30 साल के हैं तो कितना लगेगा प्रीमियम, जानें सैलरी के हिसाब से टर्म इंश्योरेंस
Term Insurance Policy: 30 की उम्र में टर्म इंश्योरेंस लेते समय प्रीमियम कई बातों पर निर्भर करता है. सही प्लान और कवर चुनना जरूरी है. जिससे फ्यूचर सेफ रहे.

Term Insurance Policy: टर्म इंश्योरेंस असल में आपके परिवार की फाइनेंशियल सेफ्टी नेट है. कम प्रीमियम में बड़ा कवर मिलता है और अनहोनी होने पर परिवार को एकमुश्त रकम मिलती है, जिससे घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और लोन जैसी जिम्मेदारियां संभाली जा सकें. इसमें सेफ्टी के साथ टैक्स बेनिफिट भी मिलते हैं. जिससे यह प्लान और किफायती बन जाता है.अब अगर उम्र की बात करें.
तो 30 साल इस प्लान की शुरुआत के लिए सबसे बेहतर समय माना जाता है. इस दौर में जिम्मेदारियां बढ़ रही होती हैं. लेकिन हेल्थ प्रोफाइल आमतौर पर मजबूत रहता है. इसलिए प्रीमियम कम आता है. जल्दी पॉलिसी लेने का सीधा फायदा यह है कि लंबे समय तक कम दर पर कवर लॉक हो जाता है. जान लें इस उम्र में टर्म इंश्योरेंस के लिए कितना प्रीमियम देना होगा.
सैलरी के हिसाब से कितना कवर जरूरी?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स आमतौर पर सलाह देते हैं कि टर्म इंश्योरेंस कवर आपकी सालाना इनकम का कम से कम 10 से 15 गुना होना चाहिए. अगर आपकी सालाना सैलरी 6 लाख रुपये है. तो करीब 60 से 90 लाख रुपये का कवर बेसिक सेफ्टी दे सकता है. 10 लाख रुपये सालाना कमाने वालों के लिए 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये का कवर समझदारी भरा ऑप्शन हो सकता है.
यह रकम परिवार के खर्च, लोन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की जानी चाहिए. 30 की उम्र में 1 करोड़ रुपये का कवर लेने पर सालाना प्रीमियम लगभग 8 हजार से 15 हजार रुपये के बीच हो सकता है. बशर्ते हेल्थ नॉर्मल हो और स्मोकिंग हैबिट न हो. स्मोकर्स के लिए यही प्रीमियम ज्यादा हो सकता है.
प्रीमियम किन बातों से तय होता है?
टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम सिर्फ सैलरी से तय नहीं होता. आपकी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, फैमिली हेल्थ रिकॉर्ड, जॉब प्रोफाइल और लाइफस्टाइल भी अहम रोल निभाते हैं. 30 साल की उम्र में अगर आप फिट हैं और कोई गंभीर बीमारी नहीं है तो कंपनियां कम रेट ऑफर करती हैं. पॉलिसी टर्म भी मायने रखती है. 60 साल तक का कवर चुनने पर प्रीमियम कम रहेगा.
जबकि 70 या 75 साल तक की अवधि लेने पर रकम बढ़ सकती है. इसके अलावा मंथली, क्वार्टरली या सालाना पेमेंट मोड भी प्रीमियम प्रभावित करता है. ऑनलाइन पॉलिसी लेने पर अक्सर प्रीमियम थोड़ा कम पड़ता है. क्योंकि बीच में एजेंट कमीशन नहीं जुड़ता. सही तुलना करके पॉलिसी चुनना लंबी अवधि में बड़ा फर्क डाल सकता है.
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Source: IOCL
























