कुर्सी के चक्कर में थमे सुपरफास्ट ट्रेन के पहिए, गोरखपुर में अटकी रही वैशाली एक्सप्रेस
Indian Railway: ट्रेन लेट होने की वजह आमतौर पर सिग्नल या ट्रैक होती है, लेकिन गोरखपुर में मामला कुछ अलग था. यहां पर एक कुर्सी की कमी के चलते ट्रेन 1 घंटे 9 मिनट लेट हो गई. जानिए पूरा मामला.

Train Delay News: ट्रेन से सफर करते हैं तो जानते होंगे कि कई बार किसी कारणवश ट्रेन लेट हो जाती है. इसकी जानकारी भी रेलवे अपने यात्रियों को देता है, ताकि उनको परेशानी न हो. लेकिन अगर ट्रेन लेट होने की वजह एक कुर्सी हो तो हर कोई जानकर हैरान हो सकता है. ऐसा ही मामला एक सामने आया है, गोरखपुर में एक कुर्सी की वजह से वैशाली एक्सप्रेस को रोकना पड़ा. ऐसे में अब लोगों के मन में सवाल आएगा कि आखिर एक कुर्सी की वजह से ट्रेन को क्यों रोकना पड़ा?
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, नई दिल्ली-ललितग्राम वैशाली एक्सप्रेस जब गोरखपुर जंक्शन पहुंची. यहां ट्रेन का चार्ज संभालने वाले मैनेजर ने गार्ड कोच की जांच की उन्हें वहां पर बैठने के लिए निर्धारित कुर्सी नहीं मिली. मैनेजर ने इसकी जानकारी तुरंत स्टेशन अधिकारियों को दी, जिसके बाद ट्रेन मैनेजर ने कुछ ऐसा फैसला किया, जिसे जानकर हर कोई हैरान रह गया.
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आगे क्या हुआ?
इस बात की जानकारी देने के बाद मैनेजर ने कुर्सी की व्यवस्था होने तक ट्रेन को आगे ले जाने से मना कर दिया. इतना ही नहीं, बल्कि कोच की तस्वीरें लेकर रेलवे कंट्रोल अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी.
गोरखपुर से कब होनी थी रवाना?
गोरखपुर से ट्रेन के रवाना होने का समय 9 बजकर 27 मिनट था, लेकिन कुर्सी की कमी के कारण यह 10 बजकर 36 मिनट पर रवाना हुई. यानी ट्रेन को गोरखपुर से निकलने में 1 घंटे 9 मिनट की देरी हुई. हालांकि, ट्रेन मैनेजर को देवरिया सदर स्टेशन पर कुर्सी उपलब्ध कराई गई.
पहले से ही 31 मिनट लेट थी ट्रेन
बता दें कि रेलवे के रिकॉर्ड के मुताबिक, ट्रेन को सबुह 9 बजकर 17 मिनट पर गोरखपुर पहुंचना था, लेकिन ट्रेन 9 बजकर 48 मिनट पर पहुंची. यानी ट्रेन पहले से ही 31 मिनट लेट थी और कुर्सी न होने की वजह से ट्रेन और ज्यादा लेट हो गई.
कौन-कौन सी सुविधाएं होती हैं गार्ड कोच में?
ट्रेन मैनेजर के लिए कुछ जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होती है जैसे...
- सबसे पहले लोको पायलट और स्टेशन स्टाफ से संपर्क करने के लिए वॉकी-टॉकी.
- वहीं बैठने के लिए कुर्सी और टेबल भी उपलब्ध होता है
- साथ ही इमरजेंसी के लिए फ्लैशर लाइट भी होती है.
- इसके अलावा ट्रेन संचालन के दौरान सिग्नल देने के लिए लाल-हरी झंडी होती है.
- जरूरत के समय के लिए फर्स्ट-एड बॉक्स भी उपलब्ध होता है.
- इन सभी के अलावा भी कई चीजें उपलब्ध होती है.
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