मौत का इंजेक्शन! रात में काम न करना पड़े इसलिए मरीजों को देता था जानलेवा दवाएं, जर्मनी के नर्स को हुई उम्रकैद की सजा
यह मेल नर्स अस्पताल की रात की शिफ्ट में काम करता था. उसका काम था बीमार और बुजुर्ग मरीजों की देखभाल करना. लेकिन उसने ऐसा काम किया जिससे पूरा जर्मनी हिल गया.

दुनिया हैरान रह गई जब जर्मनी से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया. यहां एक नर्स ने लोगों की सेवा करने की जगह, उन्हें सुलाने के बहाने मौत के घाट उतार दिया. यह कोई फिल्म की कहानी नहीं बल्कि सच्ची घटना है. पश्चिमी जर्मनी के वुएर्सेलेन शहर के एक अस्पताल में काम करने वाला 44 साल का यह नर्स अपनी रात की ड्यूटी को आसान बनाने के लिए मरीजों को दर्द निवारक और नींद की भारी दवाएं देकर मारता रहा. अदालत ने अब इस “डेथ नर्स” को कम से कम 10 मरीजों की हत्या और 27 को मारने की कोशिश के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई है.
मॉर्फिन और मिडाजोलम जैसी खतरनाक दवाओं से खेला मौत का खेल!
यह मेल नर्स अस्पताल की रात की शिफ्ट में काम करता था. उसका काम था बीमार और बुजुर्ग मरीजों की देखभाल करना. लेकिन उसने ऐसा काम किया जिससे पूरा जर्मनी हिल गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह रात के वक्त मरीजों को ज्यादा देखभाल से बचने के लिए मॉर्फिन और मिडाजोलम जैसी तेज दवाओं के इंजेक्शन देता था. ये वही दवाएं हैं जिनका इस्तेमाल कभी-कभी अमेरिका में फांसी देने के लिए भी किया जाता है.
मरीजों को लगाता इंजेक्शन ताकी ना करना पड़े काम
पुलिस जांच में पता चला कि उसने अपने कई मरीजों को सिर्फ इसलिए इंजेक्शन लगाए ताकि वे गहरी नींद में चले जाएं और रात में उसे बार-बार बुलाना न पड़े. लेकिन उन दवाओं की मात्रा इतनी ज्यादा होती थी कि मरीजों की सांसें हमेशा के लिए थम जाती थीं. अभियोजकों ने कहा कि ये नर्स अपने मरीजों की जान के साथ “जिंदगी और मौत का खेल” खेल रहा था.
10 लोगों की चली गई जान
जब मामला अदालत पहुंचा तो उसने कहा कि उसे नहीं पता था कि दवाएं इतनी खतरनाक होंगी. उसने कहा, “मैं तो बस चाहता था कि वे सो जाएं क्योंकि नींद सबसे अच्छी दवा है.” लेकिन अदालत को उसके झूठ पर भरोसा नहीं हुआ. जांच में साबित हुआ कि वह कई महीनों से ये सब जानबूझकर कर रहा था. उसने 2020 में अस्पताल में काम शुरू किया था, और दिसंबर 2023 से मई 2024 के बीच उसके हाथों 10 लोगों की जान चली गई.
आजीवन कारावास की सुनाई सजा
अभियोजकों ने कहा कि यह नर्स अपने काम को लेकर बिल्कुल बेरहम और लापरवाह था. जिन मरीजों को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत थी, उन्हीं से उसे सबसे ज्यादा चिढ़ होती थी. वह चाहता था कि सब सो जाएं ताकि उसे कोई काम न करना पड़े. अदालत ने उसे बिना पैरोल के आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, यानी अब वह जिंदगी भर जेल से बाहर नहीं आ सकेगा.
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यूजर्स का खौल उठा खून
सोशल मीडिया पर जैसे ही ये मामला वायरल हुआ पूरे इंटरनेट पर सनसनी मच गई. यूजर्स इसे लेकर तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे. एक यूजर ने लिखा...ऐसे लोगों को तो मौत की सजा सुनानी चाहिए. एक और यूजर ने लिखा...अब तो अस्पताल जाने से भी डर लगने लगा है. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा...इन लोगों को खुदा खौफ नहीं है, इसे कभी जमानत न मिले तो अच्छा है.
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Source: IOCL
























