Uttarkashi News: दयारा बुग्याल के जंगलों में कहां खो गई ट्रेकर बबीता? 27 दिन बाद भी सुराग नहीं; भालुओं के अड्डों पर पहुंची सर्च टीम
Babita Pandey Case: दयारा बुग्याल से 29 मई की रात रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई रामनगर निवासी ट्रेकर बबीता पांडेय का लगभग 27 दिन बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है.v

उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल से 29 मई की रात रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई रामनगर निवासी ट्रेकर बबीता पांडेय का लगभग 27 दिन बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है. प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा चलाए गए व्यापक खोज अभियान के बावजूद अब तक टीमों को खाली हाथ लौटना पड़ा है. इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बबीता पांडेय अपने साथियों के साथ ट्रैकिंग दल में शामिल थीं और बताया जाता है कि 29 मई की रात अचानक वह लापता हो गईं. इसके बाद से लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन को उत्तरकाशी जिले के हालिया वर्षों के सबसे बड़े खोज अभियानों में गिना जा रहा है. टीमों ने पहाड़, जंगल, गहरी खाइयों, घास के मैदानों, जल स्रोतों और संभावित ट्रैकिंग मार्गों की बार-बार तलाशी ली, लेकिन न तो बबीता का कोई पता चल पाया और न ही ऐसा कोई ठोस सबूत मिला, जिससे घटना की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके.
भालुओं के अड्डों तक पहुंची सर्च टीम
अब जांच एजेंसियों ने खोज अभियान की दिशा बदलते हुए उन इलाकों पर फोकस करना शुरू कर दिया है, जहां भालुओं की सक्रियता की संभावना जताई जा रही है. दयारा बुग्याल, नटीण के जंगलों और आसपास के दुर्गम क्षेत्रों में एक बार फिर सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है. वन विभाग के अनुसार इन इलाकों में समय-समय पर भालुओं की मौजूदगी दर्ज की जाती रही है, जिसके आधार पर अब गुफाओं, घनी झाड़ियों और दुर्गम ढलानों की भी गहन जांच की जा रही है.
मामले में विभिन्न संभावनाओं पर समानांतर रूप से जांच जारी है. इनमें वन्यजीव हमला, दुर्घटना, रास्ता भटकना, प्राकृतिक आपदा या अन्य मानवीय कारण शामिल हैं. हालांकि, अब तक किसी भी संभावना की पुष्टि नहीं हो सकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय तक कोई प्रत्यक्ष सुराग न मिलने पर पारंपरिक खोज तरीकों के साथ-साथ तकनीकी जांच भी बेहद जरूरी हो जाती है. इसमें डिजिटल फुटप्रिंट, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का विश्लेषण अहम भूमिका निभा सकता है.
परिजनों ने लगाई बबीता की सकुशल वापसी की उम्मीद
इधर, बबीता के परिजन अब भी उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं. परिवार ने प्रशासन से खोज अभियान को और तेज करने की मांग की है. स्थानीय लोग भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इतने बड़े स्तर पर चलाए गए अभियान के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने क्यों नहीं आया.
इस मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—बबीता को आखिरी बार किन परिस्थितियों में देखा गया? क्या सभी तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों का पूरा विश्लेषण हो चुका है? क्या कोई ऐसा सुराग है जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया? और यदि वन्यजीव हमले की आशंका है, तो उसके समर्थन में क्या प्रमाण मौजूद हैं?
फिलहाल दयारा बुग्याल और नटीण के जंगलों में सर्च अभियान जारी है. समय बीतने के साथ यह मामला केवल एक लापता ट्रेकर की तलाश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में ट्रैकिंग सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
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