बजट पर बवाल! TVK ने DMK सरकार को घेरा, भ्रष्टाचार और कर्ज पर उठाए सवाल
Tamil Nadu Assembly: तमिलनाडु विधानसभा में TVK और DMK के बीच बजट चर्चा के दौरान भ्रष्टाचार, कर्ज, फ्री बिजली, कल्याणकारी योजनाओं और डिलिमिटेशन को लेकर तीखी बहस हुई.

तमिलनाडु विधानसभा में राज्य के बजट पर चर्चा के दौरान TVK) और विपक्षी पार्टी DMK के सदस्यों के बीच जमकर बहस हुई. इस दौरान भ्रष्टाचार, सरकारी पैसों के इस्तेमाल, कर्ज और सामाजिक कल्याण योजनाओं को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर सवाल उठाए. बहस की शुरुआत पूर्व मंत्री और DMK विधायक रघुपति के बयान से हुई. उन्होंने TVK सरकार के मंत्रियों के बजट पेश करने के तरीके पर सवाल उठाया. रघुपति ने कहा कि फाइनेंस मिनिस्टर ने हाथ में माला लेकर बजट पेश किया, जबकि एग्रीकल्चर मिनिस्टर तिरुपति लड्डू और पुलियोदराई लेकर एग्रीकल्चर बजट पेश करने आए.
रघुपति ने सूचना के अधिकार आयोग के कामकाज पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आयोग में नियुक्तियां नहीं होने की वजह से लोगों को जानकारी मिलने में देरी हो रही है. उन्होंने सरकार से खाली पदों को जल्द भरने की मांग की. उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों का भी जिक्र किया, जिनमें कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रवीण चक्रवर्ती की अध्यक्षता में जानकारी देने के लिए किसी कमेटी के गठन की बात कही गई थी.
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हायर एजुकेशन मिनिस्टर ने दावे को खारिज किया
हायर एजुकेशन मिनिस्टर विश्वनाथन ने इस दावे को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि प्रवीण चक्रवर्ती राज्यसभा के सदस्य हैं और तमिलनाडु विधानसभा के सदस्य नहीं हैं. उन्होंने कहा कि प्रवीण चक्रवर्ती न तो तमिलनाडु सरकार की बनाई किसी कमेटी का हिस्सा हैं और न ही इस मामले में सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं. विधानसभा स्पीकर जेसीडी प्रभाकरन ने भी सदस्यों को बिना अनुमति अखबारों की रिपोर्ट का हवाला देने से बचने की चेतावनी दी.
टेंडर में लीकेज को लेकर बहस
बहस उस समय और तेज हो गई जब रघुपति ने सरकारी टेंडर में 'लीकेज' का मुद्दा उठाया. उन्होंने सवाल किया कि टेंडर में लीकेज कैसे हो सकता है. इसके जवाब में फाइनेंस मिनिस्टर डॉ. एन मैरी विल्सन ने कहा कि उन्होंने तीन विभागों के खातों की जांच की है. इनमें मिली गड़बड़ियों और लीकेज को लेकर मुख्यमंत्री को एक विस्तृत रिपोर्ट दी गई है. उन्होंने कहा कि जल्द ही इन मामलों पर जवाब दिया जाएगा. इसके बाद रघुपति ने आरोप लगाया कि वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट में बिल पास कराने के लिए तीन प्रतिशत पैसे देने पड़ते हैं. वॉटर रिसोर्स मिनिस्टर आनंद ने इस आरोप को खारिज कर दिया.
उन्होंने कहा कि बिल पास कराने के लिए पैसे देने की बात शायद पिछली सरकार के समय की प्रथा रही होगी, लेकिन उनकी सरकार में ऐसा नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार में ऐसे तरीके चलते होते तो मुख्यमंत्री उन्हें मंत्री नहीं बनाते. सदन के नेता और TVK मंत्री सेंगोट्टैयन ने भी रघुपति पर निशाना साधा और कहा कि सभी जानते हैं कि सदस्य कहां से आए हैं और कहां पहुंच गए हैं. रघुपति ने अपनी बात का बचाव करते हुए कहा कि वह सिर्फ उन्हीं मुद्दों पर बात कर रहे हैं, जो बजट में शामिल हैं.
'नम्मई काप्पोम 48' योजना पर सवाल
रघुपति ने 'नम्मई काप्पोम 48' योजना को लेकर भी सरकार से जानकारी मांगी. यह योजना सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने और 2 लाख रुपये तक का मेडिकल इंश्योरेंस कवरेज देने के लिए शुरू की गई थी. उन्होंने पूछा कि यह योजना अभी चल रही है या नहीं. स्वास्थ्य मंत्री अरुण राज ने जवाब दिया कि 'नम्मई काप्पोम 48' योजना आगे भी लागू रहेगी.
रोजगार योजना और केंद्र को लेकर आरोप
रघुपति ने 150 दिन की रोजगार योजना का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र के सामने सरेंडर कर रही है. पब्लिक वर्क्स मिनिस्टर आधव अर्जुन ने वॉटर रिसोर्स और पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज कर दिया.उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कई बार साफ कर चुके हैं कि उनकी सरकार में भ्रष्टाचार गंभीर अपराध है. उन्होंने दावा किया कि अब तक सरकार में किसी ने रिश्वत के तौर पर एक रुपया भी नहीं लिया है. आधव अर्जुन ने मेकेदातु मुद्दे पर भी DMK से सवाल किया और पूछा कि क्या उसके सांसद मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक में शामिल होंगे.
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