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Narendra Modi ने Putin से क्यों कहा 'End of War'? भारत की कुंडली में छिपा है जवाब

SCO Summit 2026: PM मोदी ने Putin से End of War की बात क्यों कही? जानें रूसी तेल, चीन की चुनौती और 9-19 सितंबर के संभावित समझौते पर तीनों कुंडलियों का संकेत.

Modi Putin Meeting 2026: बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वाक्य बोला. उसकी गूंज युद्ध के मैदान से आगे तेल के बाजार तक सुनाई दे सकती है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सामने बैठे थे.

मोदी ने कहा कि दुनिया को 'endless war' से 'end of war' की ओर बढ़ना चाहिए. भारत लड़ाई रोकने की हर कोशिश में साथ देने को तैयार है.

यह संदेश जिस समय दिया गया, भारत की कुंडली में मंगल की महादशा और राहु की मुद्दा दशा चल रही थी. उधर पुतिन बुध-शुक्र-शुक्र की दशा में हैं. रूस गुरु-शनि-शनि की अवधि से गुजर रहा है.

तीनों कुंडलियों में अलग-अलग ग्रह सक्रिय हैं. मगर कहानी एक ही है. युद्ध, विदेशी समझौते, तेल और पैसा. इसलिए मोदी के शब्दों को केवल शांति की अपील मानना पर्याप्त नहीं होगा. भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी इस बयान के पीछे खड़ी दिखाई देती है.

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भारत की कुंडली में युद्ध और तेल एक जगह कैसे जुड़े?

भारत की स्वतंत्रता कुंडली 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि और नई दिल्ली के समय पर आधारित है. इसमें वृषभ लग्न है. फिलहाल मंगल की महादशा चल रही है. वृषभ लग्न में मंगल सातवें और बारहवें भाव का स्वामी होता है.

सातवां भाव दूसरे देशों, कूटनीतिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का है. बारहवां भाव विदेश से होने वाले आयात, भुगतान और देश से बाहर जाने वाले धन को दिखाता है.

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भारत की कुंडली में मंगल दूसरे भाव में बैठा है. दूसरा भाव राष्ट्रीय खजाने, बचत और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है. यही वह बिंदु है, जहां रूस-यूक्रेन युद्ध भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ जाता है.

युद्ध यूरोप में चल रहा है. लेकिन उसकी कीमत भारत को crude oil, महंगी shipping, insurance और कमजोर रुपये के रूप में चुकानी पड़ सकती है.

मंगल की महादशा में विदेश नीति का असर सीधे देश के खजाने पर पड़ना स्वाभाविक है. मोदी का 'End of War' संदेश इसी चिंता को भी सामने लाता है.

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राहु बता रहा, पूरी कहानी अभी सामने नहीं आई

15 अगस्त 2026 से बने भारत के वर्षफल में सिंह लग्न है. राहु विदेशी संबंधों के सातवें भाव में बैठा है. उसकी मुद्दा दशा 9 अक्टूबर तक चलेगी. राहु विदेशी हलचल बढ़ाता है. बड़े देशों के साथ अचानक समझौते करा सकता है. मगर वह शर्तों को पूरी तरह साफ नहीं रहने देता.

मोदी और पुतिन की मुलाकात में आर्थिक संबंधों पर बात हुई. युद्ध समाप्त करने की अपील भी सामने आई. लेकिन रूसी तेल की नई मात्रा, कीमत या discount पर कोई घोषणा नहीं हुई.

यह सातवें भाव के राहु के स्वभाव से मेल खाता है. मुलाकात सामने हुई. बयान भी सामने आया. मगर असली सौदेबाजी अभी कमरे के भीतर है.

भारत के वर्षफल का केतु भी लग्न में बैठा है. यह बताता है कि नई दिल्ली केवल तस्वीरों से संतुष्ट नहीं होगी. वह अपने हित को लेकर भीतर से आशंकित रहेगी. रूस से दोस्ती बनी रहेगी, लेकिन चीन की बढ़ती खरीद और मॉस्को की शर्तों पर नजर भी रखी जाएगी.

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गुरु-बुध क्या तेल का रास्ता खोल सकते हैं?

भारत के वर्षफल में गुरु और बुध बारहवें भाव में हैं. बारहवां भाव विदेशी भुगतान और आयात का है. गुरु कर्क राशि में उच्च का है. यह संकट के बीच आपूर्ति का वैकल्पिक रास्ता खुलने की संभावना बढ़ाता है. बुध कीमत, contract, shipping और payment mechanism से जुड़ा है.

