एक्सप्लोरर

TECH EXPLAINED: कैसे काम करता है फोन को ठंडा रखने वाला वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम? जानिए सारे सवालों के जवाब

मोबाइल को ठंडा रखने के लिए कई कंपनियां वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम का यूज करती है. आईफोन 17 प्रो मॉडल्स में भी इसे यूज किया गया है. आज हम आपको बताएंगे कि यह सिस्टम क्या होता है और कैसे काम करता है.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • वेपर चेंबर कूलिंग सिस्टम फोन को ठंडा रखने का तरीका है।
  • यह सिस्टम लिक्विड कूलेंट को वेपर बनाकर हीट फैलाता है।
  • तकनीक में सुधार के लिए माइक्रोवॉल्व और डिआयोनाइज्ड पानी का उपयोग।
  • लागत ज्यादा है, पर परफॉर्मेंस और कॉम्पैक्ट डिजाइन में सहायक।

Vapor Chamber Cooling System: आजकल मोबाइल फोन का इस्तेमाल बातचीत से लेकर गेमिंग और मल्टीटास्किंग से लेकर वीडियो एडिटिंग जैसे हाई-एंड टास्क के लिए हो रहा है. कुछ साल पहले तक जो काम सिर्फ लैपटॉप-कंप्यूटर पर हो सकते थे, वो आज आसानी से मोबाइल पर किए जा सकते हैं. इन हैवी टास्क को परफॉर्म करते समय मोबाइल में हीट जनरेट होती है, जिससे यह गर्म हो जाता है. अगर यह लगातार गर्म रहे तो इसकी परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में मोबाइल को ठंडा रखना जरूरी हो जाता है. फोन को ठंडा रखने के लिए इसके अंदर कूलिंग सिस्टम दिया जाता है. वेपर चैंबर कूलिंग भी एक ऐसा सिस्टम है, जो कई मॉडर्न स्मार्टफोन में मिलता है. आज के टेक एक्सप्लेनर में हम आपको वेपर चैबर कूलिंग के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं. 

क्या होता है वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम?

प्रोसेसर और दूसरे पार्ट्स से जनरेट हुई हीट को ठंडा करने के लिए कूलिंग सिस्टम का यूज किया जाता है. इसके लिए यूज होने वालों में से वेपर चैंबर कूलिंग एक कॉमन तरीका है. ऐप्पल ने भी अपने लेटेस्ट आईफोन 17 प्रो मॉडल्स में यही तरीका यूज किया है, जिसके बाद इसके बारे में खूब बात होने लगी है. हालांकि, एंड्रॉयड फोन और लैपटॉप आदि  में यह तरीका सालों से इस्तेमाल होता आ रहा है. वेपर कूलिंग सिस्टम में एक हीट पाइप के अंदर लिक्विड कूलेंट भरा होता है. हीट एब्जॉर्ब करने के बाद यह वेपर (वाष्प) बनकर डिवाइस की ठंडी जगह पर जाता है, जिससे यह फिर लिक्विड बन जाता है. इस तरह यह हीट को पूरे सरफेस पर स्प्रेड कर देता है, जिसे फोन गर्म नहीं होता. फोन के पूरी तरह ठंडा न होने जाने तक यह साइकिल चलता रहता है. 

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

जैसा हमने आपको पहले बताया कि वेपर कूलिंग सिस्टम में एक पतली हीट पाइप होती है. इसमें भरा लिक्विड कूलेंट CPU और GPU से निकली हीट को एब्जॉर्ब कर वेपर बन जाता है. फिर यह ठंडी जगह पर जाकर फिर से लिक्विड बनकर हीट को एक जगह इकट्ठा होने से रोक देता है. इस पूरी प्रोसेस को प्रभावी बनाने के लिए कंपनियां अलग-अलग मैटेरियल का यूज करती हैं. कई फोन में यह पूरा सिस्टम कई लेयर्स में लगाया जाता है, जिससे हीट प्रोसेसर के पास इकट्ठी नहीं होती और फोन को ठंडा रखने में मदद मिलती है. 

