TMC के 20 बागियों की बढ़ने वाली है टेंशन! ममता बनर्जी ने लिया बड़ा फैसला
TMC अपने बागी लोकसभा सांसदों के पार्टी छोड़कर NCPI ज्वाइन करने को लेकर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है. TMC ने सबसे पहले जून में स्पीकर ओम बिरला के सामने यह मुद्दा उठाया था.

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 20 बागी लोकसभा सांसदों पर बड़ा फैसला लिया है. ममता पार्टी छोड़कर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑ इंडिया' (NCPI) ज्वाइन करने को लेकर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती हैं.
सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि अब उनके खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं अगले 7 से 10 दिनों में दायर की जाएंगी. यह कदम TMC नेता अभिषेक बनर्जी की स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के एक दिन बाद उठाया गया है.
स्पीकर के सामने उठा चुके हैं मुद्दा
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों के खिलाफ दायर अलग-अलग अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की थी. उन्होंने बुधवार को कहा था कि अगर स्पीकर कानून और अदालती निर्देशों के तहत तय समय में याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं ले पाते हैं, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा और दखल की मांग करनी होगी.
TMC ने सबसे पहले जून में बिरला के सामने यह मुद्दा उठाया था, जब उन्होंने 20 सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं. बनर्जी ने बुधवार को बताया कि 20 जुलाई को मॉनसून सत्र शुरू होने पर उन्होंने स्पीकर के सामने यह मामला फिर से उठाया था. अभिषेक बनर्जी ने TMC के सीनियर सांसदों सौगत रॉय, कीर्ति आजाद और प्रतिमा मंडल के साथ मिलकर स्पीकर से इस बारे में बात की थी. बार-बार गुहार लगाने के बावजूद मॉनसून सत्र के दौरान कोई फैसला नहीं लिया गया और सत्र गुरुवार को खत्म हो गया.
TMC की हार के बाद 20 सांसदों ने की बगावत
बता दें कि बंगाल चुनाव में TMC की हार के बाद 20 सांसदों ने पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी थी. इसके बाद उन्होंने BJP के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देते हुए NCPI में विलय की घोषणा की. बागी गुट में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय और मिताली बाग जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं. वे मूल रूप से TMC के चुनाव चिह्न पर लोकसभा के लिए चुने गए थे. उनका तर्क है कि वे TMC के 28 लोकसभा सदस्यों की कुल संख्या का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा हैं.
क्या कहता है संविधान
संविधान की 10वीं अनुसूची में अयोग्यता से छूट का प्रावधान है, जब किसी राजनीतिक दल के दो-तिहाई सदस्य किसी दूसरे दल में विलय करने पर सहमत होते हैं. TMC ने इसकी वैधता को चुनौती दी है और कहा है कि सांसद केवल किसी दूसरे दल के साथ विलय की घोषणा करके अयोग्यता से नहीं बच सकते. 10वीं अनुसूची के तहत स्पीकर ही यह तय करने के लिए अधिकृत है कि क्या कोई सदस्य दल-बदल के आधार पर अयोग्य हो गया है या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसी याचिकाओं पर फैसला करते समय स्पीकर न्यायिक या ट्रिब्यूनल जैसा काम करता है और उसके फैसले की न्यायिक समीक्षा हो सकती है. इसके बाद शीर्ष अदालत ने फिर से कहा है कि अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर सबसे पहले फैसला लेने के लिए स्पीकर ही सही संवैधानिक अधिकारी है, लेकिन उसे निष्पक्ष, स्वतंत्र और बिना किसी भेदभाव के काम करना चाहिए.
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