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Solar Energy System पर लगाने से पहले डिसाइड कर लें चीजें, नहीं तो बर्बाद हो सकते हैं पैसे

Solar Energy System Tips: सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाने से पहले कई चीजें डिसाइड कर लेना जरूरी है. इनके बिना एनर्जी नीड्स भी पूरी नहीं होंगी और पैसे भी बर्बाद हो सकते हैं.

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  • सोलर पैनल लगाने से पहले अपनी बिजली खपत की जानकारी लें।
  • छत की मजबूती और धूप की उपलब्धता का ध्यान रखें।
  • अपनी जरूरत अनुसार ऑफ-ग्रिड, ऑन-ग्रिड या हाइब्रिड सिस्टम चुनें।
  • कम खर्च के बजाय अच्छी क्वालिटी के सोलर पैनल को प्राथमिकता दें।

Solar Energy System Tips: बिजली बिल को कम करने के लिए लोग तेजी से सोलर एनर्जी की तरफ बढ़ रहे हैं. इसी का नतीजा है कि आजकल शहरों से लेकर गांवों तक हर जगह सोलर पैनल नजर आने लगे हैं. सोलर पैनल क्लीन एनर्जी देने के साथ-साथ बिजली की बढ़ती लागत से भी बचाते हैं, लेकिन कई बार सोलर एनर्जी सिस्टम को लेकर कंफ्यूजन रहती है. इसलिए कुछ चीजों को पहले ही डिसाइड कर लेना बेहतर रहता है. 

सबसे पहले देखें अपनी जरूरत

सोलर पैनल लगाने से पहले घर की एनर्जी नीड्स को देखना जरूरी है. बिजली के बिल में देखकर पता लगाया जा सकता है कि घर में हर महीने कितनी बिजली की खपत हो रही है. अगर हर महीने घर में 3 किलोवॉट बिजली कंज्यूम हो रही है तो इतनी ही पावर जनरेट करने वाले सिस्टम की जरूरत पड़ेगी. कम कैपेसिटी वाला सिस्टम लगाने पर बिजली बिल के झंझट से छुटकारा नहीं मिल पाएगा. इसलिए सिस्टम की कैपेसिटी को डिसाइड कर ही आगे बढ़ें

छत की कंडीशन और सनलाइट का हिसाब

सोलर पैनल लगाने की छत की कंडीशन को भी देखना पड़ता है. सोलर पैनल की लाइफ 25-30 साल होती है. इसलिए इंस्टॉलेशन से पहले यह जरूर देख लें कि घर की छत इतने सालों तक इस सिस्टम को झेल पाएगी या नहीं. इसके अलावा एनर्जी जनरेशन के लिए सनलाइट बहुत जरूरी है. छत पर ऐसी जगह पैनल इंस्टॉल करने चाहिए जहां किसी बिल्डिंग या पेड़ की छाया न पड़ती हो.

सोलर एनर्जी सिस्टम का चुनाव

ऑफ-ग्रिड, ऑन-ग्रिड और हाइब्रिड समेत तीन तरह के सोलर एनर्जी सिस्टम ज्यादा ट्रेंड में हैं. ऑफ-ग्रिड सिस्टम में एनर्जी स्टोरेज के लिए बैटरी की जरूरत पड़ती है और यह पावर कट के दौरान भी काम करता है. ऑन-ग्रिड की बात करें तो यह ग्रिड के साथ कनेक्टेड होता है. यह बिजली बिल को कम करता है और इसमें बैटरी की जरूरत नहीं होती. वहीं हाइब्रिड दोनों का मिला-जुला सिस्टम है. यह ऑन-ग्रिड की तरह बिल भी बचाता है और ऑफ-ग्रिड की तरह बैकअप भी देता है. अपनी जरूरत के हिसाब से इनमें से किसी भी टाइप को सेलेक्ट किया जा सकता है.

सोलर पैनल की क्वालिटी

कई लोग पैसा बचाने या कम खर्च में सोलर सिस्टम लगाने के लिए खराब क्वालिटी वाले पैनल खरीद लेते हैं. ये भले ही एक बार पैसे बचा देते हैं, लेकिन इनमें इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन भी कम होता है और इनकी परफॉर्मेंस जल्दी खराब हो जाती है. खराब क्वालिटी होने के कारण इन्हें बार-बार मैंटेनेंस की जरूरत पड़ती है और इनकी लाइफ भी कम होती है. दूसरी तरफ हाई-क्वालिटी वाले पैनल में ऐसी दिक्कत नहीं आती. एक बार इंस्टॉल करने के बाद सालों तक टेंशन फ्री रहा जा सकता है. इसलिए यह डिसाइड कर लें कि आप एक बार पैसा बचाकर झंझट लेना चाहते हैं या एक बार पैसा लगाकर टेंशन फ्री रहना चाहते हैं.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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