कूलिंग को बेहतर बनाने के लिए अपनाए जा रहे ये तरीके

वेपर कूलिंग को ही बेहतर बनाने के लिए कंपनियां लगातार काम कर रही हैं. शाओमी ने हाल ही में एक लूप लिक्विड कूल टेक्नोलॉजी का डेमो दिखाया था. इसमें कूलिंग चैंबर में कई माइक्रोवॉल्व बनाई गई हैं, जिससे हॉट वेपर को गुजरने के लिए ज्यादा सरफेस एरिया मिल जाता है और यह जल्दी ठंडा होकर फिर से लिक्विड में बदल जाता है. आईफोन 17 प्रो मॉडल्स की बात करें तो ऐप्पल ने इसके लिए खास तौर से वेपर कूलिंग सिस्टम को कस्टमाइज किया है. ऐप्पल ने इसमें डिआयोनाइज्ड पानी का इस्तेमाल किया है. इस चैंबर को बाकी मैटेलिक चेसिस के साथ लेजर से सील किया गया है. इसके आसपास बेहतर थर्मल कंडक्टिविटी के लिए एयरोस्पेस ग्रेड के एल्युमिनियम अलॉय को यूज किया है. वहीं आसुस की बात करें तो कंपनी ने ROG Phone 6 में वेपर चैंबर के साथ ग्रेफाइट शीट्स का इस्तेमाल किया है. 

क्या हैं इस सिस्टम के फायदे? 

कई टेस्ट में पता चलता है कि वेपर कूलिंग सिस्टम से डिवाइस के टेंपरेचर पर फर्क पड़ता है. अलग-अलग मॉडल के हिसाब से यह 2 डिग्री से लेकर 6 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ज्यादा हो सकता है. यह उन डिवाइस में भी कारगर है, जिनके प्रोसेसर ज्यादा हीट जनरेट करते हैं. इसके अलावा भी इसके कई फायदे हैं-

  • वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम की थर्मल ट्रांसफर एफिशिएंसी ज्यादा होती है, जिस कारण यह हीट को पूरे सरफेस पर फैला देता है और कोई हॉटस्पॉट नहीं बनता. इससे टेंपरेचर को मैंटेन करना आसान हो जाता है. 
  • इसे किसी भी शेप में तैयार किया और CPU और दूसरे हीट सोर्स के डायरेक्ट कॉन्टैक्ट में रखा जा सकता है. इस कारण डिवाइस को कॉम्पैक्ट डिजाइन देना आसान हो जाता है.
  • हाई परफॉर्मेंस चिप्स टास्क पूरा करते समय काफी हीट जनरेट करती हैं. यह सिस्टम उसे ठीक तरीके से मैनेज कर लेता है, जिससे डिवाइस की परफॉर्मेंस पर असर नहीं पड़ता.

वेपर चैंबर कूलिंग के नुकसान

  • इस सिस्टम का एक बड़ा नुकसान इसकी लागत है. दूसरे कूलिंग सॉल्यूशन्स के मुकाबले इसमें एडवांस्ड मैटेरियल और इंजीनियरिंग की जरूरत होती है, जिससे इसकी लागत बढ़ जाती है. 
  • शानदार रिजल्ट के लिए इसे हीट सोर्स से बिल्कुल अलाइन करना पड़ता है, जिससे कई बार डिवाइस को डिजाइन करते समय परेशानी खड़ी हो जाती है. 
  • यह हीट को पूरे सरफेस पर स्प्रेड कर देता है, लेकिन अगर किसी डिवाइस में वर्टिकल हीट ट्रांसफर करने की जरूरत पड़े तो यह उस स्थिति में कामयाब नहीं है.

फिलहाल ट्रेंड में रहेगा वेपर कूलिंग सिस्टम

अगले कुछ समय तक वेपर कूलिंग सिस्टम ट्रेंड में रहेगा और कई अपकमिंग मॉडल्स में यह देखने को मिल सकता है. ऐसी भी जानकारी है कि माइक्रोसॉफ्ट फोल्डेबल डिस्प्ले और अपने होलो लेंस AR ग्लासेस में भी यह सिस्टम यूज कर सकती है. ऐप्पल ने आईफोन 17 प्रो मॉडल्स में इसे इस्तेमाल किया है तो अब बाकी कंपनियों का भी इस पर भरोसा बढ़ा है. 

ये भी पढ़ें-

हैकर्स की नई चाल, चैटजीपीटी और ग्रोक से करवा रहे अपना काम, आप पर भी है खतरा!

