Automatic Car Challan: कार खुद चल रही है तो किसका होगा चालान, ऑटोमेटिक कारों के लिए कहां-क्या कानून?
Automatic Car Challan: ड्राइवरलेस तकनीक में ट्रैफिक नियम टूटने पर किसकी तय होगी जिम्मेदारी, जानिए भारत और वैश्विक स्तर पर ऑटोमैटिक कारों को लेकर क्या कहते हैं मौजूदा कानून और नियम

Automatic Car Challan: भारतीय सड़कों पर टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है. आज बाजार में ऐसी कारें मौजूद हैं, जो एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम से लैस हैं. ये कारें लेन बदलने से लेकर ऑटोमैटिक ब्रेकिंग तक, कई काम खुद कर सकती हैं. वहीं, वैश्विक स्तर पर ऐसी तकनीक भी आ चुकी है जहां ड्राइवर के बिना गाड़ी पूरी तरह खुद चलती है. लेकिन इस हाई-टेक दौर में एक बड़ा कानूनी सवाल खड़ा हो गया है- अगर कोई कार ऑटोमैटिक या बिना ड्राइवर के मोड में चल रही है और वह ट्रैफिक नियम तोड़ती है, तो चालान किसका कटेगा. गाड़ी चलाने वाले सॉफ्टवेयर का, कार बनाने वाली कंपनी का या फिर गाड़ी के मालिक का.
कानून की नजर में कौन है कसूरवार?
भारत में वर्तमान कानूनी व्यवस्था के अनुसार, गाड़ी चाहे मैन्युअल मोड में हो या पूरी तरह ऑटोमैटिक मोड पर, किसी भी ट्रैफिक उल्लंघन की स्थिति में चालान हमेशा वाहन के पंजीकृत मालिक के नाम पर ही जारी किया जाएगा.
भारतीय ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल और ई-चालान प्रणाली पर आधारित है. सड़कों पर लगे एएनपीआर कैमरे सिर्फ गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन करते हैं. कैमरे को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि स्टीयरिंग व्हील पर किसी इंसान का हाथ है या गाड़ी को कोई एआई सॉफ्टवेयर नियंत्रित कर रहा है. जैसे ही नियम टूटेगा, ई-चालान सीधे तौर पर वाहन मालिक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और पते पर भेज दिया जाएगा.
क्या कहता है भारत का मोटर व्हीकल एक्ट?
भारत में अभी गाड़ियों के संचालन के लिए मुख्य रूप से मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 प्रभावी है। इस कानून के तहत ड्राइवर की परिभाषा एक जीवित इंसान के रूप में की गई है. इस अधिनियम में फिलहाल ऐसी पूर्ण ऑटोनॉमस गाड़ियों के लिए कोई अलग से विशेष प्रावधान नहीं है, जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सड़क पर चल सकें.
कानूनी जानकारों के मुताबिक, मौजूदा नियमों के तहत गाड़ी से जुड़े किसी भी सिविल या क्रिमिनल लायबिलिटी के लिए शुरुआती तौर पर मालिक और इंस्योरेंस कंपनी को ही जवाबदेह माना जाता है. यदि गाड़ी में कोई तकनीकी खराबी आती है या सॉफ्टवेयर की गलती से कोई नियम टूटता है, तो मालिक को पहले चालान का भुगतान करना होगा या कोर्ट के समक्ष साक्ष्य पेश करके अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी. उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत मैन्युफैक्चरर पर बाद में कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस के रिकॉर्ड में पहली जिम्मेदारी मालिक की ही तय होती है.
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भारत में स्वायत्त वाहनों के लिए क्या हैं तैयारी?
भारत सरकार सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी बदलावों को अपना रही है. हाल ही में सरकार ने गाड़ियों में क्रैश-अवॉयडेंस और सेल्फ-ड्राइविंग प्रणालियों के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष रेडियो स्पेक्ट्रम को लाइसेंस मुक्त कर दिया है. इससे वाहन निर्माताओं के लिए भारत में एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स और ADAS लाना आसान हो गया है.
इसके अलावा, सरकार व्यावसायिक वाहनों के लिए भी ADAS और ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम को धीरे-धीरे अनिवार्य करने की दिशा में बढ़ रही है. हालांकि, अभी भी भारत में बिना ड्राइवर वाली पूर्ण रूप से स्वायत्त कारों को कमर्शियल तौर पर सार्वजनिक सड़कों पर चलाने की कानूनी अनुमति नहीं है.
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