Toll कटने के बाद Receipt जरूर देखें, सामने आया बड़ा Fraud
NHAI टोल प्लाजा पर फर्जी सॉफ्टवेयर से वसूली का बड़ा घोटाला सामने आया है. ED ने 7 राज्यों में छापेमारी की. जानिए वाहन मालिक कैसे बचें इस फ्रॉड से.

अगर आप भी एक्सप्रेसवे या हाईवे पर सफर करते हैं तो यह खबर आपके लिए ही है. क्योंकि, क्या कभी आपने ने सोचा है कि, जो आप टोल पर पैसा देते हैं वह सरकार के खाते में नहीं जाता है. जी हा आपने बिल्कूल सही सुना है. दरअसल, टोल कलेक्शन को लेकर देश भर में एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े और घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. जिसने आम जनता से लेकर सरकारी एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं.
बता दें कि, ED ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के विभिन्न टोल प्लाजा पर अवैध वसूली और हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक साथ कई राज्यों में बड़ी छापेमारी की है. इस कार्रवाई के बाद से हाईवे पर सफर करने वाले चालकों को टोल रसीद की जांच करने के लिए सतर्क किया जा रहा है. अगर आप भी इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होने से बचना चाहते हैं तो हर बार टोल पार करने के बाद रसीद और मैसेज को ध्यान से देखना बेहद जरूरी हो गया है.
ED की बड़ी कार्रवाई
आपको बता दें कि, प्रवर्तन निदेशालय ED ने टोल प्लाजा कलेक्शन घोटाले को लेकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल में एक साथ छापेमारी की. पुलिस की दो शुरुआती एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत यह केस दर्ज किया गया था.
ईडी अधिकारियों के मुताबिक टोल बूथ पर तैनात कुछ निजी एजेंसियां और ठेकेदार एक समानांतर फर्जी सिस्टम चला रहे थे जिसकी मदद से करोड़ों रुपये का टोल टैक्स सरकारी सिस्टम से बाहर ही डायवर्ट किया जा रहा था.

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फर्जी सॉफ्टवेयर से हो रहा था खेल
जानकारी दें दे कि, फॉरेंसिक जांच और NHAI के आधिकारिक रिकॉर्ड्स के मिलान में यह सच सामने आया कि टोल प्लाजा पर रसीद काटने के लिए अनधिकृत और फर्जी ऐप्स का सहारा लिया जा रहा था. जब कोई गाड़ी टोल पर आती थी तो चालक को रसीद तो असली जैसी ही थमा दी जाती थी.
लेकिन बैकएंड सिस्टम में वह ट्रांजैक्शन दर्ज ही नहीं होता था. फास्टैग सिस्टम में भी हेरफेर करके नगद या डिजिटल पेमेंट के जरिए चालकों को ठगा जा रहा था और यह पूरी फर्जी वसूली बिना किसी सरकारी एंट्री के सालों से चल रही थी.
जरूर चेक करें ये खास बातें
अगर आप टोल प्लाजा पर होने वाले इस फर्जीवाड़े से खुद को बचाना चाहते हैं तो उसके लिए आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान देने की जरूरत है. जब भी टोल से रसीद मिले या मोबाइल पर FASTag का कटने का मैसेज आए तो सबसे पहले उस पर दर्ज टोल प्लाजा का नाम, समय, गाड़ी का सही नंबर और कटी हुई राशि का मिलान करें.
वहीं, अगर आपको रसीद में कोई क्यूआर कोड गायब मिले, एनएचएआई का लोगो अजीब लगे या फास्टैग कटने का मैसेज न आए तो तुरंत संदेह जताएं और टोल मैनेजर से जवाब मांगें.

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हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज कराएं शिकायत
वहीं, अगर आपको किसी भी टोल प्लाजा पर रसीद या फास्टैग कटौती को लेकर कोई गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा नजर आता है तो तुरंत NHAI के हेल्पलाइन नंबर 1033 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं.
आपकी थोड़ी सी जागरूकता न सिर्फ आपको धोखाधड़ी से बचाएगी बल्कि देश के राजस्व को चुराने वाले ऐसे टोल माफियाओं पर नकेल कसने में भी मदद करेगी. सड़क पर सफर करते समय जल्दबाजी में टोल पर्ची छोड़े बिना हमेशा उसे अपने पास संभाल कर रखें और पूरा हिसाब जांचें.
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