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लैपटॉप खरीदते समय इन फीचर्स के नाम पर न दें ज्यादा पैसा, कोई काम नहीं आएंगे

Overrated Laptop Feature: कीमत बढ़ने के कारण लैपटॉप खरीदना पहले से ही महंगा हो गया है. ऐसे में अगर काम न आने वाले फीचर्स पर पैसा खर्च किया जाए तो यह जेब पर और भी भारी पड़ सकता है.

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  • बुनियादी लैपटॉप उपयोग हेतु कुछ अनावश्यक सुविधाओं से बचें।
  • 120 Hz से अधिक रिफ्रेश रेट, OLED डिस्प्ले टालें।
  • नियमित कार्यों हेतु 4K रेजोल्यूशन और टचस्क्रीन अनावश्यक हैं।

Overrated Laptop Feature: स्टोरेज और मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत के कारण लैपटॉप के दाम पहले ही आसमान छूने लगे हैं. ऐसे में नया लैपटॉप खरीदना काफी महंगा हो गया है. इसके ऊपर से अगर आप काम न आने वाले फीचर्स पर ज्यादा पैसा खर्च देते हैं तो यह सौदा आपको नुकसान में डाल सकता है. दरअसल, लैपटॉप में कंपनियां कई ऐसे फीचर्स देती हैं, जिनका बेसिक कामों के लिए ज्यादा यूज नहीं होता. इसलिए आपको कंपनियों की बातों में फंसकर ऐसे फीचर्स के लिए पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप किन फीचर्स को इग्नोर कर सकते हैं.

120 Hz से ज्यादा की रिफ्रेश रेट

ज्यादा रिफ्रेश रेट का मतलब है कि वीडियो गेम या स्ट्रीमिंग करते समय आपको मोशन समूद नजर आएगा. इसके कारण मोशन ब्लर कम हो जाता है और यह बेहतर रिस्पॉन्सिवनेस देता है. गेमिंग और स्ट्रीमिंग के लिए 120 Hz की रिफ्रेश रेट काफी मानी जाती है. ऐप्पल के सबसे महंगे आईफोन में इसी रिफ्रेश रेट वाला डिस्पले मिलता है. अब कई कंपनियां अपने लैपटॉप में 120 Hz से भी ज्यादा का रिफ्रेश रेट सपोर्ट देने लगी हैं. अगर आप बेसिक यूज के लिए लैपटॉप ले रहे हैं तो 120 Hz से ज्यादा की रिफ्रेश रेट के लिए पैसा खर्च न करें.

OLED डिस्प्ले

स्क्रीन टेक्नोलॉजी के मामले में OLED डिस्प्ले को काफी एडवांस माना जाता है. यह बैकलाइट को यूज करने की बजाय सेल्फ-एमिटिंग पिक्सल को यूज करता है. इस डिस्प्ले में हर पिक्सल इंडिविजुलअली ऑन और ऑफ हो सकता है. इससे ज्यादा वाइब्रेंट कलर और बेहतर कंट्रास्ट मिलता है. इन फायदों के बावजूद बेसिक यूज के लिए लैपटॉप में इसकी जरूरत नहीं है. रेगुलर कामों के लिए आप IPS LCD डिस्प्ले वाला लैपटॉप खरीद सकते हैं, जिससे आपको पैसे बचाने में मदद मिलेगी.

4K Resolution

4K Resolution के लिए भी आपको ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है. दरअसल, जितना ज्यादा रेजॉल्यूशन होगा, उसकी पिक्चर क्वालिटी उतनी ही बेहतर होगी, लेकिन उसके लिए उतने ही ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे. अगर आप ऑफिस के काम या रेगुलर यूज के लिए लैपटॉप खरीद रहे हैं तो उसमें 4K Resolution की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. ऐसे लैपटॉप के लिए 1080p वाला डिस्प्ले काफी होता है, जो कम कीमत पर मिल जाएगा. सिर्फ वीडियो एडिटिंग और ग्राफिक डिजाइनिंग जैसे कामों के लिए 4K Resolution की जरूरत पड़ती है.

Touchscreen 

पिछले कुछ सालों से लैपटॉप में भी फोन की तरह टचस्क्रीन आने लगी है. यह भले ही एक अट्रैक्टिव फीचर लग सकता है, लेकिन इसके लिए पैसा देना हमेशा फायदे का सौदा नहीं होता. टचस्क्रीन लैपटॉप लेने के बाद भी ज्यादातर लोग उसे कीबोर्ड और टचपैड से ही यूज करते हैं.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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