वरिष्ठ इतिहासकार नफीस सिद्दीकी का निधन, रामपुर रियासत के इतिहास पर लिखी थीं कई अहम किताबें
Rampur News: नफीस सिद्दीकी रामपुर दरबार का संगीत एवं नवाबी रस्में’ तथा ‘तारीख़–ए–रुहेला’ समेत कई पुस्तकों के लेखक थे. मरहूम के दो बेटे आमिर सिद्दीकी और आदिल सिद्दीकी हैं.

उत्तर प्रदेश के रामपुर में वरिष्ठ इतिहासकार नफीस सिद्दीकी का निधन हो गया. वो ‘रामपुर दरबार का संगीत एवं नवाबी रस्में’ तथा ‘तारीख़–ए–रुहेला’ समेत कई पुस्तकों के लेखक थे. मरहूम के दो बेटे आमिर सिद्दीकी और आदिल सिद्दीकी हैं. इतिहासकार नफीस सिद्दीकी का जन्म 10 अक्टूबर 1944 को रामपुर में हुआ, जबकि उन्होंने आखिरी सांस रविवार देर रात्रि उपचार के दौरान दिल्ली के एक अस्पताल में ली. सोमवार को रामपुर में उनकी तदफीन अमल में आई. नमाज़े जनाज़ा में काफी संख्या में लोग शामिल हुए.
इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) रुहेलखंड चैप्टर के सह संयोजक काशिफ खां ने बताया कि नफीस सिद्दीकी को इतिहास के बारे में काफी जानकारी थी. इतिहास और संगीत पर पुस्तकों के अतिरिक्त उनके द्वारा लिखे गए ड्रामों के संग्रह ‘खुसरो’ और ‘दर्द के रिश्ते’ भी प्रकाशित हो चुके हैं. उन्होंने कई धारावाहिक भी लिखे, जिनमें आवाज़, एक और कहानी, ख़ामोशी की आवाज़, कभी धूप कभी छाँव और यह तंग ज़मीन प्रमुख हैं. उन्होंने आकाशवाणी के लिए भी सीरियल लिखे थे, जिनमें कुछ के शीर्षक यह थे : सरज़मीने रुहेलखण्ड, मेरा पैगाम मोहब्बत है, वादी–ए–क़दीशा, कहानी खंडहरों की.
कई ड्रामे बहुत ज्यादा लोकप्रिय हुए
काशिफ खां ने बताया कि नफीस सिद्दीकी के कई ड्रामे बहुत लोकप्रिय हुए, जिनमें प्रमुख हैं- नेहर छूटा जाए, दो बूँद अमृत की, आखिरी शब के हमसफ़र, अज़ीज़न, आस के सुर, ज़मीर की आवाज़, लाजवंती, शीश महल और देवता. स्टेज प्ले और ओपेरा में भी उनका काफी दखल था. उन्होंने बताया कि रजा लाइब्रेरी के निदेशक रहे डॉ वक़ारुल हसन सिद्दीकी और आकाशवाणी की केंद्र निदेशक रहीं मंदीप कौर ने उनसे रामपुर के इतिहास और संस्कृति पर काफी काम कराया था.
जब 2019–2020 में तत्कालीन जिलाधिकारी (अब मंडलायुक्त मुरादाबाद) आंजनेय कुमार सिंह ने रामपुर महोत्सव का आयोजन किया था, तब भी वो काफी सक्रिय रहे थे. उन्हें कई सम्मानों से भी नवाज़ा गया था.
रामपुर सियासत के इतिहास के जानकार थे
काशिफ खां ने कहा कि नफीस सिद्दीकी रामपुर रियासत के इतिहास, नवाबी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का गहन ज्ञान रखने वाले अनुभवी इतिहासकार थे. जिंदगीभर उन्होंने रामपुर के गौरवशाली इतिहास को दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया. उनका निधन बहुत बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है.
