दोनों का मेल बताता है कि भारत केवल कुछ अतिरिक्त oil cargo की मांग नहीं करेगा. बातचीत लंबी अवधि की व्यवस्था पर हो सकती है.

रुपये और रूबल में भुगतान. किसी तीसरी मुद्रा का इस्तेमाल. Shipping insurance की अलग व्यवस्था. या भारत के लिए रूसी crude की निश्चित मात्रा.

रास्ता निकल सकता है. मगर एक समस्या भी है. भारत के वर्षफल में शुक्र दूसरे भाव में नीच का है. दूसरा भाव सरकारी खजाने और कीमत का है. शुक्र की यह स्थिति बताती है कि तेल की आपूर्ति मिल जाने के बाद भी आर्थिक राहत पूरी तरह उपभोक्ता तक पहुंचना कठिन हो सकता है.

रूस से crude मिला तो supply crisis कम होगी. लेकिन पेट्रोल और डीजल तुरंत सस्ता हो जाए, यह जरूरी नहीं.

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पुतिन की कुंडली में क्यों महत्वपूर्ण है तेल?

पुतिन की उपलब्ध कुंडली 7 अक्टूबर 1952, सुबह 9:30 बजे और सेंट पीटर्सबर्ग की है. यह जन्म समय सार्वजनिक स्रोतों में निर्विवाद नहीं है. इसलिए इससे निकले निजी निष्कर्ष को सीमित संकेत माना जाना चाहिए.

इस कुंडली में तुला लग्न है. शुक्र लग्न और आठवें भाव का स्वामी होकर तुला राशि में बैठा है. मेदिनी ज्योतिष में आठवां भाव जमीन के नीचे मिलने वाली संपदा, तेल, गैस और गोपनीय आर्थिक हितों से जुड़ा माना जाता है.

पुतिन पर इस समय बुध महादशा, शुक्र अंतरदशा और शुक्र प्रत्यंतरदशा चल रही है. यह अवधि 8 अक्टूबर तक रहेगी.

बुध उनकी कुंडली में नौवें और बारहवें भाव का स्वामी है. वह बारहवें भाव में बैठा है. यह स्थिति विदेश, निर्यात, दूर के बाजार और वैकल्पिक payment system को सक्रिय करती है.

शुक्र का प्रभाव तेल तथा रूस के आर्थिक लाभ को केंद्र में लाता है. पुतिन भारत के लिए तेल का रास्ता बंद नहीं करना चाहेंगे. मगर वह बड़ी छूट केवल दोस्ती के नाम पर भी नहीं देंगे. उनकी कुंडली समझौता दिखाती है, रियायत नहीं.

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रूस 8 सितंबर तक क्यों नहीं खोलेगा पत्ते?

इस विश्लेषण में रूस की 12 जून 1990, दोपहर 1:41 बजे और मॉस्को वाली कुंडली ली गई है. इसमें कन्या लग्न है. गुरु चौथे और सातवें भाव का स्वामी होकर दसवें भाव में बैठा है. चौथा भाव जमीन और प्राकृतिक संसाधन दिखाता है. सातवां भाव विदेशी व्यापार का है. दसवां भाव सरकार तथा नीतिगत फैसलों से जुड़ा है.

रूस पर गुरु महादशा और शनि अंतरदशा चल रही है. शनि की प्रत्यंतरदशा 8 सितंबर तक है. गुरु तेल और प्राकृतिक संसाधनों को विदेशी समझौते के जरिए सरकारी नीति के केंद्र में लाता है. शनि उस समझौते को रोकता नहीं, लेकिन उस पर कड़ी शर्तें लगाता है.

कीमत पर मोलभाव लंबा चलता है. मात्रा नियंत्रित रखी जाती है. अंतिम घोषणा टलती है. इसलिए मोदी-पुतिन मुलाकात के बाद तेल पर तत्काल फैसला न आना ग्रहों के संकेत से मेल खाता है.

9 सितंबर के बाद क्या बदल सकता है?

8 सितंबर के बाद रूस की कुंडली में शनि की जगह बुध की प्रत्यंतरदशा शुरू होगी. बुध रूस की कन्या लग्न की कुंडली में लग्न और दसवें भाव का स्वामी है. वह नौवें भाव में बैठा है. नौवां भाव लंबी दूरी के व्यापार, नीति और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से जुड़ा है.

