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गमले में अदरक उगाना सीखें, बाजार से नहीं लाना पड़ेगा

Ginger Cultivation At Home: घर में ही ताजा और ऑर्गेनिक अदरक उगाने का क्या है आसान तरीका? गमले की मिट्टी से लेकर किस तरह होगी देखभाल जान लें पूरी डिटेल.

Ginger Cultivation At Home:  अदरक ऐसी चीज है जो लगभग हर रसोई में काम आती है. चाय हो, सब्जी हो या फिर मसालेदार खाना, ताजा अदरक का इस्तेमाल अक्सर होता है. अगर आपके घर में थोड़ी जगह है तो इसे गमले में भी उगाया जा सकता है. इसके लिए बहुत बड़े गार्डन या खेत की जरूरत नहीं पड़ती. घर में रखा अदरक भी सही तरीके से लगाया जाए तो उससे नया पौधा तैयार हो सकता है. खास बात यह है कि अदरक बीज से नहीं बल्कि उसकी गांठ यानी राइजोम से तैयार होता है. 

इसलिए ऐसी गांठ चुननी चाहिए जिसमें छोटी छोटी कलियां या आंखें दिखाई दे रही हों. यही कलियां आगे चलकर नए पौधे की शूट बनाती हैं. गमले में अदरक लगाने के लिए मिट्टी भुरभुरी और पानी की अच्छी निकासी वाली होनी चाहिए. सही गमला, मिट्टी, नमी और हल्की धूप का ध्यान रखा जाए तो बालकनी या छत पर भी ताजा अदरक उगाई जा सकती है.

अदरक की गांठ से ऐसे तैयार करें पौधा

अदरक को घर के गमले में उगाने के लिए सबसे पहले ऐसी अदरक चुनें जो ताजी, मोटी और स्वस्थ हो. उस पर छोटी छोटी उभरी हुई कलियां नजर आनी चाहिए. अगर अदरक सिकुड़ी हुई है बहुत नरम है या उस पर फफूंद लगी है तो उसका इस्तेमाल न करें. एक गांठ को छोटे टुकड़ों में काट सकते हैं. लेकिन हर टुकड़े में कम से कम एक दो स्वस्थ कलियां जरूर रहनी चाहिए.

अदरक के टुकड़े को सीधे मिट्टी में लगाने के बजाय कुछ घंटे पानी में भिगोकर रखना भी सही हो सकता है. इससे गांठ में नमी आती है और कलियों के एक्टिव होने में मदद मिल सकती है. इसके बाद गमले को तैयार करें. गमला बहुत संकरा और गहरा होने के बजाय चौड़ा होना बेहतर है. क्योंकि अदरक की गांठ मिट्टी के अंदर नीचे जाने की जगह आसपास फैलती है. गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर होने चाहिए.


गमले में अदरक उगाना सीखें, बाजार से नहीं लाना पड़ेगा

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मिट्टी और पानी का रखें सही संतुलन

अदरक को ऐसी मिट्टी पसंद आती है जो नमी बनाए रखे लेकिन पानी को रोककर न रखे. गमले में सामान्य मिट्टी के साथ अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद और कोकोपीट या थोड़ी रेत मिलाई जा सकती है. इससे मिट्टी हल्की और भुरभुरी बनी रहती है. गांठ को मिट्टी में बहुत ज्यादा गहराई तक दबाने की जरूरत नहीं होती. इसे करीब 2 से 5 सेंटीमीटर गहराई पर कलियों को ऊपर की तरफ रखते हुए लगाया जा सकता है.

गांठ लगाने के बाद हल्का पानी दें. शुरुआत में मिट्टी को लगातार पानी से भिगोकर रखना ठीक नहीं है. जब मिट्टी की ऊपरी परत हल्की सूखी लगे तो पानी दें. पौधा निकलने के बाद नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन गमले में पानी जमा नहीं होना चाहिए. ज्यादा पानी से अदरक की गांठ सड़ सकती है. इसी तरह मिट्टी पूरी तरह सूख जाने पर भी पौधे की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. इसलिए पानी देने का सबसे अच्छा तरीका मिट्टी की नमी देखकर तय करना है.

ऐसे करें देखभाल

अदरक को तेज दोपहर की सीधी धूप से बचाना बेहतर रहता है. गमले को ऐसी जगह रखें जहां अच्छी रोशनी मिले और सुबह की हल्की धूप पहुंच सके. बहुत तेज गर्मी में पत्तियों पर सीधी धूप पड़ने से पौधा कमजोर हो सकता है. पौधे की बढ़वार के दौरान मिट्टी में जैविक खाद या वर्मी कंपोस्ट की थोड़ी मात्रा समय समय पर दी जा सकती है.

 इससे पौधे को जरूरी पोषण मिलता रहेगा.अदरक का पौधा धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ता है और उसकी असली गांठ मिट्टी के अंदर तैयार होती रहती है. इसलिए ऊपर दिखाई देने वाले पौधे को देखकर यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि नीचे कितनी अदरक तैयार हो चुकी है. 

अच्छी देखभाल के साथ अदरक को कई महीनों तक बढ़ने दिया जाता है. जब पत्तियां पीली पड़ने लगें और पौधे की बढ़वार कम हो जाए तो गांठ निकालने का समय करीब आ सकता है.घर पर उगाई गई अदरक की सबसे अच्छी बात यह है कि जरूरत के हिसाब से इसे इस्तेमाल किया जा सकता है. अपनी रसोई के लिए ताजा अदरक उगाने का यह आसान तरीका है.


गमले में अदरक उगाना सीखें, बाजार से नहीं लाना पड़ेगा

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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