40 या 50 की उम्र वाले भी ध्यान दें! देर से रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करने का सही फॉर्मूला जानें
Retirement Planning: अगर आपने रिटायरमेंट की तैयारी देर से शुरू की है, तब भी सही निवेश और समझदारी भरी फाइनेंशियल प्लानिंग से भविष्य सुरक्षित बनाया जा सकता है. जानिए कैसे?

- सुरक्षा के साथ इक्विटी और डेट फंड में निवेश करें।
Retirement Planning: आजकल की भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में समय कैसे निकल जाता है पता ही नहीं चलता. जवानी के दिनों में लोग परिवार के खर्चों, करियर, बच्चों की पढ़ाई की फीस और घर के लोन (EMI) को चुकाने में व्यस्त रहते हैं आगे का कुछ इसी चक्कर में नहीं सोच पाते. जब वो 40 या 50 के दशक में पहुंचकर ही रिटायरमेंट की प्लानिंग शुरू कर पाते हैं. अच्छी बात यह है कि अगर आपने देर से भी शुरुआत की है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपके पास पैसों की कमी रहेगी. सही और समझदारी भरे तरीकों से आप देर से भी अच्छी तैयारी कर सकते हैं.
रिटायरमेंट की तैयारी का सबसे पहला कदम ये है कि आप ठीक से हिसाब लगाए बढ़ती महंगाई और बीमारी या इलाज के खर्चों के कारण आपके खर्च बढ़ भी सकते हैं.अक्सर लोगों के खर्च का हिसाब इन बातों को ध्यान में रख कर होते है..
- रहने का खर्च (Housing cost)
- खाने-पीने का खर्च
- बिजली, पानी और अन्य बिल (Utilities)
- इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम
- घूमने-फिरने का प्लान (Holiday plans)
- मेडिकल और इलाज का खर्च.
फालतू के खर्चों को आज ही करें बंद
आपको अपने महीने के कुछ अनावश्यक खर्च बंद करना चाहिए जैसे सब्सक्रिप्शन या फालतू के शौक बंद करके पैसे बचाएं और उन्हें निवेश करें. इसके अलावा अपने सभी कर्ज रिटायरमेंट से पहले चूका दें. क्योंकि इससे आपकी बची-कुची इनकम EMI चुकाने में ही चली जाएगी. ज्यादा ब्याज वाले कर्ज जैसे क्रेडिट कार्ड का बिल या पर्सनल लोन को सबसे पहले खत्म करें. कर्ज कम होने से आपके ऊपर मानसिक दबाव कम होगा और रिटायरमेंट के बाद आपकी जो भी कमाई होगी, उससे आप अपने खर्चे आसानी से उठा पाएंगे.
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कमाई के अतिरिक्त स्रोत बनाना भी है जरूरी
हालांकि, आपने देर से शुरुआत की है इसलिए आपको सही तरीका भी अपनाना होगा. एक बैलेंस स्ट्रेटजी (संतुलित तरीका) अपनाएं. पैसों को बढ़ाने के लिए इक्विटी (शेयर बाजार/म्यूचुअल फंड) में निवेश करें और सुरक्षा के लिए डेट फंड (कम जोखिम वाले ऑप्शन) में पैसा लगाएं.अपने जोखिम उठाने की क्षमता और रिटायरमेंट के बचे हुए सालों के हिसाब से निवेश चुनें और समय-समय पर उसे चेक करते रहें. इसके साथ ही कमाई के अलग अलग जरिए बनाए अपनी फाइनेंशियल सिक्योरिटी को और मजबूत करने के लिए रिटायरमेंट के बाद भी कमाई के कुछ अतिरिक्त या पैसिव सोर्स (Additional sources of income) बनाने की कोशिश करें.
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Source: IOCL

























