Second Hand Car: सेकंड हैंड कार की जरूर देखें सर्विस हिस्ट्री, ये चीजें जरूर करें चेक
Buy Used Car: पुरानी कार खरीदने से पहले वाहन पोर्टल पर सर्विस हिस्ट्री, ओडोमीटर रीडिंग और एक्सीडेंट रिकॉर्ड की जांच जरूर करें, ताकि आप ओडोमीटर फ्रॉड और किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बच सकें.

Second Hand Car: देश में पुरानी कारों का बाजार लगातार बड़ा हो रहा है. कम बजट में अपनी पसंदीदा गाड़ी खरीदने के लिए लोग सेकंड हैंड कार का विकल्प चुन रहे हैं. हालांकि, पुरानी कार खरीदने की यह प्रक्रिया जितनी आकर्षक दिखती है, इसमें धोखाधड़ी का जोखिम भी उतना ही ज्यादा रहता है. कई बार डीलर या सेलर ऐसी गाड़ियां बेच देते हैं जो बाहर से तो एकदम चमचमाती हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर उनमें कई गंभीर खामियां होती हैं. ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी भी सेकंड हैंड कार का सौदा फाइनल करने से पहले उसकी सर्विस हिस्ट्री और कुछ तकनीकी पहलुओं की जांच करना बेहद जरूरी है.
सर्विस हिस्ट्री की गहन जांच
गाड़ी देखने जाते समय सबसे पहले सेलर से पूरे सर्विस रिकॉर्ड और बिलों की मांग करें. हमेशा प्राथमिकता उन गाड़ियों को दें जिनकी सर्विस अधिकृत सर्विस सेंटर पर ही हुई हो, क्योंकि इनका डिजिटल रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित और प्रामाणिक होता है. रिकॉर्ड में यह जरूर देखें कि क्या हर 10,000 किलोमीटर या एक साल की तय अवधि पर कार की नियमित सर्विसिंग कराई गई है या नहीं. सर्विस रिकॉर्ड में लंबा गैप या गायब एंट्रीज इस बात का साफ संकेत हैं कि गाड़ी के रखरखाव में लापरवाही बरती गई है.
ओडोमीटर टेंपरिंग
इस स्कैम से बचने का सबसे सटीक तरीका यह है कि आप कार की मौजूदा ओडोमीटर रीडिंग का मिलान उसके सर्विस रिकॉर्ड और इंश्योरेंस पेपर्स में दर्ज किलोमीटर से करें. यदि सर्विस रिकॉर्ड के अनुसार गाड़ी दो साल पहले 50,000 किलोमीटर चल चुकी थी और आज उसका ओडोमीटर सिर्फ 42,000 किलोमीटर दिखा रहा है, तो साफ है कि मीटर के साथ अवैध छेड़छाड़ की गई है.
एक्सीडेंट हिस्ट्री और इंश्योरेंस क्लेम
किसी कार की एक्सीडेंट हिस्ट्री का पता लगाने के लिए उसके इंश्योरेंस पेपर में नो क्लेम बोनस की जांच करें. यदि कार पर एनसीबी शून्य है तो इसका मतलब है कि मालिक ने हाल ही में कोई इंश्योरेंस क्लेम लिया है. इसके अलावा, कार के बॉडी पैनल, दरवाजों के किनारों और वेल्डिंग स्पॉट्स को ध्यान से देखें. अगर किसी हिस्से के रंग में असमानता या नए पेंट की गंध आ रही है तो गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने की पूरी आशंका है.
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इंजन की स्थिति और ऑयल लीकेज
कार का बोनट खोलकर इंजन ब्लॉक के आसपास किसी भी तरह के तेल रिसाव या ग्रीस के जमाव की जांच करें. इसके बाद गाड़ी को स्टार्ट करके कम से कम 5 से 10 मिनट के लिए छोड़ दें. इस दौरान ध्यान से सुनें कि क्या इंजन से कोई असामान्य आवाज, खटखटाहट या अत्यधिक कंपन तो नहीं हो रहा है. साथ ही, टेस्ट ड्राइव के समय साइलेंसर से निकलने वाले धुएं पर भी नजर रखें. यदि धुआं गाढ़ा नीला या सफेद रंग का है, तो इसका सीधा मतलब है कि इंजन ऑयल जल रहा है और इंजन में जल्द ही भारी खर्च आने वाला है.
कानूनी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन
सरकार के आधिकारिक परिवहन पोर्टल या mParivahan ऐप पर जाकर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें. यहां से आपको कार के असली मालिक का नाम, चेसिस नंबर, इंजन नंबर और फिटनेस की सही अवधि की जानकारी मिल जाएगी. इसके साथ ही, यह सुनिश्चित कर लें कि गाड़ी पर कोई पुराना ट्रैफिक चालान पेंडिंग न हो, कार का PUC एक्टिव हो और इंश्योरेंस की वैलिडिटी समाप्त न हुई हो. इन सभी दस्तावेजों के मिलान के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं.
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