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Hydrogen Train: अब पहाड़ों पर रफ्तार भरेगी हाइड्रोजन ट्रेन, कहां-कहां चलेगी?

Hydrogen Train: रेलवे अब हाइड्रोजन ट्रेन को पहाड़ी रूटों पर चलाने की तैयारी कर रहा है. ये ट्रेन कम प्रदूषण के साथ ही कम शोर के साथ चलेगी, जिससे पहाड़ी इलाकों के पर्यावरण को फायदा मिल सकता है.

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  • कालका-शिमला सहित आठ प्रमुख पहाड़ी रूट चुने गए हैं।

Hydrogen Trains Expansion: समय के साथ भारतीय रेलवे ने भी कई आधुनिक ट्रेनों की शुरुआत की है. रेलवे ने केवल यात्रियों की सुविधाओं का ही ध्यान नहीं रखा, बल्कि पर्यावरण को देखते हुए भी ऐसी ट्रेनें तैयार की है, जिससे प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी.

ऐसे में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को जींद से सोनीपत रूट के बीच चलाई जाती है और इसमें यात्रियों की सुविधाओं का भी ध्यान में रखा गया है. किफायती के साथ प्रदूषण कम करने वाली हाइड्रोजन ट्रेनों को बढ़ावा देने की तैयारी है. अब इन्हें पहाड़ों पर चलाने की तैयारी की जा रही है.

कितनी ट्रेनों को चलाया जाएगा?

बता दें कि रेलवे की योजना एक-दो नहीं, बल्कि 35 ट्रेनों को चलाने की है. इन ट्रेनों की खासियत यह है कि ये ट्रेनें पारंपरिक ईंधन की जगह हाइड्रोजन से चलाई जाएंगी, जिसकी वजह से इससे धुएं की जगह पानी की भाप निकलेगी, जो पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचाएगी. पहाड़ी इलाकों में रेलवे ट्रैक का इलेक्ट्रिफिकेशन करना आसान नहीं होता है. ऐसे में इन रूटों पर हाइट्रोजन ट्रेन एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है.

प्रदूषण कम करने पर फोकस

रेलवे अब हाइड्रोजन का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी काम कर रहा है. इतना ही नहीं, बल्कि रेलवे इसके लागत को कम करने पर भी जोर दे रहा है. खासकर रेलवे प्रदूषण को कम करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर खास ध्यान दे रहा है. जिससे प्रदूषण को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी.

रेलवे ने आज रद्द की कई ट्रेनें, कुछ रेल आधे रास्ते तक ही चलेंगी

कहां-कहां चलेगी?

रेलवे 8 प्रसिद्ध पहाड़ी मार्ग पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयार में है.

  • कांगड़ा घाटी रेलवे
  • कालका-शिमला रेलवे
  • कांगड़ा-शिमला रेलवे
  • बिलमोरा-वाघई रूट
  • नीलगिरी माउंटेन रेलवे
  • माथेरान हिल रेलवे
  • मऊ-पातालपानी रूट
  • मारवाड़-देवगढ़ मदारिया रूट
  • दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे

हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत क्या-क्या है?

  • इस ट्रेन की सबसे खास बात तो यही है कि इस ट्रेन से धुआं नहीं निकलता है. बल्कि पानी की भाप निकलती है.
  • साथ ही डीजल इंजन के मुताबिक हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन काफी शांत होता है.
  • इसके अलावा हाइड्रोजन टैंक को लगभग 15-20 मिनट में ही भरा जा सकता है.
  • ये ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनने वाली बिजली से चलती है.

पहाड़ों के लिए वरदान साबित हो सकती है ट्रेन

पहाड़ी इलाकों में ये ट्रेन वरदान साबित हो सकती है और इसके पीछे कई वजह भी है, जैसे पहाड़ी इलाकों में अगर ये ट्रेन चलाई जाएगी तो वहां पर प्रदूषण कम होगा. डीजल ट्रेन से निकलने वाला धुआं और शोर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन हाइड्रोजन ट्रेन बिना प्रदूषण और ज्यादा शोर किए चलती है, जिसकी वजह से ये ट्रेन पहाड़ों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है.

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शैलजा पांडे वर्तमान में ABP न्यूज़ में कंसल्टेंट के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं. शैलजा यहां चैनल के डिजिटल विंग में काम कर रही हैं. इन्होंने अपनी पत्रकारिता की शुरूआत एबीपी न्यूज़ चैनल से बतौर इंटर्न की थी. इनके काम को देखते हुए एबीपी ने इन्हें कंसल्टेंट की जिम्मेदारी से नवाजा. यह बीते करीब दो साल से एबीपी न्यूज़ को अपनी सेवाएं दे रही हैं. शैलजा यहां यूटिलिटी सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. वह एआई और स्टेट टीम को भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. शैलजा ने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से की है. यहां इन्होंने  रेडियो और टेलीविजन प्रोडक्शन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है.

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