'खुद को भाग्यशाली समझो कि केरल में हो', वायरल कुंभ गर्ल मोनालिसा के मुस्लिम पति को लेकर क्यों ऐसा बोला HC?
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि विवाह की वैधता पर ही सवाल है, क्योंकि शादी हिंदू रीति-रिवाजों से संपन्न हुई जबकि दूल्हा मुस्लिम है.

प्रयागराज कुंभ मेले से चर्चाओं में आई मोनालिसा भोसले और उनके पति मोहम्मद फरमान खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उनसे कहा कि खुद को भाग्यशाली समझें कि वह केरल में हैं. मंगलवार (2 जून, 2026) को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. यह मामला इंटर रिलीजन मैरिज, उम्र संबंधी विवाद और अपहरण के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की और मामले में आदेश बुधवार को सुनाया जा सकता है. सुनवाई के दौरान जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह को लेकर मध्य प्रदेश में धमकियों का सामना कर रहे कपल केरल में होने के लिए खुद को भाग्यशाली समझें. इस पर मोनालिसा और उनके पति के वकील ने कहा, 'यही वजह है कि हम आज जीवित हैं.'
मोनालिसा भोसले 2025 के प्रयागराज कुंभ मेले में मनकों की मालाएं बेचते हुए वायरल वीडियो के कारण देशभर में चर्चित हुई थी. इसी वर्ष उन्होंने फरमान खान से केरल में शादी कर ली थी. बाद में उनकी शादी विवादों में घिर गई. आरोप लगाया गया कि शादी के समय मोनालिसा बालिग नहीं थी. कपल की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट एम. ससींद्रन ने कोर्ट में कहा कि कुछ कट्टरपंथी समूह और मध्य प्रदेश प्रशासन के कुछ अधिकारी मोनालिसा को नाबालिग साबित कर विवाह को अमान्य ठहराने की कोशिश कर रहे हैं. उनका दावा है कि विवाह के समय मोनालिसा बालिग थी और बाद में सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की गई.
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि विवाह की वैधता पर ही सवाल है, क्योंकि शादी हिंदू रीति-रिवाजों से संपन्न हुई जबकि दूल्हा मुस्लिम है. राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि मोनालिसा की वास्तविक जन्मतिथि दिसंबर 2009 है, जिसके अनुसार विवाह के समय वह नाबालिग थी. ऐसे में बाल संरक्षण कानूनों के प्रावधान लागू हो सकते हैं.
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सरकार ने यह भी कहा कि फरमान खान के खिलाफ दर्ज अपहरण मामले में जालसाजी से जुड़े आरोप भी जोड़े जा सकते हैं. आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र और विवाह प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया. हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार के कुछ तर्कों पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि पीड़िता ने खुद अपने पति के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है.
मामले ने इसलिए भी व्यापक ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि इसके समानांतर केरल और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में कानूनी कार्यवाही चल रही है. इस बीच, तिरुवनंतपुरम की एक पॉक्सो कोर्ट में दायर निजी शिकायत में फरमान खान के अलावा एम.वी. गोविंदन, वी. शिवनकुट्टी और ए.ए. रहीम समेत कई वामपंथी नेताओं पर विवाह कराने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है.
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