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यूपी में गोवंश संरक्षण से अर्थव्यवस्था को मिली नई दिशा, पशुपालन और डेयरी सेक्टर में बढ़ा रोजगार

UP News: योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोवंश को न केवल संरक्षित किया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार बनाकर युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अनगिनत अवसर सृजित किए हैं.

Lucknow News: उत्तर प्रदेश, जो देश के 16% पशुधन का घर है, गोवंश संरक्षण के माध्यम से अपनी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है. योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोवंश को न केवल संरक्षित किया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार बनाकर युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अनगिनत अवसर सृजित किए हैं. गोबर और गोमूत्र से बने उत्पादों ने इस क्रांति को और गति दी है. यह स्थिति 2017 से पहले की अखिलेश यादव सरकार के बिल्कुल उलट है, जब निराश्रित गोवंश सड़कों पर भटकने या कत्लखानों में बिकने को मजबूर था और गोकशी पर कोई अंकुश नहीं था.

20वीं पशुगणना (2019) के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 1.90 करोड़ गोवंश हैं, जिनमें 11.84 लाख निराश्रित गोवंश शामिल हैं. व्यवहारिक रूप से 2017 में यह संख्या 12 लाख से अधिक थी. उस समय गोवंश संरक्षण के लिए कोई नीति नहीं थी. केवल 100 गो-आश्रय स्थल थे, टीकाकरण सीमित था और पशुपालकों के लिए कोई ठोस योजना नहीं थी. डेयरी मिशन जैसा कोई कार्यक्रम अस्तित्व में नहीं था. निराश्रित गोवंश या तो सड़क पर भटकते थे या कत्लखानों में बेचे जाते थे, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ता था.

योगी सरकार की क्रांतिकारी पहल
2017 में योगी आदित्यनाथ, जो स्वयं गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर भी हैं, ने मुख्यमंत्री बनते ही गोवंश संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. 2 जनवरी 2019 को देश में पहली बार निराश्रित गोवंश संरक्षण नीति लागू की गई. आज प्रदेश में 7,717 गो-आश्रय स्थल हैं, जिनमें 12.52 लाख गोवंश संरक्षित हैं. इनके भरण-पोषण के लिए सरकार प्रतिदिन 50 रुपये प्रति गोवंश के हिसाब से 7.5 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. प्रत्येक वृहद गो-संरक्षण केंद्र के निर्माण पर 1.60 करोड़ रुपये निवेश किया गया है.

गोबर और गोमूत्र से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार
प्रदेश में प्रतिदिन 5,500 टन गोबर उत्पादित हो रहा है, जिससे वर्मी कम्पोस्ट, गमले, गोदीप, गो काठ, धूपबत्ती, पंचगव्य, जीवामृत और घनामृत जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं. इन उत्पादों ने गोवंश को बेसहारा छोड़ने की प्रवृत्ति को कम किया है और पशुपालकों के लिए गोबर व गोमूत्र आय का साधन बना है. विभिन्न गो-आश्रय स्थलों में इन उत्पादों की इकाइयां स्थापित की जा रही हैं, जिनमें महिला समूहों को विशेष रूप से जोड़ा गया है. इससे जैविक खेती को भी बढ़ावा मिला है.

अर्थव्यवस्था में गोवंश की भूमिका
प्रदेश की जीएसडीपी 25.63 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें पशुपालन क्षेत्र की हिस्सेदारी 1.67 लाख करोड़ रुपये है. राष्ट्रीय जीडीपी में पशुपालन का योगदान 4.11% है, जबकि यूपी में यह 7.1% है. देश में 390 लाख मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन हो रहा है. मुख्यमंत्री विदेशी गौ संवर्धन योजना और नंदनी कृषक समृद्धि योजना के तहत साहिवाल, गीर और थारपारकर नस्लों के पालन को प्रोत्साहन मिला है. इन योजनाओं में 40–50% अनुदान और 10–15 हजार रुपये पुरस्कार डीबीटी से 6,500 से अधिक गौपालकों को दिया गया.

निवेश और रोजगार सृजन
कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने के लिए 2024–25 में 3.08 लाख निःशुल्क गर्भाधान हुए. पशुपालन अवसंरचना विकास निधि और नेशनल लाइवस्टॉक मिशन से क्रमशः 1,094.38 करोड़ व 144.29 करोड़ रुपये के निवेश हो रहे हैं. यूपीजीआईएस–2023 के तहत 578 डेयरी और पशुपालन इकाइयों से 2,221.99 करोड़ रुपये निवेश और 1.23 लाख रोजगार सृजित हो रहे हैं.

युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार
सरकारी योजनाएं युवाओं व महिलाओं को पशुपालन में उद्यमिता के अवसर प्रदान कर रही हैं. नंदनी योजना के तहत 25 दुग्ध गोवंश इकाइयां स्थापित हो रही हैं, जिनमें 50% महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं. चारा नीति 2024 के तहत 230 हेक्टेयर भूमि पर नेपियर घास उत्पादन शुरू हुआ. 9,449 हेक्टेयर गोचर भूमि चिन्हित की गई और 5,458 हेक्टेयर पर हरा चारा बोया गया. गोबर-गोमूत्र इकाइयों से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं.

व्यापक टीकाकरण अभियान
2017 के बाद पशु स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार हुआ. आठ वर्षों में 2,202 पशु चिकित्सालयों के अलावा 39 नए अस्पताल और 2,575 पशुसेवा केंद्र खोले गए. 2024–25 में 520 मोबाइल वेटरनरी यूनिट ने 15.93 लाख पशुपालकों के 32.34 लाख पशुओं का उपचार किया. लंपी जैसी बीमारियों पर नियंत्रण के लिए 1.52 करोड़ टीकाकरण हुए, जिससे मृत्यु दर सबसे कम रही. इस अवधि में 1,648 लाख टीके लगाए गए.

2017 से पहले कत्लखानों में बिकने को मजबूर था गोवंश
2017 से पहले कोई संरक्षण नीति नहीं थी. मात्र 100 गो-आश्रय स्थल थे. योगी सरकार ने इसे बढ़ाकर 7,717 किया. 1.12 लाख पशुपालकों को 1.73 लाख गोवंश सौंपे गए. पशुधन बीमा योजना में 1.60 लाख पशुओं का बीमा हुआ. 1,372 क्विंटल चारा बीज निःशुल्क वितरित हुआ. गोबर-गोमूत्र उत्पादों ने नई आय दी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने गोवंश संरक्षण को सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आंदोलन में बदल दिया है. यह मॉडल न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है.

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