'दबदबा था दबदबा है और रहेगा, मैं इनका बाप हूं...', रितेश्वर महाराज के बयान पर भावुक हुए बृजभूषण सिंह
Gonda News: नंदिनी निकेतन में भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह द्वारा आयोजित आठ दिवसीय राष्ट्रकथा महोत्सव के अवसर पर कथावाचक रितेश्वर महाराज मंच से कथा कह रहे थे.

उत्तर प्रदेश के गोंडा में बीजेपी के पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह द्वारा नंदिनी निकेतन में आयोजित 8 दिवसीय राष्ट्रकथा कार्यक्रम में कथावाचक सतगुरु रितेश्वर महाराज जी ने मंच से कथा के दौरान ऐसा कह दिया कि वह चर्चा का विषय बन गया. रितेश्वर महाराज ने कथा को संबोधित करते हुए कहा, “मैं इनका बाप हूं, मेरा भी दबदबा था, दबदबा है और रहेगा.” बस सतगुरु रितेश्वर महाराज के मुंह से इतना ही सुनते पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के आंख भर आए.
पंडाल में मौजूद सभी लोग इसके बाद उठकर अभिभादन करने लगे. यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है. दरअसल यौन शोषण के आरोप के चलते बृज भूषण शरण सिंह को बीजेपी ने टिकट नहीं दिया था और उनके बेटे को टिकट दिया जो कैसरगंज से सांसद हैं. उनके समर्थक उनके दबदबे को लेकर खूब वीडियो पोस्ट करते हैं. और जब कथावाचक रितेश्वर महाराज ने दबदबे का जिक्र किया तो सबमें फिर जोश भर गया.
नंदिनी निकेतन में आठ दिवसीय कथा आयोजित
नंदिनी निकेतन में भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह द्वारा आयोजित आठ दिवसीय राष्ट्रकथा महोत्सव के अवसर पर कथावाचक रितेश्वर महाराज मंच से कथा कह रहे थे. इस बीच उन्होंने अपने आप को बृजभूषण शरण सिंह का पिता बताते हुए दबदबा शब्द का इस्तेमाल कर दिया.
रितेश्वर महाराज ने श्रोताओं के सामने मंच से ही बोल दिया, “पंडाल में बैठे लोगों आपको कल भी चेतावनी दी थी और आज भी चेतावनी देता हूं कि अगर बृजभूषण को आप समझते हो कि भारत में, उत्तर प्रदेश में और गोंडा में कहते हो कि दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा. तो यहां पर इनका बाप (रितेश्वर महाराज) बैठा है. इसका भी दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा.”
रितेश्वर महाराज के इतना बोलते ही पूर्व भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह भावुक हो उठे और उनके आंख आंसू निकल आए, उन्होंने अपने आंसू पोंछे और महाराज का फिर अभिवादन किया.
बिना पैसे लिए कथा करने का दावा
रितेश्वर महाराज ने भरे मंच से कथा के दौरान यह भी कहा, “हम भी आज तक भारतवर्ष की इस भूमि पर कभी किसी से बिना कुछ स्वीकार किए मां भारती के लिए, राम के लिए, भगवान कृष्ण के लिए, प्रभु हनुमान के लिए कथा करते हुए सनातन को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. मेरी 52 वर्ष की आयु मेरी हो गई पर कोई भी एक व्यक्ति खड़ा होकर यह नहीं कह सकता है कि हमने तुमको पैसे दिए और तुमने कथा कही हो.”
उन्होंने भगवान का उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि भगवान जाने कैसे चल रहा है और भगवान ही चला रहा है, ऐसे ही चलता रहेगा पूरा जीवन. उन्होंने राष्ट्रकथा कहने का अधिकार किसको होना चाहिए. इस पर उदाहरण देते हुए कहा कि यह अधिकार उसको होने चाहिए जो राम पर और राष्ट्र पर पूरी तरह से न्योछावर हो. अपनी सारी जवानी जिसने न्योछावर कर दी हो, अपनी वाणी, अपनी कहानी और जिंदगानी न्योछावर कर सकता हो वही राष्ट्र की एकता और अखंडता को जोड़ सकता है. इसीलिए हम सौभाग्यशाली हैं कि सरयू की इस पावन धरती पर हमको यह मौका और यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है.
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