भेड़ पालन से हर साल इतनी होती है कमाई, जान लीजिए कौनसी नस्ल है सबसे बेस्ट
Sheep Farming Tips: भेड़ पालन कम लागत में ताबड़तोड़ कमाई का बेहतरीन जरिया है. मुनाफे को कई गुना बढ़ाने के लिए इन नस्लों को पालना सबसे सही रहता है. जिनसे ऊन और मांस के जरिए बंपर रिटर्न मिलता है.

Sheep Farming Tips: कम लागत में बंपर मुनाफा कमाने के लिए पशुपालन हमेशा से ही किसानों का सबसे पसंदीदा जरिया रहा है. लेकिन अगर आप डेयरी फार्मिंग के झंझटों से बचकर एक ऐसा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं जिसमें देखरेख कम और कमाई ताबड़तोड़ हो तो भेड़ पालन आपके लिए फायदे का सबसे बड़ा जरिया हो सकता है. मार्केट में भेड़ों की ऊन, दूध और मांस की डिमांड हमेशा आसमान छूती रहती है.
सबसे अच्छी बात यह है कि इन्हें पालने के लिए आपको महंगे चारे पर पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती. ये खेतों में बची सूखी घास खाकर भी आसानी से सरवाइव कर लेती हैं. अगर सही प्लानिंग और बेस्ट नस्लों के साथ यह बिजनेस शुरू किया जाए. तो फिर हर साल लाखों रुपये का मुनाफा सीधे आपकी जेब में आएगा. जान लें इसके लिए बेस्ट नस्लें कौनसी हैं.
कम खर्च में सबसे टिकाऊ ऑप्शन ये नस्ल
अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां का मौसम थोड़ा सख्त है. तो मारवाड़ी नस्ल की भेड़ आपके लिए सबसे बेहतरीन चॉइस होगी. मूल रूप से राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र की होने के कारण इस नस्ल में बीमारियों से लड़ने की गजब की क्षमता होती है. इसके पैर मजबूत होते हैं जिससे यह लंबी दूरी तय कर सकती है और सूखे के हालात को भी आराम से झेल लेती है.
मारवाड़ी भेड़ से सालाना करीब एक से दो किलोग्राम तक बढ़िया क्वालिटी की सफेद ऊन मिलती है. जिसकी बाजार में बहुत अच्छी कीमत होती है. इसके अलावा, इस नस्ल के मेमने बहुत तेजी से बड़े होते हैं, जिससे मांस के कारोबार में भी किसानों को बहुत कम समय में मोटा रिटर्न मिल जाता है.
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पहाड़ी इलाकों के लिए वरदान बेस्ट ये नस्ल
हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे ठंडे और पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों के लिए गद्दी नस्ल की भेड़ें किसी लॉटरी से कम नहीं हैं. इस नस्ल की सबसे बड़ी खासियत इनकी पीठ पर उगने वाली घनी और बेहद मुलायम ऊन है. गद्दी भेड़ से मिलने वाली ऊन का इस्तेमाल मार्केट में महंगे और लग्जरी शॉल, कंबल और गर्म कपड़े बनाने के लिए किया जाता है.
जिसकी वजह से इसके दाम हमेशा ऊंचे रहते हैं. यह भेड़ साल में दो से तीन बार ऊन देती है. जिससे किसानों को रेगुलर इनकम होती रहती है. पहाड़ी रास्तों पर आसानी से चढ़ने-उतरने की क्षमता रखने वाली यह नस्ल बेहद शांत स्वभाव की होती है और कम चारे में भी बेहतरीन प्रोडक्शन देती है.
मीट बिजनेस के लिए ये नंबर वन
अगर आपका पूरा फोकस मीट के बिजनेस पर है. तो आपको बिना सोचे-समझे मालपुरा नस्ल की भेड़ों का चुनाव करना चाहिए. इस नस्ल की भेड़ें मुख्य रूप से राजस्थान के टोंक, जयपुर और सवाई माधोपुर के इलाकों में पाई जाती हैं. लेकिन अब पूरे देश में इनका पालन किया जा रहा है. मालपुरा नस्ल की भेड़ें शारीरिक रूप से काफी मजबूत और भारी-भरकम होती हैं.
जिससे इनका वजन बहुत तेजी से बढ़ता है. हालांकि इनसे मिलने वाली ऊन थोड़ी मोटी होती है जिसका इस्तेमाल कालीन बनाने में होता है. लेकिन मांस के बाजार में इस नस्ल के मेमनों की भारी डिमांड रहती है. इन्हें बेचकर किसान भाई हर साल बहुत ही तगड़ा मुनाफा कमाते हैं.
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