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Explained: PM मोदी के आश्वासन से नहीं मानेंगे 'कॉकरोच'! क्यों सिर्फ फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं रोक पाएगी CJP आंदोलन?

CJP Protest: CJP के मुताबिक, मुद्दा अब धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रहा. अब यह प्रधानमंत्री की जवाबदेही का सवाल बन गया है. जब तक सरकार CJP की मुख्य मांग नहीं मानती, तब तक यह आंदोलन खत्म नहीं होगा.

NEET पेपर लीक के खिलाफ 20 जून से शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब 34 दिन पूरे कर चुका है. सोनम वांगचुक का अनशन 25वें दिन में है. लेकिन आंदोलन का मूल मुद्दा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है, जिसका हल अब भी नहीं निकला है. आज तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ट्वीट कर के दखल दिया है, फिर भी मामला शआंत होता नहीं दिख रहा. आखिर यह एक पूरी पीढ़ी का विद्रोह है, जिसने देखा है कि उनका भविष्य बार-बार लीक हुए पेपरों और जवाबदेही से इनकार करने वाली सरकार के हाथों तबाह हो रहा है. तो क्या अब भी नहीं रुकेगा प्रदर्शन...

CJP आंदोलन की बात कहां अटकी है?

आंदोलन तीन मुख्य मांगों पर अटका हुआ है:

  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा  
  • NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए मुआवजा
  • शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी FIR वापस ली जाएं

CJP ने साफ कह दिया है, 'हम यहां तब तक रहेंगे जब तक धर्मेंद्र प्रधान को हटाया नहीं जाता.' सोनम वांगचुक ने भी स्पष्ट कर दिया कि जब तक छात्रों पर FIR वापस नहीं ली जातीं, वे अपना अनशन जारी रखेंगे.

इसके अलावा बातचीत की कोशिश भी अटक गई है. 22 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने CJP को बातचीत के लिए अपने आवास बुलाया था. CJP ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा, 'बातचीत जंतर-मंतर पर या किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए, मंत्री के घर नहीं.'

वहीं, 22 जुलाई को CJP प्रदर्शन में पुलिस क्रूरता के खिलाफ दायर याचिका पर CJI सूर्यकांत ने कहा, 'कृपया हमारा समय बर्बाद न करें और अपना भी न करें.'

CJP आंदोलन खत्म करने में रुकावटें कहां हैं?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तीन बड़ी रुकावटों की वजह से आंदोलन खत्म नहीं हो रहा है...

  • सरकार का बातचीत से इनकार: सरकार ने अब तक तीन बार बातचीत की कोशिश की है, लेकिन CJP की मुख्य मांग यानी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई चर्चा नहीं हुई है. CJP का कहना है, 'बातचीत तभी सार्थक होगी जब सरकार हमारी मांगों को स्वीकार करने के इरादे से आए.'
  • FIR और पुलिस कार्रवाई: 20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए और 70 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए. कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गईं. CJP की मांग है, 'सरकार गारंटी दे कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नई FIR नहीं होगी और पुरानी वापस ली जाएंगी.'
  • मेट्रो स्टेशन बंद, इंटरनेट ठप: 23 जुलाई को राजीव चौक, सेंट्रल सचिवालय, ITO और खान मार्केट समेत 16 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए हैं. इससे प्रदर्शनकारियों और आम जनता दोनों को परेशानी हुई है.

सोनम वांगचुक ने कहा, 'अगर ऐसा आश्वासन मिलता है, तो मैं अपना अनशन समाप्त कर दूंगा और छात्रों से आंदोलन रोकने और सरकार के साथ बातचीत में शामिल होने की अपील करूंगा. ऐसे आश्वासन के बाद मैं अपना अनशन अनिश्चित काल तक जारी रखने को मजबूर हूं.'

लेकिन CJP नेता अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया, 'हम अपना विरोध तब तक नहीं रोकेंगे जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते. 25 दिन हो गए हैं. अगर 25 महीने लगें, तो भी मंजूर है, लेकिन हम यहां से नहीं हटेंगे.'

PM मोदी के दखल से भी असर क्यों नहीं?

23 जुलाई 2026 को PM मोदी ने X पर पोस्ट कर कहा, 'हमने पेपर लीक में शामिल लोगों को फौरन और कड़ी सजा देने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का फैसला किया है. हमारे युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.'

फास्ट-ट्रैक कोर्ट का ऐलान सरकार की ओर से राहत का संकेत जरूर है, लेकिन यह CJP की मांगों का जवाब नहीं है. अब एक्सपर्ट्स से समझें PM मोदी के दखल से हल न निकलने की 4 बड़ी वजहें:

  • CJP की मांग इस्तीफा है, फास्ट-ट्रैक कोर्ट नहीं: PM मोदी के ऐलान के कुछ ही मिनटों बाद CJP ने सीधा जवाब दिया, 'धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए.' CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, 'जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, मुद्दा अब धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रहा. लोगों का गुस्सा अब सीधे प्रधानमंत्री पर भी केंद्रित हो रहा है.'
  • फास्ट-ट्रैक कोर्ट सिस्टम बदलता है, जवाबदेही नहीं: फास्ट-ट्रैक कोर्ट से पेपर लीक करने वालों को सजा तो हो सकती है, लेकिन उस व्यवस्था को जवाबदेह कौन ठहराएगा जो बार-बार विफल हो रही है? यही CJP का मूल सवाल है.
  • प्रदर्शनकारियों का भरोसा टूट चुका: 20 जुलाई को पुलिस लाठीचार्ज और 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने जैसी घटनाओं ने प्रदर्शनकारियों का सरकार पर भरोसा खत्म कर दिया है. अब 'सरकार से बातचीत' का कोई भी आश्वासन उन्हें 'झांसा' लगता है.
  • आंदोलन अब PM तक पहुंच चुका: रांका ने साफ कहा, 'लोग अब सीधे प्रधानमंत्री से सवाल पूछने लगे हैं कि वह उनकी बात सुनने को तैयार क्यों नहीं हैं.' यानी अब आंदोलन शिक्षा मंत्री से बढ़कर प्रधानमंत्री की जवाबदेही तक पहुंच गया है.

तो क्या इसके बावजूद आंदोलन नहीं रुकेगा?

बात वहीं अटकी है जहां से शुरू हुई थी. CJP धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहती है और सरकार उसे देने को तैयार नहीं है. PM मोदी का फास्ट-ट्रैक कोर्ट का ऐलान एक कदम है, लेकिन वह कदम गलत दिशा में है. CJP ने पहले ही साफ कर दिया कि हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना नहीं हटेंगे. अब जब तक ऐसा नहीं होता, कोई भी फास्ट ट्रैक कोर्ट या बातचीत से नतीजा नहीं निकलेगा.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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