Explained: जून तो आ गया लेकिन मानसून क्यों नहीं? केरलम में 3 दिन में पहुंचने की उम्मीद, आपके राज्य में कब देगा दस्तक?
Monsoon 2026: जो लोग यह सोच रहे थे कि 1 जून को ही राहत मिल जाएगी, उन्हें कुछ दिन का इंतजार और करना होगा, क्योंकि मौसम का पूरा मिजाज बदलने वाला है. अगर आप यूपी, राजस्थान या दिल्ली में हैं तो...?

पूरे देश की निगाहें अभी दक्षिण-पश्चिम मानसून पर टिकी हैं. दरअसल, हर साल केरल में मानसून के आने की सामान्य तारीख 1 जून होती है, लेकिन इस बार 2 जून के बाद भी मानसून ने केरल के तट पर दस्तक नहीं दी है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर देरी क्यों हो रही है, मानसून केरल कब पहुंचेगा और सबसे जरूरी यह कि जिस भीषण गर्मी और लू से उत्तर भारत समेत कई राज्य झुलस रहे हैं, उससे राहत कब मिलेगी.
मानसून की मौजूदा स्थिति क्या है और अभी कहां तक पहुंचा?
2 जून 2026 की सुबह तक मानसून की उत्तरी सीमा (नॉर्दर्न लिमिट) अभी भी दक्षिण अरब सागर, लक्षद्वीप के कुछ और हिस्सों, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर से होकर गुजर रही है. केरल का तट अभी मानसून की मुख्य धारा से अछूता है, हालांकि केरल और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में प्री-मानसून बारिश हो रही है, जिससे हल्की नमी आई है, लेकिन वह मानसून की शुरुआत नहीं है.
IMD ने पहले ही साफ कर दिया था कि इस बार केरल में मानसून के आगमन की संभावित तारीख 4 जून के आसपास रहेगी, जिसमें चार दिन ऊपर-नीचे की गुंजाइश हमेशा रहती है. अब विभाग का कहना है कि अगले 2-3 दिनों के दौरान हालात तेजी से अनुकूल बन रहे हैं और उम्मीद है कि 5 जून तक मानसून केरल पहुंच जाएगा.
देरी की वजह- इस बार मानसून क्यों लेट है?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून की रफ्तार और समय पर दस्तक कई वैश्विक और स्थानीय कारकों पर निर्भर करती है. इस बार शुरुआत में हिंद महासागर में क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो यानी भूमध्य रेखा पार करके आने वाली हवाएं उम्मीद से कमजोर रहीं, जिसकी वजह से नमी का बहाव धीमा रहा.
इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मौसमी सिस्टम नहीं बन पाया जो मानसून को खींचकर तेजी से आगे ले जाता. मैडन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का चरण भी कुछ दिनों तक मानसून के अनुकूल नहीं रहा, जिससे बादलों का बड़ा समूह संगठित नहीं हो सका. हालांकि, अब हालात बदल रहे हैं. अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में नमी बढ़ रही है, हवाओं की गति में सुधार हुआ है और बादलों का दायरा घना होता जा रहा है, जिससे अगले 48-72 घंटों में मानसून केरल के तट पर दस्तक देने के पूरे आसार हैं.
IMD की ही एक रिपोर्ट बताती है कि केरल में 1 जून के बाद 7 दिनों तक का उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है, इसलिए इसे कोई असामान्य देरी नहीं कहा जा सकता, लेकिन गर्मी में घिरे लोगों के लिए हर घंटा भारी है.
केरल में कब पहुंचेगा और फिर कैसे बढ़ेगा मानसून?
IMD के ताजा बयान के मुताबिक, 4-5 जून के बीच केरल में मानसून की औपचारिक शुरुआत होने की मजबूत संभावना है. इसके बाद अगले 72 घंटों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और कर्नाटक के तटीय इलाकों, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करना शुरू कर देगा. 10 जून तक इसके महाराष्ट्र और गोवा तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 15 जून के आसपास मानसून की एंट्री हो सकती है. बंगाल की खाड़ी वाली शाखा भी सक्रिय हो रही है, जो पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में पहले ही बारिश ला सकती है.
केरल पहुंचने के बाद मानसून कितनी रफ्तार से आगे बढ़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या बंगाल की खाड़ी में कोई कम दबाव का क्षेत्र बनता है, जो उसे खींचकर तेजी से उत्तर की ओर ले जाए. फिलहाल इसके आसार कम हैं, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियाँ पहले ही कई राज्यों में गर्मी से राहत देने वाली हैं.
आपके राज्य में कब मिलेगी गर्मी से राहत?
सबसे अहम सवाल यही है कि जिस भीषण लू और हीटवेव का सामना अभी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों में हो रहा है, उससे कब राहत मिलेगी. IMD के मुताबिक, एक बड़ी राहत की खबर यह है कि प्री-मानसून सिस्टम सक्रिय होने की वजह से 5-6 जून से मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि शुरू होने की संभावना है.