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

iPhone 17 Pro पर आ गई लुभावनी डील, हजारों रुपये सस्ता खरीदने का मिल रहा मौका
iPhone 17 Pro पर आ गई लुभावनी डील, हजारों रुपये सस्ता खरीदने का मिल रहा मौका
Apple AirTag क्या है? कैसे करता है ट्रैक और क्यों हर iPhone यूजर के लिए है ये सीक्रेट हथियार
Apple AirTag क्या है? कैसे करता है ट्रैक और क्यों हर iPhone यूजर के लिए है ये सीक्रेट हथियार
यह कंपनी बंद कर रही है इनएक्टिव सिम, यहां जान लें सस्ते में नंबर बचाने का जुगाड़
यह कंपनी बंद कर रही है इनएक्टिव सिम, यहां जान लें सस्ते में नंबर बचाने का जुगाड़
अनोखा फोन लाने वाली है OpenAI, मोबाइल ऐप्स की नहीं पड़ेगी जरूरत, जानिए कैसे करेगा काम
अनोखा फोन लाने वाली है OpenAI, मोबाइल ऐप्स की नहीं पड़ेगी जरूरत, जानिए कैसे करेगा काम

वीडियोज

West Bengal Election 2026: बंगाल में Modi-Yogi-Shah का Road Show | Mamata Banerjee | TMC | BJP
Trump News: ट्रंप को मारने आए शख्स Cole Tomas Allen का सच जानकर उड़ जाएंगे होश! | Secret Service
Kejriwal vs Justice Swarna Kanta: केजरीवाल का खुला विद्रोह, सत्याग्रह का ऐलान! | Delhi High Court
Delhi Politcs : Arvind Kejriwal ने सत्याग्रह का किया ऐलान | Justice Swarana Kanta | Raghav Chadha
Iran US Peace Talk Update: पीस टॉक में अब रूस की एंट्री! | Vladimit Putin | USA | Trump | News

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
1877 में एल नीनो से 2 करोड़ मौतें और फसलें बर्बाद! 140 साल बाद कैसे दोहराएगा इतिहास, क्या गर्मी से बचने का कोई रास्ता नहीं?
1877 में एल नीनो से 2 करोड़ मौतें और फसलें बर्बाद! 140 साल बाद कैसे दोहराएगा इतिहास, क्या गर्मी से बचने का कोई रास्ता नहीं?
दिल्ली में बिहारी युवक की पुलिस वाले ने की हत्या तो भड़के खेसारी लाल यादव, कहा- 'थू है…'
दिल्ली में बिहारी युवक की पुलिस वाले ने की हत्या तो भड़के खेसारी लाल यादव, कहा- 'थू है…'
BCCI ने अंगकृष रघुवंशी को दी सजा, अंपायर से भिड़ना पड़ा महंगा; ठोका गया तगड़ा जुर्माना
BCCI ने अंगकृष रघुवंशी को दी सजा, अंपायर से भिड़ना पड़ा महंगा; ठोका गया तगड़ा जुर्माना
हेमा मालिनी चाहती थीं 'रामायण' में 'राम' बने ये एक्टर, 'हनुमान' के लिए इस एक्टर को बताया था बेस्ट
हेमा मालिनी चाहती थीं 'रामायण' में 'राम' बने ये एक्टर, हनुमान के लिए इस एक्टर को बताया था बेस्ट
'लोकतंत्र के लिए खतरा...', CJI को लेकर राजस्थान के सीएम की फिसली जुबान तो कांग्रेस ने साधा निशाना, बताया शर्मनाक
'लोकतंत्र के लिए खतरा...', CJI को लेकर राजस्थान के सीएम की फिसली जुबान तो कांग्रेस ने साधा निशाना, बताया शर्मनाक
Global Warming: 2085 तक एक-तिहाई जानवरों के घर होंगे तबाह? जलवायु संकट पर चौंकाने वाली स्टडी
2085 तक एक-तिहाई जानवरों के घर होंगे तबाह? जलवायु संकट पर चौंकाने वाली स्टडी
Press जैकेट भी नहीं बचा पाई जान! रिपोर्टिंग कर रही महिला पत्रकार की एयर स्ट्राइक में मौत, इंटरनेट पर बवाल
Press जैकेट भी नहीं बचा पाई जान! रिपोर्टिंग कर रही महिला पत्रकार की एयर स्ट्राइक में मौत, इंटरनेट पर बवाल
Pancreatic cancer Vaccine: सबसे खतरनाक कैंसर के खिलाफ दमदार वैक्सीन, जानें इससे कितना सफल होगा पैनक्रिएटिक कैंसर का इलाज
सबसे खतरनाक कैंसर के खिलाफ दमदार वैक्सीन, जानें इससे कितना सफल होगा पैनक्रिएटिक कैंसर का इलाज
Embed widget