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गोबर से बनाएं ऑर्गेनिक खाद, देखते ही देखते जेब में आने लगेंगे लाखों, जानें पूरा गणित

Organic Fertilizer Making Tips: गोबर, सूखी घास और हरी पत्तियों के इस्तेमाल से महज 18 दिनों में शिवांश ऑर्गेनिक खाद तैयार हो जाती है. यह खाद मिट्टी को दमदार बनाती है और सालाना लाखों का मुनाफा देती है.

Organic Fertilizer Making Tips: खेती-किसानी में आजकल जैविक यानी ऑर्गेनिक खाद की डिमांड जिस कदर बढ़ी है, उसने कमाई के नए रास्ते खोल दिए हैं. लोग अब अपनी फसलों में अंधाधुंध केमिकल डालने के बजाय नेचुरल विकल्पों की तरफ लौट रहे हैं और इसी का फायदा उठाकर घर बैठे तगड़ा बिजनेस खड़ा किया जा सकता है. इसके लिए शिवांश ऑर्गेनिक खाद बनाने का एक ऐसा नायाब और बेहद आसान तरीका सामने आया है. 

जिससे महज 18 दिनों में बेहतरीन क्वालिटी की खाद तैयार हो जाती है. सबसे मजेदार बात यह है कि इस खाद को बनाने में किसी बड़ी मशीन या महंगी तकनीक की जरूरत नहीं पड़ती. बस गोबर, सूखी घास और हरी पत्तियों के सही कॉम्बिनेशन से यह खाद तैयार हो जाती है. जो किसानों के लिए कमाई का सबसे बेस्ट और सीधा जरिया बनती जा रही है.

गोबर और पत्तों से ऐसे बनाएं खाद

इस खास तरीके में खाद बनाने का पूरा खेल लेयरिंग यानी परतों पर टिका है. इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले सूखी घास-फूस, पुआल या पेड़ों की सूखी पत्तियों की एक परत बिछाई जाती है. जिसके ठीक ऊपर हरी पत्तियां या खेत का गीला कचरा डाला जाता है. इसके बाद इस पर ताजा गोबर और पानी का गाढ़ा घोल अच्छे से फैला दिया जाता है. 

इसी तरह एक के ऊपर एक कुल 18 से 20 परतें तैयार की जाती हैं जिससे करीब 4 फीट ऊंची एक ढेरी बन जाती है. इसके बाद हर चौथे दिन इस पूरे ढेर को ऊपर से नीचे अच्छी तरह पलटना होता है ताकि हवा और नमी का बैलेंस बना रहे. बस हर चार दिन पर इसकी कसरत करने से महज 18 दिनों में यह पूरी तरह सड़कर काले सोने जैसी कीमती खाद में बदल जाती है.

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कम लागत में लाखों की कमाई 

इस बिजनेस को शुरू करने में लागत नाममात्र की आती है. क्योंकि इसका सारा कच्चा माल जैसे गोबर, सूखी पत्तियां और घास गांव-देहात में मुफ्त या बेहद कम दामों में आसानी से मिल जाते हैं. एक यूनिट खाद तैयार करने में जहां सिर्फ 15 से 20 हजार रुपये का शुरुआती खर्च आता है, वहीं जब यह मार्केट में बिकने के लिए तैयार होती है तो इसकी वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है. 

इस आसान से तरीके को अपनाकर आज के समय में सालाना 9 लाख रुपये तक का बंपर मुनाफा सीधे अपनी जेब में डाला जा सकता है. बड़ी बात यह है कि यह खाद न सिर्फ मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है. बल्कि पानी सोखने की क्षमता को भी दुरुस्त रखती है. इसी वजह से बाजारों में इसकी पूछ-परख बहुत ज्यादा है और यह किसानों को मालामाल कर रही है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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