टर्बो-पेट्रोल या नैचुरली एस्पिरेटेड? आपकी ड्राइविंग के लिए कौन सा इंजन है बेस्ट, कार खरीदने से पहले जान लें ये फर्क
Turbo-petrol Vs Naturally Aspirated Engines: टर्बो-पेट्रोल और नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन में क्या फर्क है? जानें परफॉर्मेंस, माइलेज, मेंटेनेंस और ड्राइविंग के आधार पर कौन सा इंजन आपके लिए बेहतर रहेगा.

भारतीय कार बाजार में अब टर्बो-पेट्रोल इंजन वाली कारों की मांग तेजी से बढ़ रही है. खासकर SUV और प्रीमियम हैचबैक सेगमेंट में कंपनियां छोटे टर्बो इंजन का ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह बेहतर पावर और नए प्रदूषण नियम हैं. हालांकि, इसके बावजूद नैचुरली एस्पिरेटेड यानी NA पेट्रोल इंजन आज भी काफी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. जो लोग आरामदायक ड्राइविंग और कम खर्च चाहते हैं, वे अक्सर NA इंजन वाली कारें पसंद करते हैं. ऐसे में अगर आप नई कार खरीदने का सोच रहे हैं, तो दोनों इंजनों का फर्क समझना जरूरी है.
अलग है दोनों इंजनों के काम करने का तरीका
टर्बो-पेट्रोल इंजन में टर्बोचार्जर लगाया जाता है, जो इंजन के अंदर ज्यादा दबाव के साथ हवा भेजता है. इससे छोटा इंजन भी ज्यादा पावर और टॉर्क जनरेट कर पाता है. यही वजह है कि टर्बो इंजन वाली कारें तेज एक्सीलरेशन और शानदार पिकअप देती हैं. वहीं, नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन सामान्य तरीके से हवा खींचता है. इसमें किसी अतिरिक्त मशीन का इस्तेमाल नहीं होता. यही कारण है कि इसकी पावर डिलीवरी काफी स्मूद और आसान महसूस होती है. शहर में आराम से चलाने वालों को यह इंजन ज्यादा पसंद आता है.
परफॉर्मेंस और माइलेज में किसका पलड़ा भारी?
अगर आपको तेज रफ्तार, हाईवे ड्राइविंग और ओवरटेकिंग पसंद है, तो टर्बो इंजन आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. छोटा टर्बो इंजन भी ज्यादा टॉर्क जनरेट करता है, जिससे कार कम RPM पर भी शानदार ताकत देती है. हाईवे पर इसमें बार-बार गियर बदलने की जरूरत कम पड़ती है. माइलेज की बात करें तो कागजों पर टर्बो इंजन ज्यादा बेहतर दिखते हैं, लेकिन असल माइलेज ड्राइविंग स्टाइल पर निर्भर करता है. अगर तेज ड्राइव करेंगे तो टर्बो इंजन ज्यादा पेट्रोल खर्च करेगा. वहीं, NA इंजन शहर के ट्रैफिक में भी बैलेंस माइलेज देता है और रोजाना इस्तेमाल के लिए ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है.
मेंटेनेंस और ड्राइविंग एक्सपीरियंस में बड़ा फर्क
नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन का मेंटेनेंस काफी आसान और सस्ता होता है. इसमें कम दबाव और कम तापमान पर काम होता है, इसलिए इसके पार्ट्स जल्दी खराब नहीं होते. दूसरी तरफ, टर्बो इंजन ज्यादा दबाव पर चलता है, इसलिए इसकी समय पर सर्विस जरूरी होती है. अगर टर्बोचार्जर में खराबी आ जाए तो खर्च भी ज्यादा आ सकता है. ड्राइविंग एक्सपीरियंस की बात करें तो NA इंजन काफी शांत और स्मूद होते हैं. खासकर 4-सिलेंडर इंजन में आवाज और कंपन बहुत कम महसूस होता है. वहीं, छोटे 3-सिलेंडर टर्बो इंजन थोड़ा शोर कर सकते हैं, लेकिन उनकी दमदार परफॉर्मेंस इस कमी को काफी हद तक छुपा देती है.
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Source: IOCL


























