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आंधी आए या तूफान, किसी भी हाल में नहीं भीगेंगे आपके कपड़े! साइंटिस्ट ने बनाया अल्ट्रा-वॉटरप्रूफ फैब्रिक

Ultra-Waterproof Fabric: आमतौर पर वॉटरप्रूफ कपड़ों में ऊपर से एक कोटिंग की जाती है जो समय के साथ हटने लगती है. लेकिन इस नई तकनीक में हर एक फाइबर (धागे) पर अलग-अलग एक मजबूत सुरक्षा परत बनाई जाती है.

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  • वैज्ञानिकों ने बनाया नया अल्ट्रा-वॉटरप्रूफ कपड़ा, हर फाइबर पर मजबूत परत।
  • यह कपड़ा घिसावट, तेज बारिश में भी पानी को दूर रखता है।
  • बेहद गर्म और ठंडे तापमान में भी कपड़े की जलरोधी क्षमता बरकरार।
  • भविष्य में आउटडोर, मेडिकल और इंडस्ट्रियल उत्पादों में होगा उपयोग।

Ultra-Waterproof Fabric: बारिश या नमी से बचने के लिए हम अक्सर वॉटरप्रूफ कपड़ों का सहारा लेते हैं लेकिन कुछ समय बाद ये अपनी खासियत खो देते हैं. अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया कपड़ा तैयार किया है जो लंबे समय तक इस्तेमाल और घिसावट के बाद भी पानी को खुद से दूर रखता है.

क्या है इस नई खोज की खास बात?

Chinese Academy of Sciences के वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस खास फैब्रिक को विकसित किया है. प्रोफेसर डोंग झिचाओ के नेतृत्व में तैयार की गई इस तकनीक को सुपरहाइड्रोफोबिक यानी बेहद पानी को दूर रखने वाला बनाया गया है. यह रिसर्च Nature Communications में प्रकाशित हुई है जिसमें MARS (Molecularly Assembled Robust Superhydrophobic Shell) नाम की नई तकनीक का जिक्र है.

कैसे काम करती है यह तकनीक?

आमतौर पर वॉटरप्रूफ कपड़ों में ऊपर से एक कोटिंग की जाती है जो समय के साथ हटने लगती है. लेकिन इस नई तकनीक में हर एक फाइबर (धागे) पर अलग-अलग एक मजबूत सुरक्षा परत बनाई जाती है. इससे कपड़े के हर हिस्से पर एक समान सुरक्षा मिलती है और पानी की बूंदें उस पर टिकने के बजाय फिसल जाती हैं.

पुराने वॉटरप्रूफ कपड़ों की समस्या

अब तक मौजूद ज्यादातर वॉटरप्रूफ फैब्रिक बार-बार धुलने, रगड़ या इस्तेमाल के बाद अपनी क्षमता खो देते हैं. इसके अलावा, कई कपड़ों में फ्लोरोकेमिकल्स का इस्तेमाल होता है जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायक माने जाते हैं. कुछ तकनीकें महंगी और हानिकारक केमिकल्स पर निर्भर होती हैं जिससे उनका बड़े स्तर पर इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है.

कठिन परिस्थितियों में भी शानदार प्रदर्शन

इस नए कपड़े को कई कठिन टेस्ट से गुजारा गया. हजारों बार रगड़ने, खींचने और तेज बारिश जैसी परिस्थितियों में भी इसने पानी को अपने अंदर नहीं जाने दिया. यह कपड़ा रोजमर्रा की एक्टिविटी जैसे चलना, दौड़ना या बैग के साथ घिसने पर भी अपनी खासियत बनाए रखता है.

बेहद गर्म और ठंडे मौसम में भी असरदार

इस फैब्रिक की एक और बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत ज्यादा तापमान में भी काम करता है. यह 160 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी और -196 डिग्री सेल्सियस जैसी बेहद ठंड में भी पानी को दूर रखने में सक्षम रहा.

अक्सर वॉटरप्रूफ कपड़े भारी या असहज हो जाते हैं लेकिन इस नई तकनीक से बना कपड़ा मुलायम, हल्का और सांस लेने योग्य (breathable) बना रहता है. यानी इसे पहनने में आराम भी मिलेगा और सुरक्षा भी.

भविष्य में कहां होगा इस्तेमाल?

यह नई तकनीक आउटडोर कपड़ों, सुरक्षा गियर, मेडिकल सामान और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल की जा सकती है. इससे ऐसे कपड़े बनाए जा सकेंगे जो लंबे समय तक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल होंगे. यह नया अल्ट्रा-वॉटरप्रूफ फैब्रिक टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. यह न सिर्फ ज्यादा टिकाऊ है बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर ऑप्शन पेश करता है.

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