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उत्तराखंड में ग्लेशियर पिघलने के खतरनाक हुईं कई झीलें, फटने से मचेगी बड़ी तबाही, रिसर्च में खुलासा

Uttarakhand Glacier News: वैज्ञानिकों ने 1000 मीटर के दायरे की 426 ग्लेशियर झीलों का अध्ययन किया, इनमें से 25 को बेहद खतरनाक माना गया है. जिन पर फटने का खतरा मंडरा रहा है.

Uttarakhand News: उत्तराखंड में तेजी से पिघलते ग्लेशियर अब चिंता का बड़ा सबब बनते जा रहे हैं. यहीं के 25 झीलें ग्लेशियर पिघलने की वजह से खतरनाक रूप से बढ़ रही है. जिससे झीलों के फटने का खतरा मंडरा रहा है. ऐसे में आसपास के इलाकों में भारी तबाही हो सकती है. देहरादून की वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालय जियोलॉजी के अध्ययन में ये बात सामने आई है. जिसमें इन सभी झीलों को चिन्हित किया गया है. 

इस शोध में रिमोट सेंसिंग उत्तर का उपयोग कर उत्तराखंड में तकरीबन 1000 वर्ग मीटर के दायरे में 426 झीलों का अध्ययन किया गया, जो 9 घाटियों में फैली हुई है. वैज्ञानिकों ने झीलों को उसके विस्तार आबादी से दूरी और ढलान जैसी बातों को प्रमुख आधार बनाया है, यह रिसर्च अंतरराष्ट्रीय जनरल नेचुरल हेजार्ड में प्रकाशित हुई है.  

ग्लेशियर पिघलने से झीलों के फटने का खतरा
देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ मनीष मेहता और उनके रिसर्च में शामिल छात्र संतोष पेंट और पंकज कुमार ने हिमालय के ऊंचे क्षेत्र में प्राकृतिक खतरों पर आधारित रिसर्च में पाया कि जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे ग्लेशियर और बर्फ पिघलने की से ग्लेशियर झीलों का निर्माण हो रहा है और जो झीलें वहां पहले से मौजूद थी उनका निरंतर विस्तार हो रहा है. 

उत्तराखंड में इस समय कुल 1266 ग्लेशियर झीलों की निगरानी वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. वैज्ञानिकों ने 1000 मीटर के दायरे की 426 ग्लेशियर झीलों का अध्ययन किया, इनमें से 25 को बेहद खतरनाक माना गया है. ये झीलें इतनी खतरनाक हैं कि किसी भी समय इनके टूटने या फटने से बाढ़ जैसी आपदा आ सकती है. ये सभी झीलें ग्लेशियर के बहुत नजदीक हैं. 

इन घाटियों में सबसे ख़तरनाक झीलें
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे ज्यादा खतरनाक झीलें अलकनंदा घाटी में पाई गई हैं. यहां 226 झीलें हैं, जिनमें से कई खतरनाक हैं. इसके बाद भागीरथी घाटी में 131, मंदाकिनी में 12, धौलीगंगा में 19, कालीगंगा में 5, रामगंगा (पूर्वी) में 1, गोरीगंगा में 9, और कट्यूरगाड़ में 18 झीलें चिन्हित की गई हैं. सबसे कम संख्या में झीलें पिंडर घाटी में पाई गईं, जहां कोई खतरनाक झील नहीं मिली है,

इन झीलों को खतरनाक इसलिए माना गया है क्योंकि ये झीलें ग्लेशियर के बहुत पास हैं. इनका आकार लगातार बढ़ रहा है. इनके आसपास की चट्टानें कमजोर हैं,मानसून या भूकंप जैसी घटनाएं इनके फटने की वजह बन सकती हैं. अगर इनमें से कोई भी झील फटती है, तो ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी स्थिति बन सकती है, यह बाढ़ निचले इलाकों में भारी तबाही मचा सकती है.

बड़ी घाटी के लिहाज से अलकनंदा संवेदनशील है, चूंकि आबादी का दबाव इस पर अधिक है. जिसमें कुल 25 संवेदनशील झीलों नौ शामिल हैं. 25 में से दस झीले सीधे ग्लेशियर के संपर्क में हैं. उत्तराखंड में इससे पहले भी ग्लेशियर झीलें खतरे का कारण बन चुकी हैं, 2021 में चमोली जिले के रेनी गांव में ऋषिगंगा नदी में अचानक बाढ़ आई थी, जिसमें कई लोगों की जान गई थी और बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था.  

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