इसके चलते हीटवेव की तीव्रता में 4 जून के बाद से भारी गिरावट आना तय है. इन राज्यों में हीटवेव का अंत होने वाला है और बारिश का दौर शुरू होगा. अब जानते हैं कि अलग-अलग राज्यों में मानसून कब पहुंचेगा और उससे पहले ही गर्मी से राहत का क्या समीकरण है:
- दक्षिण भारत: केरल और तटीय कर्नाटक में तो मानसून 5-7 जून तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा, वहीं आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में प्री-मानसून बौछारें 7-8 जून से ही शुरू हो सकती हैं. तेलंगाना और आंध्र में मानसून आमतौर पर 10-12 जून तक आता है, इस बार भी यही अनुमान है. यहां हीटवेव की स्थिति पहले से कम है, लेकिन तापमान में गिरावट तेजी से आएगी.
- पश्चिमी और मध्य भारत: महाराष्ट्र और गोवा में मानसून 10-12 जून के बीच दस्तक देगा, लेकिन मुंबई सहित कोंकण इलाके में प्री-मानसून बारिश 8-9 जून से शुरू हो सकती है, जिससे उमस भरी गर्मी से छुटकारा मिलेगा. मध्य प्रदेश के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि राज्य के ज्यादातर हिस्सों में 5-6 जून से ही आंधी-पानी का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जो मौजूदा हीटवेव को पूरी तरह खत्म कर देगा. मानसून की मुख्य धारा मध्य प्रदेश में 15-18 जून के आसपास पहुंचेगी, लेकिन उससे पहले ही प्री-मानसून बारिश खेती के लिए भी फायदेमंद रहेगी.
- उत्तर भारत: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड में मानसून सामान्य तौर पर 25 जून से लेकर जुलाई के पहले हफ्ते तक आता है, इस बार भी कोई बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है. लेकिन इन राज्यों के लोगों को मानसून आने से पहले ही 5-6 जून से प्री-मानसून बारिश, धूल भरी आंधी और ओलावृष्टि से राहत मिलने लगेगी. IMD ने खासतौर पर कहा है कि 5 जून से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और मैदानी इलाकों में एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसके चलते राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 6-8 जून के दौरान तेज हवाओं के साथ बारिश और ओले गिरने का अनुमान है. इसका सीधा असर यह होगा कि पारा 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क जाएगा और लोगों को चिलचिलाती गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी. उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में तो पहले ही बारिश शुरू हो गई है, जिससे वहां तापमान सामान्य हो गया है.
- पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मानसून 12-15 जून के आसपास प्रवेश कर सकता है, लेकिन यहां काल बैसाखी और नॉर्वेस्टर के रूप में प्री-मानसून गतिविधियाँ 8-10 जून से ही तेज हो जाएंगी. झारखंड और बिहार में इस समय हीटवेव की जो स्थिति है, वह प्री-मानसून बारिश के चलते 7-8 जून से काफी हद तक कम होने की उम्मीद है. पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी तापमान गिरकर सामान्य के आसपास आ जाएगा.
IMD की ताजा हीटवेव चेतावनी और राहत की टाइमलाइन
IMD ने अपने 2 जून के बुलेटिन में साफ कहा है कि राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में 3 और 4 जून को भी हीटवेव का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी रहेगा. 5 जून से इन इलाकों में हीटवेव की तीव्रता घटनी शुरू होगी और 6 जून के बाद बारिश के कारण लगभग सभी जगहों से लू का प्रकोप खत्म हो जाएगा.
विभाग के मुताबिक, अगले 4-5 दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकतम तापमान में 4-6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जाएगी. इसके साथ ही पूर्वी और मध्य भारत में भी तापमान सामान्य स्तर पर आ जाएगा. मौसम विशेषज्ञों की मानें तो इस बार प्री-मानसून बारिश का दौर काफी मजबूत रहने वाला है, जो मानसून के आगमन से पहले ही लोगों को गर्मी से निजात दिला देगा.
कुल मिलाकर क्या रहेगा पूरा गणित?
मानसून केरल में 5 जून तक पहुंचेगा और इसके बाद तेजी से दक्षिण और पूर्वी राज्यों को कवर करना शुरू करेगा. हालांकि उत्तर भारत तक मानसून के पहुंचने में अभी तीन से चार हफ्ते का वक्त है, लेकिन उससे पहले ही 5-6 जून से शुरू हो रही प्री-मानसून बारिश और आंधी का दौर गर्मी और लू से बड़ी राहत देने वाला है. जो लोग यह सोच रहे थे कि 1 जून के फौरन बाद राहत मिल जाएगी, उन्हें बस 3-4 दिन का और इंतजार करना होगा, क्योंकि मौसम का पूरा मिजाज बदलने वाला है.
अगर आप उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली या उत्तराखंड में हैं, तो 5-6 जून के बाद आसमान में बादल और बारिश की बूंदें गर्मी से राहत का पैगाम लेकर आएंगी. जो लोग केरल-कर्नाटक में हैं उनके लिए तो मानसून बस कुछ ही घंटों की दूरी पर है.

























