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Dollar, रुपया और बाथ जानें क्यों होती है हर देश की करेंसी की वैल्यू अलग? अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ता है असर

Currency Value: जैसे भारत में रुपया होता है, वैसे ही अमेरिका में डॉलर होता है, हर देश की अपनी एक अलग करेंसी होती है, जिसकी वैल्यू भी अलग होती है. आइये बताते हैं ऐसा क्यों होता है?

Currency Value: भारतीय रुपये की वैल्यू वैश्विक स्तर पर काफी नीचे गिर गई है. तो वहीं डॉलर की कीमत बढ़ गई है. ये खबर आम जनता के लिए काफी परेशान करने वाली है, क्योंकि इससे देश में महंगाई बढ़ जाएगी. वैसे दुनिया के हर देश की अपनी अलग मुद्रा यानी करेंसी होती है. कहीं डॉलर चलता है, कहीं रुपया, तो कहीं दिनार या पाउंड. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी देश की करेंसी की कीमत ज्यादा और किसी की कम क्यों होती है?

क्यों होती है करेंसी वैल्यू अलग- अलग?
असल में किसी भी करेंसी की वैल्यू उस देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, महंगाई और दुनिया में उसके भरोसे पर निर्भर करती है. जब एक देश की मुद्रा दूसरे देश की मुद्रा के मुकाबले खरीदी या बेची जाती है, तब उसका एक्सचेंज रेट तय होता है.

उदाहरण के लिए: 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 96.283 भारतीय रुपये के बराबर है, जबकि 1 कुवैती दिनार की कीमत भारतीय रुपये से काफी ज्यादा है. इसका मतलब ये नहीं कि कोई देश गरीब या अमीर है, बल्कि उसकी मुद्रा की मांग और सप्लाई अलग होती है.

ये हैं करेंसी की वैल्यू अलग होने के बड़े कारण
हर एक देश की करेंसी की वैल्यू अलग- अलग होने के कई कारण हो सकते हैं. जिनकी एक लिस्ट हमने आपके लिए तैयार की है. यहां जानें ये वजहे:

  • इसका सबसे बड़ा खेल अर्थव्यवस्था की ताकत का होता है. जिस देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, उसकी करेंसी पर लोगों का भरोसा ज्यादा होता है. जैसे कि US की अर्थव्यवस्था मजबूत मानी जाती है, इसलिए अमेरिकी डॉलर की मांग दुनियाभर में रहती है.
  • अगर किसी देश में महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ती है, तो वहां की करेंसी कमजोर होने लगती है. क्योंकि लोगों की खरीदने की क्षमता घट जाती है. जैसे इन दिनों भारत की करेंसी थोड़ी कमजोर हुई है.
  • देश का केंद्रीय बैंक अगर ब्याज दर बढ़ाता है, तो विदेशी निवेश बढ़ सकता है. इससे उस देश की करेंसी की मांग बढ़ती है और वैल्यू मजबूत हो सकती है.
  • जो देश ज्यादा सामान निर्यात करता है, वहां विदेशी मुद्रा ज्यादा आती है. इससे उसकी करेंसी मजबूत हो सकती है.
  • अगर किसी देश में राजनीतिक स्थिरता और अच्छी नीतियां हों, तो निवेशक वहां पैसा लगाना पसंद करते हैं. इससे करेंसी मजबूत रहती है.
  • जिस देश के पास ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) होता है, उसकी करेंसी पर दबाव कम रहता है.

हालांकि ये बता दें कि महंगी करेंसी का मतलब हमेशा अमीर देश नहीं होता. कई बार देश अपनी मुद्रा को जानबूझकर कमजोर रखते हैं ताकि उनका सामान विदेशों में सस्ता बिके और निर्यात बढ़ सके. दुनिया की सबसे मजबूत मुद्राओं में कुवैत का कुवैती दिनार, बहराइन का बहरीन दिनार और यूनाइटेड किंगडम का पाउंड स्टर्लिंग शामिल हैं. आसान शब्दों में कहें तो जिस करेंसी पर दुनिया का भरोसा ज्यादा होगा, उसकी कीमत भी उतनी ही मजबूत होगी.

प्रतीक्षा राणावत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करीब 12 वर्षों का अनुभव है. इन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मल्टीमीडिया (B.Sc - Multimedia) में ग्रेजुएशन किया है और इसके बाद जन संचार (Mass Communication) में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया है. अपने करियर की शुरुआत इन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, लेकिन समय के साथ लेखन में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई. वर्तमान में प्रतीक्षा बिजनेस और यूटिलिटी विषयों के लिए लेखन करती हैं. इसके अलावा इन्होंने लंबे समय तक एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर भी लिखा है. लिखने के साथ- साथ ही इन्हें ट्रैवलिंग, नई चीज़ों को एक्सप्लोर करना और किताबें पढ़ने का भी शौक है

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