PPF Investment: सुरक्षा जरूरी, लेकिन क्या यह आपके लिए है बेहतर? जानिए पूरा सच
जैसे ही नया वित्त वर्ष शुरू होता है, वैसे ही निवेश को लेकर अपनी प्लानिंग पर फिर से विचार करने की जरूरत होती है. पीपीएफ जैसे निवेश विकल्पों को लेकर भी लोगों के मन में संशय हो सकता है.

- पीपीएफ सरकार समर्थित, बाजार जोखिम से सुरक्षित, निश्चित रिटर्न देता है।
- निवेश, ब्याज, मैच्योरिटी पर कर-मुक्त आय, ईईई श्रेणी का लाभ।
- वर्तमान 7.1% ब्याज दर महंगाई से मुकाबला करने में सीमित है।
- 15 साल का लॉक-इन, ₹1.5 लाख की निवेश सीमा प्रमुख चुनौतियां हैं।
PPF Pros and Cons: जैसे ही नया वित्त वर्ष शुरू होता है, वैसे ही निवेश को लेकर अपनी प्लानिंग पर फिर से विचार करने की जरूरत होती है. खासकर पब्लिक पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) जैसे पुराने और भरोसेमंद विकल्प को लेकर अब कई लोग यह समझना चाहते हैं कि बदलते समय में यह आज भी उतना ही फायदेमंद है या नहीं? आइए जानते हैं, इस विषय में...
आखिर क्यों हैं यह लोगों की पसंद?
लंबे समय से निवेशकों के बीच Public Provident Fund को एक भरोसेमंद निवेश विकल्प के तौर पर देखा जाता रहा है. इसका बड़ा कारण यह है कि यह सरकार द्वारा समर्थित होती है.
इसलिए इसमें बाजार की उठापटक का असर नहीं पड़ता. साथ ही निवेशकों को फिक्स रिटर्न मिलता हैं. साथ ही यह स्कीम EEE श्रेणी में आती है. यानी इसमें निवेश, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों पर टैक्स नहीं लगता है. यही कारण है कि, लोग आज भी पीपीएफ पर भरोसा बनाए हुए हैं.
महंगाई के मुकाबले में सीमित रिटर्न
भले ही पीपीएफ पर इस समय करीब 7.1 फीसदी का ब्याज मिल रहा है. लेकिन तेजी से बढ़ रही महंगाई को देखते हुए अगर मिलने वाला रिटर्न महंगाई के बराबर है तो निवेशकों के लिए उतना फायदा नहीं बनता है. हालांकि, सुरक्षित निवेश होना पीपीएफ को अभी भी लोकप्रिय बनाए हुए है.
लॉक-इन और लिमिट से जुड़ी दिक्कत
कई निवेशकों के लिए Public Provident Fund में निवेश करते समय लिक्विडिटी एक बड़ी चुनौती बन सकती है. क्योंकि इसमें 15 साल का लंबा लॉक-इन पीरियड होता है. साथ ही जरूरत पड़ने पर पैसा तुरंत निकालना आसान नहीं होता. इसके अलावा, सालाना निवेश की अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये तय है. ज्यादा निवेश करने वालों के लिए यह रकम कम हो सकती है.
इसके अलावा निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड और एसआईपी जैसे विकल्प भी तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं. हालांकि, इनमें निवेश करने पर रिटर्न के साथ-साथ जोखिम का खतरा भी अधिक होता है.
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