उत्तराखंड कांग्रेस में सब कुछ 'ऑल इज वेल', अंतर्कलह की खबरों पर हरक सिंह रावत ने क्या कहा?
Harak Singh Rawat: हरक सिंह रावत ने कांग्रेस में किसी भी तरह की फूट से साफ इनकार किया. उन्होंने कहा कि पार्टी में सब कुछ सामान्य है और जो भी बातें बाहर आ रही हैं, वह केवल अफवाहें हैं.

उत्तराखंड में कांग्रेस के भीतर इन दिनों नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही जुबानी जंग को लेकर चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं. इसी बीच एबीपी न्यूज से बातचीत में हरक सिंह रावत ने कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी और पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा.
बातचीत के दौरान हरक सिंह रावत ने कांग्रेस में किसी भी तरह की फूट से साफ इनकार किया. उन्होंने कहा कि पार्टी में सब कुछ सामान्य है और जो भी बातें बाहर आ रही हैं, वह केवल अफवाहें हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और कुछ तथाकथित भाजपा समर्थित मीडिया द्वारा इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, जिससे कांग्रेस को कमजोर दिखाया जा सके.
हरीश रावत के 15 दिन के राजनीतिक अवकाश पर क्या कहा?
हरीश रावत के 15 दिन के राजनीतिक अवकाश को लेकर उठे विवाद पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि किसी भी नेता के जीवन में व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं, जिनकी वजह से वह कुछ समय के लिए राजनीति से दूर रह सकता है. उन्होंने अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि पारिवारिक कारणों से वह भी कई बार राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहे हैं. ऐसे में हरीश रावत के अवकाश को मुद्दा बनाना गलत है और इसे जानबूझकर तूल दिया जा रहा है.
हमने कभी हरीश रावत के खिलाफ नहीं दिया बयान- हरक सिंह रावत
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हमने (हरक सिंह रावत) कभी हरीश रावत के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है. उन्होंने यह जरूर कहा कि किसी भी व्यक्ति को यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि उसके बिना पार्टी नहीं चल सकती. कांग्रेस एक बड़ी पार्टी है और सामूहिक प्रयास से ही आगे बढ़ती है.
कांग्रेस विधायक हरीश धामी के बयान पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस विधायक हरीश धामी द्वारा दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि वह हमेशा हरीश रावत का सम्मान करते हैं. उन्होंने बताया कि 2014, 2017, 2019 और 2022 के चुनाव हरीश रावत के नेतृत्व में लड़े गए हैं और उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है.
2027 में उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनने का दावा
आगामी चुनावों को लेकर उन्होंने बड़ा दावा किया. हरक सिंह रावत ने कहा कि अगर कोई अप्रत्याशित स्थिति नहीं बनी तो 2027 में कांग्रेस की सरकार बनने की पूरी संभावना है. उन्होंने दावा किया कि पार्टी करीब 80 प्रतिशत मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है और सत्ता में वापसी के लिए पूरी तरह तैयार है.
हरक सिंह रावत ने 2016-17 में कांग्रेस के भीतर हुई बगावत पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी के अंदर कुछ नेताओं और विधायकों के साथ लगातार उपेक्षा और अन्याय हो रहा था, जिसकी वजह से हालात बगावत तक पहुंच गए. उनके मुताबिक, जब को मुख्यमंत्री बनाया गया, तब करीब 22-23 विधायक के आवास पर एकत्र हुए थे और अपनी मांगों को लेकर चर्चा कर रहे थे.
उन्होंने बताया कि उस दौरान वरिष्ठ नेता का फोन भी आया और उन्होंने विधायकों से सरकार में शामिल होकर मंत्री पद की शपथ लेने को कहा. लेकिन विधायकों की ओर से कुछ शर्तें रखी गईं. के अनुसार, उन्होंने कहा था कि को मंत्री बनाया जाए और को राज्यसभा भेजा जाए.
हालांकि, उनकी इन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. ने आरोप लगाया कि लगातार उनकी अनदेखी की गई और उनके साथ “शोषण” जैसा व्यवहार हुआ. इसी कारण उन्होंने और उनके साथियों ने खुलकर बगावत का रास्ता अपनाया. उनका कहना था कि जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो उनके पास विरोध के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा.
उन्होंने आगे कहा कि यदि उस समय उनकी मांगों को मान लिया जाता, तो कांग्रेस की स्थिति आज अलग होती. उनके मुताबिक, पार्टी लोकसभा की सभी सीटें जीत सकती थी और राज्य में भी सत्ता में वापसी संभव थी. लेकिन नेतृत्व स्तर पर संवाद की कमी और फैसलों में असंतुलन के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा.
'सुबोध उनियाल को मंत्री बनने से रोका?'
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर वह कौन लोग थे जिन्होंने सुबोध उनियाल को मंत्री बनने से रोका और विजय बहुगुणा को राज्यसभा भेजने से इंकार किया. उनका कहना था कि उस समय लिए गए फैसलों के परिणाम बाद में सभी के सामने आए और कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा.
कुल मिलाकर, ने 2016-17 की बगावत को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि परिस्थितियों से उपजे असंतोष का परिणाम बताया और कहा कि उस दौर में यदि नेतृत्व ने सही समय पर संवाद और संतुलन बनाया होता, तो पार्टी को इतना बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़ता.
रामनगर विधानसभा सीट को लेकर चल रहे विवाद पर भी उन्होंने अपनी बात रखी. हरक सिंह रावत ने बताया कि इस मुद्दे पर रणजीत सिंह रावत और संजय नेगी के साथ उनकी सकारात्मक बातचीत हुई है और जल्द ही समाधान निकलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है ताकि पार्टी को नुकसान पहुंचाया जा सके.
कांग्रेस के भीतर कुछ स्लीपर सेल हैं सक्रिय- हरक सिंह रावत
सबसे अहम आरोप लगाते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि कांग्रेस के भीतर कुछ “स्लीपर सेल” सक्रिय हैं, जो नहीं चाहते कि पार्टी उत्तराखंड में दोबारा सत्ता में आए. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान करना जरूरी है, ताकि पार्टी को अंदर से मजबूत किया जा सके.
अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब किसी भी प्रकार के दबाव या ब्लैकमेलिंग की राजनीति में नहीं आएगी और एकजुट होकर आगे बढ़ेगी. उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और संगठन को मजबूत करने में जुटे रहें.
कुल मिलाकर, उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर जारी बयानबाजी ने सियासत को गरमा दिया है. हालांकि पार्टी के नेता इसे सामान्य बता रहे हैं, लेकिन अंदरूनी खींचतान की चर्चा लगातार जारी है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इन हालात से कैसे निपटती है और 2027 के चुनावों के लिए खुद को कितना मजबूत बना पाती है.
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Source: IOCL


























