पेट्रोल-डीजल से महंगा पड़ा EV का इंश्योरेंस क्लेम, खर्च 14% ज्यादा
इलेक्ट्रिक कारों का इंश्योरेंस क्लेम पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से 14% तक महंगा साबित हो रहा है. जानिए इसके पीछे की मुख्य वजहें और बैटरी प्रोटेक्शन का खर्च.

हमारे देश में अब लोगों को इलेक्ट्रिक गाड़ी खूब पसंद आ रहे हैं और लोग तेजी से खरीद भी रहे हैं. अभी हाल ही में आए डेटा में भी यह साफ देखा गया है कि EV गाड़ियों की डिमांड इंडिया में तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह और भी बढ़ने वाला है. लेकिन अब इलेक्ट्रिक गाड़ी को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल इलेक्ट्रिक कारों के रख-रखाव और बीमा से जुड़ी एक बड़ी बात सामने आई है.
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक इलेक्ट्रिक कारों का इंश्योरेंस क्लेम पारंपरिक पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के मुकाबले औसतन 14 प्रतिशत तक ज्यादा महंगा साबित हो रहा है. बता दें कि एक आंकड़ें के अनुसार पेट्रोल-डीजल कारों पर जहां औसत क्लेम खर्च लगभग 36,185 रुपये आता है. वहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए यह कीमत बढ़कर औसतन 41,543 रुपये तक पहुंच जाती है. चलिए विस्तार से जानतें हैं पूरी खबर.
महंगे पार्ट्स और बैटरी का असर
आपको बता दें कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बीमा क्लेम महंगे होने के पीछे सबसे बड़ी वजह उनमें इस्तेमाल होने वाली हाई-वोल्टेज बैटरी और थर्मल मैनेजमेंट, कूलिंग हार्डवेयर व सेंसर जैसे महंगे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स हैं.
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार कई मॉडल्स में केवल बैटरी पैक बदलने का खर्च गाड़ी की कुल कीमत का 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकता है. यही वजह है कि एक्सीडेंट या तकनीकी खराबी के बाद जब रिपेयरिंग की बारी आती है तो पारंपरिक इंजन वाली गाड़ियों की तुलना में ईवी का रिपेयर बिल काफी भारी-भरकम होता है.

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बैटरी प्रोटेक्शन के चलते बढ़ रहा कीमत
जानकारी दें दे कि, इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बढ़ते खतरे को देखते हुए अब सभी ईवी मालिक सामान्य बीमा पॉलिसियों की जगह खास सेफ्टी कवच को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. ऐसा इस लिए है क्योंकि आंकड़ों के मुताबिक लगभग 80 प्रतिशत ईवी मालिक जीरो डेप्रिसिएशन और रोडसाइड असिस्टेंस के साथ-साथ बैटरी प्रोटेक्शन कवर जरूर ले रहे हैं.
वहीं, EV गाड़ियों में पानी भरने, शॉर्ट सर्किट और पावर सर्ज जैसी प्रॉब्लम से बैटरी को सुरक्षित रखने के लिए बैटरी प्रोटेक्शन कवर लेने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है. जिसके चलते EV गाड़ियों का क्लेम पेट्रोल और डीजल कारों से महंगा पड़ रहा है.

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मानसून और ड्राइविंग कंडीशंस का प्रभाव
जबकि इसके अलावा रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि मानसून के मौसम में ईवी के क्लेम का खर्च और अधिक बढ़ जाता है. बारिश के दिनों में जलभराव और पानी की वजह से होने वाले नुकसान के कारण औसत क्लेम राशि सामान्य दिनों के मुकाबले लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़कर 65,000 रुपये तक पहुंच जाती है.
वहीं, इसके अलावा टियर-2 शहरों में और इलेक्ट्रिक एसयूवी सेगमेंट में क्लेम की फ्रीक्वेंसी भी अधिक दर्ज की जा रही है. जिसके चलते यह पता चलता है कि गाड़ी खरीदते समय सही इंश्योरेंस पॉलिसी और पर्याप्त कवर चुनना ग्राहकों के लिए बेहद जरूरी हो गया है.
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