Train Rules: 1 जून से वेटिंग टिकट लेकर स्लीपर या एसी कोच में चढ़े तो सीधे लगेगा जुर्माना? जानिए TTE के नए अधिकार
Waiting Ticket Rule 2026: भारतीय रेलवे ने 1 जून 2026 से नियम बदलते हुए वेटिंग टिकट यात्रियों को स्लीपर और एसी कोच में यात्रा की अनुमति बंद कर दी है,ताकि भीड़ कम हो और कन्फर्म यात्रियों को सुविधा मिले.

Indian Railways New Rules: भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टिकट से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. इस नए नियम के मुताबिक, 1 जून 2026 से वेटिंग टिकट वाले यात्री अब स्लीपर और एसी कोच में सफर नहीं कर सकेंगे. यानी अब वेटिंग टिकट वालों को सिर्फ जनरल कोच में ही सफर करना होगा.
रेलवे का कहना है कि इसका खास मकसद ट्रेनों के स्लीपर और एसी कोच में होने वाली भीड को कम करना है, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि वेटिंग टिकट वाले यात्री कन्फर्म सीटों पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं, जिससे कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को काफी परेशानी होती है.
कितना लगेगा जुर्माना?
नए नियम के तहत अगर कोई व्यक्ति स्लीपर कोच में वेटिंग टिकट के साथ यात्रा करता पकड़ा जाता है, तो उस पर ₹250 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा और उसे जनरल कोच में भेजा जा सकता है. वहीं थर्ड एसी या सेकंड एसी कोच में यह जुर्माना ₹440 तक हो सकता है, साथ ही पूरा किराया भी वसूला जाएगा.
साथ ही टीटीई को यह अधिकार है कि वह ऐसे यात्री को जनरल कोच में भेज दे या अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतार दे. इसके अलावा भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, बिना टिकट यात्रा करने पर ₹1000 रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा भी हो सकती है.
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एडवांस बुकिंग के नियम में भी बदलाव
रेलवे के नए नियम के अनुसार, अब एडवांस रिजर्वेशन पीरियड को 120 दिन से घटाकर 60 दिन कर दिया गया है. यानी अब यात्री सफर से दो महीने पहले तक ही टिकट बुक कर सकेंगे.
इसके अलावा अगर टिकट को अपग्रेड किया जाता है, तो PNR नंबर वही रहेगा. अगर अपग्रेड किया गया टिकट रद्द किया जाता है, तो रिफंड मूल श्रेणी (जैसे स्लीपर) के आधार पर होगा, न कि अपग्रेड की गई श्रेणी (जैसे 2A) के आधार पर. स्लीपर से ज्यादा से ज्यादा थर्ड या सेकंड एसी तक ही अपग्रेड संभव होगा, जबकि फर्स्ट एसी तक सीधा अपग्रेड बंद कर दिया गया है.
ग्राउंड पर लागू करना बड़ी चुनौती
हालांकि यह नियम कड़े हैं, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या रेलवे इन्हें सही तरीके से लागू कर पाएगा. भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में TTE के लिए हर यात्री की जांच करना आसान नहीं होगा. वहीं, अगर यह सख्ती ठीक से लागू हुई तो सफर बेहतर होगा, लेकिन अगर निगरानी कमजोर रही तो स्थिति पहले जैसी ही बनी रह सकती है.
Source: IOCL