बुध contract, दस्तावेज और भुगतान का ग्रह भी है. इसलिए 9 सितंबर के बाद बातचीत के कागज तक पहुंचने की संभावना बढ़ती है. संयोग से पुतिन के वर्षफल में शुक्र की मुद्दा दशा 19 सितंबर तक है. पुतिन की जन्मकुंडली में बुध-शुक्र-शुक्र भी सक्रिय है.

भारत के वर्षफल में उच्च का गुरु और बुध आयात वाले बारहवें भाव में पहले से मौजूद हैं. तीनों कुंडलियां 9 से 19 सितंबर के बीच एक महत्वपूर्ण energy window बना रही हैं.

12 और 13 सितंबर को भारत में BRICS Summit होना है. मोदी ने पुतिन को इसके लिए आमंत्रित भी किया है. यही दो दिन तेल, व्यापार और भुगतान से जुड़े किसी framework के लिए सबसे महत्वपूर्ण हो सकते हैं.

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कुंडलियां किस तरह के समझौते की संभावना दिखाती हैं?

यह योग पेट्रोल की कीमत अचानक घटाने से अधिक supply security की ओर इशारा करता है. भारत और रूस के बीच इन मुद्दों पर प्रगति संभव है:-

  • रूसी crude की नियमित आपूर्ति
  • भारत के लिए निश्चित मात्रा सुरक्षित करना
  • लंबी अवधि का purchase contract
  • वैकल्पिक मुद्रा में भुगतान
  • Shipping और insurance की विशेष व्यवस्था

कुंडलियों की तुलनात्मक शक्ति के आधार पर 9 से 19 सितंबर के बीच किसी supply framework या energy assurance की संभावना लगभग 65 से 70 प्रतिशत मानी जा सकती है.

मगर पहले जैसी बड़ी छूट मिलने की संभावना करीब 35 से 40 प्रतिशत ही दिखाई देती है. ये प्रतिशत किसी आर्थिक मॉडल के आंकड़े नहीं हैं. ये ग्रह, भाव और दशाओं की तुलनात्मक शक्ति पर आधारित ज्योतिषीय अनुमान हैं.

चीन सबसे बड़ा पेंच क्यों है?

ईरान संकट के बाद चीन भी रूसी crude की खरीद बढ़ा रहा है. पुतिन के सामने भारत अकेला खरीदार नहीं है. रूस की कुंडली में शनि कीमत पर सख्ती दिखा रहा है. पुतिन की शुक्र अवधि अपना लाभ बचाने की ओर झुकी हुई है. भारत के वर्षफल का राहु भी सौदे में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका बढ़ाता है.

यह तीसरा पक्ष चीन हो सकता है. मॉस्को भारत और चीन की मांग को आमने-सामने रख सकता है. जो अधिक मात्रा उठाए, तेज भुगतान करे या लंबा contract दे, उसे बेहतर शर्त मिल सकती है.

इसलिए भारत को तेल मिलने की संभावना मजबूत है. अपनी मनचाही कीमत पर मिलने की संभावना उतनी मजबूत नहीं.

PM मोदी के 'End of War' का असली अर्थ

मोदी ने आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा कि वह तेल के लिए युद्ध समाप्त कराना चाहते हैं. दोनों बातों को सीधे जोड़ना गलत होगा. लेकिन आर्थिक रिश्ता साफ है. युद्ध घटा तो Russian oil की supply स्थिर हो सकती है. Shipping और payment का जोखिम कम हो सकता है. तेल प्रतिष्ठानों पर हमले रुके तो निर्यात बढ़ सकता है.

भारत को रूस से संबंध भी बनाए रखने हैं. पश्चिमी देशों के दबाव को भी संभालना है. चीन को रूसी तेल के बाजार पर हावी भी नहीं होने देना. घरेलू महंगाई से भी बचना है.

मोदी का 'End of War' संदेश इसी कठिन संतुलन का हिस्सा है. कुंडलियां बताती हैं कि पुतिन केवल मोदी की बात सुनकर नहीं रुकेंगे. 9 से 19 सितंबर के बीच रूस भारत के लिए तेल आपूर्ति, भुगतान या लंबे contract का रास्ता खोल सकता है.

हालांकि बड़ी छूट की उम्मीद कमजोर है. भारत को तेल मिल सकता है. मगर अपनी मनचाही कीमत पर नहीं.

बिश्केक में शब्द शांति के थे. पर उनका अगला अध्याय 12-13 सितंबर को भारत में लिखा जा सकता है. तब पता चलेगा कि पुतिन ने मोदी की अपील पर केवल सहमति जताई या रूसी तेल के कुछ पत्ते भी खोल दिए.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

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