Electric Vehicle Tips: नई इलेक्ट्रिक कार लेने से पहले जानिए इससे जुड़े 10 सवालों के जवाब, फायदा करवा देगी ये खबर
Electric Vehicle Tips: इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले रेंज, बैटरी लाइफ, चार्जिंग स्टेशन, मेंटेनेंस और कुल खर्च जैसी जरूरी बातों को समझना बेहद जरूरी है. जानिए EV से जुड़े 10 अहम सवालों के जवाब.

Electric Vehicle Tips: तेज गर्मी, लंबा ट्रैफिक और ऊपर से हर महीने बढ़ता पेट्रोल का खर्च… आजकल कार चलाना कई लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है. साथ ही कई शहरों में पेट्रोल पंप पर लंबी लाइनें और तेल की सप्लाई को लेकर चिंता भी देखने को मिल रही है. ऐसे में अब बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक कार यानी EV की तरफ बढ़ रहे हैं. जो कम खर्च, कम मेंटेनेंस और पेट्रोल से छुटकारा मिलने की वजह से EV लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है. लेकिन बिना पूरी जानकारी के इलेक्ट्रिक कार खरीदना बाद में परेशानी भी दे सकता है. इसलिए अगर आप भी अपनी पहली EV लेने का प्लान बना रहे हैं तो कुछ जरूरी सवालों के जवाब पहले जान लेना बेहद जरूरी है, आइए आपको बताते है.
सिर्फ कंपनी की रेंज देखकर फैसला न करें
बहुत से लोग EV खरीदते समय सिर्फ कंपनी द्वारा बताई गई रेंज देखकर खुश हो जाते हैं, जबकि असली रेंज सड़क पर अलग हो सकती है. जिसमें ट्रैफिक, AC का इस्तेमाल, तेज गर्मी और ड्राइविंग स्टाइल की वजह से बैटरी जल्दी खत्म हो सकती है. इसलिए हमेशा “रियल वर्ल्ड रेंज” जरूर चेक कर के ही गाड़ी को खरीदें और यूजर्स के रिव्यू पढ़ कर कोई निर्णय लें. इसके साथ ही अपने इलाके में चार्जिंग स्टेशन की सुविधा भी देख लें. कई बार इसकी सही जानकारी नहीं होती है और फिर पछताना पड़ता है, वहीं अगर घर या आसपास चार्जिंग की सुविधा नहीं होगी तो रोज की परेशानी बढ़ सकती है. कई बार बहुत सी जगहों पर चार्जिंग स्टेशन ढूंढना मुश्किल काम होता है. इसलिए इसकी जानकारी गाड़ी खरीदने से पहले ही रख लेनी चाहिए.
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बैटरी, चार्जिंग टाइम और कुल खर्च समझना जरूरी
इलेक्ट्रिक कार का सबसे महंगा हिस्सा उसकी बैटरी होती है. इसलिए बैटरी की वारंटी कितने साल की है, बाद में बदलने का खर्च कितना आएगा और उसकी लाइफ कितनी होगी, ये सब पहले समझ लेना चाहिए. वही कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक EV बैटरी बदलने में लाखों रुपये तक खर्च हो सकते हैं. इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि पेट्रोल कार की तरह EV में 5 मिनट में “फुल टैंक” नहीं होता. कई बार चार्जिंग में 1 से 2 घंटे तक लग जाते हैं. इसलिए फास्ट चार्जिंग सपोर्ट वाली कार लेना समझदारी हो सकती है. साथ ही सिर्फ कार की कीमत न देखें, बल्कि चार्जिंग, इंश्योरेंस, सर्विस और भविष्य के खर्च जोड़कर कुल लागत का हिसाब लगाकर ही फेसला करें.
अपनी जरूरत के हिसाब से चुनें सही EV
हर इलेक्ट्रिक कार हर इंसान के लिए सही नहीं होती. अगर आपका ज्यादातर काम शहर के अंदर है तो छोटी EV भी अच्छा विकल्प हो सकती है, लेकिन लंबी यात्रा करने वालों को ज्यादा रेंज वाली कार चुननी चाहिए. साथ ही सिर्फ डिजाइन, फीचर्स या बड़े ब्रांड के नाम पर फैसला लेना बाद में नुकसान करवा सकता है. वही एक्सपर्ट्स भी यही सलाह देते हैं कि टेस्ट ड्राइव जरूर करें और फ्यूचर टेक्नोलॉजी वाली कार चुनें ताकि आने वाले समय में उसकी रीसेल वैल्यू बनी रहे. साथ ही आज भारत में EV का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी चार्जिंग नेटवर्क और सर्विस जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, ऐसे में समझदारी से लिया गया फैसला ही आपको असली फायदा देगा और पेट्रोल की टेंशन से राहत भी दिला सकता है.
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Source: IOCL


























