बिहार में प्रचंड जीत के बाद यूपी की ओर बढ़ेगा बीजेपी का रथ! इन चार मोर्चों पर रहेगी सबकी नजर
UP Politics: बिहार विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने जीत का रथ उत्तर प्रदेश की ओर मोड़ दिया है. बीजेपी जल्द ही प्रदेश में पार्टी के संगठन समेत कई बड़े बदलाव कर सकती है.

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद उत्तर प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी के हौसले बुलंद हो गए हैं. बिहार में जीत का परचम लहराने के बाद बीजेपी ने देश के सबसे बड़े राज्य में जीत का रथ मोड़ दिया है. ऐसे आने वाले दिनों में पार्टी को लेकर कई अहम फैसले भी लिए जा सकते हैं.
उत्तर प्रदेश में अगले साल पंचायत चुनाव और फिर 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. पार्टी का पूरा फोकस अब मिशन यूपी पर ही रहने वाला हैं, जिसे देखते हुए अब योगी सरकार की कैबिनेट और पार्टी के संगठन में बदलाव देखने को मिल सकते हैं. लंबे से समय लंबित बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी फैसला हो सकता है.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर फैसला
यूपी के काफी समय से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर मंथन चल रहा है लेकिन, पार्टी में अंदरुनी खींचतान की वजह से अब तक इसे लेकर फैसला नहीं हो पाया हैं. बीजेपी किसी ऐसे चेहरे की तलाश में है जिससे जातीय समीकरण को साधा जा सके.
चर्चा है बीजेपी ओबीसी समाज से किसी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का दाँव चल सकती है. इस रेस में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, कबीना मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और धर्मपाल सिंह के नाम सबसे आगे चल रहे हैं. इसके अलावा पार्टी दलित चेहरे को लेकर भी मंथन कर रही है जिसमें रामशंकर कठेरिया और ब्राह्मण चेहरे के तौर सांसद दिनेश शर्मा के नाम की भी चर्चा हो रही है.
पंचायत चुनाव को लेकर भी तैयारी
यूपी में अगले साल पंचायत चुनाव होने हैं, बीजेपी इसे भी विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़ कर देख रही हैं. पार्टी का मानना है कि पंचायत चुनाव का असर विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा. लोकसभा चुनाव में सपा के हाथों मिली हार के बाद बीजेपी अब राज्य में हर फैसला सोच-समझकर उठा रही है.
एसआईआर की प्रक्रिया पर भी टिकी नजर
बिहार के बाद उत्तर प्रदेश में भी इस महीने से एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हो गई हैं. राज्य में 22 साल बाद कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर भी पार्टी ने पूरी नजर बनाए हुई है. इसके लिए बीजेपी मंडल, विधान सभा क्षेत्र और प्रदेश स्तर पर अलग-अलग वार रूम बनाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखी जा सके.
विपक्षी दल भी एसआईआर को लेकर एक्टिव हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि अगर एसआईआर में कोई भी गड़बड़ी हुई तो वो सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. सपा भी एसआईआर पर निगरानी के पीडीए प्रहरी बनाएगी.
यूपी कैबिनेट में हो सकता है बदलाव
उत्तर प्रदेश में काफी समय में कैबिनेट में बदलाव की चर्चाएं भी तेज हैं. बीजेपी राज्य के जातीय समीकरण को साधने के लिए कैबिनेट में नए चेहरे शामिल कर सकती है. बिहार चुनाव की वजह से इसमें देरी हुई. लेकिन अब जल्द ही इस पर भी काम होगा. पिछले महीने सीएम योगी ने इसे लेकर दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी.
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