आजम खान, पत्नी और बेटे ने जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से दिया इस्तीफा, क्या बुलडोजर को रोक पाएगी सपा?
Azam Khan Resign: रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से सपा नेता आज़म खान, उनकी पत्नी और बेटे ने इस्तीफा दे दिया है. हालांकि इस मुद्दे को लेकर पूरे परिवार की ओर से चुप्पी देखने को मिल रही है.

अखिलेश यादव के निर्देश पर समाजवादी पार्टी जिस जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए कल 23 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में अपने विधायकों पूर्व विधायकों और नेताओं का प्रतिनिधि मंडल रामपुर भेज रही है. इससे पहले सपा नेता आजम खान, उनकी पत्नी डॉ ताज़ीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम ने जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है.
आजम परिवार के तीनों सदस्य अब जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट में पदाधिकारी नहीं हैं और अपने-अपने पदों से इस्तीफे दे चुके है. हालांकि आजम खान और उनका परिवार इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है लेकिन, जानकारी के मुताबिक ये तीनों ट्रस्ट से अपना इस्तीफा दे चुके हैं.
जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से दिया इस्तीफा
इन तमाम बातों के बीच बड़ा सवाल ये है कि जिस जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर समाजवादी पार्टी आंदोलित है उस को संचालित करने वाले ट्रस्ट से आज़म खान उनकी पत्नी और बेटा अब्दुल्लाह आज़म अपना सम्बंध तोड़ चुके हैं और अब मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों में अध्यक्ष निकहत अफ़लाक, उपाध्यक्ष मुश्ताक अहमद सिद्दीकी, सचिव मोहम्मद अदीब आजम, संयुक्त सचिव नसीर अहमद खान और कोषाध्यक्ष जावेद उर रहमान खान हैं.
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश रामपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और जिला अधिकारी अजय कुमार द्विवेदी 15 जुलाई को दे चुके हैं. जिसके खिलाफ ट्रस्ट की अध्यक्ष निकहत अफलाक ने आयुक्त मुरादाबाद के न्यायालय में अपील दायर की है. 28 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई होगी.
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रामपुर जाएगा सपा का डेलीगेशन
दूसरी तरफ जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतों को ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए समाजवादी पार्टी 23 जुलाई को अपना प्रतिनिधिमण्डल रामपुर भेज रही है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में ये प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को रामपुर के डीएम से मुलाक़ात करेगा और ज्ञापन सौंपेगा.
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर आजम खान और उनकी पत्नी व बेटे ने यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से इस्तीफे क्यों दिए इसके पीछे की वजह क्या है? हालांकि ट्रस्ट से खुद को अलग कर लेने के बाद भी डॉ ताज़ीन फातिमा लगातार यूनिवर्सिटी के कामों को देख रही हैं. मंगलवार को वो यूनिवर्सिटी भी गयी थीं और उन्होंने यूनिवर्सिटी गेट पर धरना दे रहे छात्र छात्राओं से मुलाकात की थी.
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या आज़म खान के खुद को यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से अलग कर लेने और समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि मंडल के रामपुर आने से जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतें ध्वस्त होने से बच पाएंगी.
























