है. ये वॉरहेड खासतौर से ड्रोन्स को मार गिराने के लिए तैयार किए गए हैं. इन रॉकेट्स की मारक क्षमता करीब 10 किलोमीटर है. ऐसे में दुश्मन के ड्रोन को 10 किलोमीटर दूर पर भी आसमान में मार गिराया जा सकता है. 

हाल में अमेरिका-ईरान जंग में एक वीडियो ऐसा सामने आया था, जिसमें यूएई के एक अटैक हेलीकॉप्टर ने ईरान के शहीद ड्रोन को आसमान में मार गिराया था. माना जा रहा है कि अमेरिका ने अपने अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर्स को भी इस काउंटर-ड्रोन तकनीक से लैस कर दिया है. ऐसे में भारतीय वायुसेना भी ड्रोन वॉरफेयर के लिए पूरी तरह तैयार हो रही है. यानी चुन चुन कर दुश्मन के ड्रोन को आसमान में मार गिरानी की तैयारी की जा रही है.

क्या है रोटर-क्लैप एक्सरसाइज 
हाल में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान से सटी सीमा के करीब जैसलमेर की पोखरण फायरिंग रेंज में एक बेहद खास एक्सरसाइज की. इस एक्सरसाइज का नाम था रोटर-क्लैप. रोटर इसलिए क्योंकि हेलीकॉप्टर के ऊपर लगे पंखों को रोटर कहा जाता है और हेलीकॉप्टर्स को भी वायुसेना में रोटर्स के नाम से जाना जाता है. क्योंकि इस एक्सरसाइज में वायुसेना के सभी अटैक हेलीकॉप्टर्स ने मिलकर ड्रोन खतरों से लड़ने की अपनी तैयारियों को धार दी थी, इसलिए एक्सरसाइज का नाम रोटर-क्लैप रखा गया. वायुसेना ने पहली बार इस रोटर-क्लैप-3 एक्सरसाइज की जानकारी सार्वजनिक की है. इस एक्सरसाइज की थीम थी- काउंटर-UAS यानी अनमैनड एरियल सिस्टम. इसमें सभी तरह के छोटे क्वाटकॉप्टर ड्रोन और शहीद जैसे आत्मघाती ड्रोन को काउंटर करने की ट्रेनिंग दी गई.

अभी तक जितनी भी वायुसेना की एक्सरसाइज होती आई हैं, चाहे फिर वो तरंगशक्ति हो, वायुशक्ति हो, गगनशक्ति, उन सभी में फाइटर जेट हिस्सा लेते हैं, लेकिन पहली बार ऐसा युद्धाभ्यास हुआ है, जिसमें सिर्फ हेलीकॉप्टर्स ने हिस्सा लिया. खुद भारतीय वायुसेना ने इस एक्सरसाइज की तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा की हैं.

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नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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